खेल-खेल में बेटी को चोदा-4

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मेरी पत्नी के सबसे पुराने आशिक, 63 साल के पहलवान से दिखने वाले आदमी ने मुझसे खुशामद किया कि मैं उसे और अपनी पत्नी को बदनाम ना करुं। मैंने उससे वादा लिया कि अब वो अपने बहु को कभी नहीं चोदेगा।

पहले तो संध्या ने मुझे कुर्सी पर ही उपर से चोदा। उसके बाद मैंने बिना बुर से लंड निकाले संध्या को उठाया और बग़ल में रखे सोफ़ा पर लिटाया और चोदने लगा। संध्या ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी मारती हुई मस्ती लेती रही। दरवाज़ा पर नॉक किए बिना कोई अंदर घुसा और एक आदमी की आवाज़ सुनाई दी,

“नरेन भैया, कितने दिनों बाद ये खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है। बाबू जी भी संध्या को चोदते हैं। लेकिन संध्या के चेहरे पर उस समय उदासी रहती है। पर देखिये, अभी मेरी पत्नी का चेहरा कितना खिल उठा है। कितना चमक रहा है।

बाबू जी, आपने अपनी बहु को बहुत चोद लिया। संध्या को चैन से नरेन के साथ मस्ती मारने दीजिए और आप उस घटिया रंडी अणिमा को चोदते रहिए। नरेन भैया, आप उस कुतिया को घर से निकाल क्यों नहीं देते? मेरी बहन नम्रता को भी अपने जैसा रंडी बना देगी।”

संध्या को लगातार चोदते हुए बोला, “क्या करुं? कैसे निकालूँ घर से? विमल, वो औरत तुम्हारे बाबू जी की असल पत्नी है। तुम्हारी छोटी मां है।” विमल को अणिमा कभी पसंद नहीं आई। विमल अपनी पत्नी की चूचियों को सहलाते बोला, “मेरे लंड में दम होता तो उस कुतिया की गांड में लंड घुसाये रखता। आज ही मालूम हुआ कि साली विनोद ( मेरा बेटा ) से भी छोटे उम्र के आदमी से चुदवा रही है।”

मेरे साथ संध्या बहुत ही खुश रहती थी।संध्या ने चूतड़ उचकाते हुए कहा, “विमल, जब 63 साल का बुड्ढा, तेरे बाबू जी का लंड अणिमा की बुर में घुसने के लिए हमेशा तैयार रहता है, तो कोई भी जवान आदमी उसे चोदेगा। तेरा ये भाई शाम से ही बुर में लंड घुसा कर बैठा है। खाना नहीं बना पाउंगी, बाहर से ले आओ।”

कुछ देर और चोद कर लंड बाहर निकाल लिया। प्रेम ने जो कैप्सूल दिया था उसका असर दिखाई देना शुरू हो गया था। अपने पति और ससुर के सामने संध्या ने लंड को चूसा भी, फिर भी लंड से पानी नहीं निकला। एक बार फिर राघव से कहा कि वो संध्या को ना चोदे। इस बार संध्या के पति ने भी अपने बाप को मना किया। राघव ने क़सम खाई कि अब वो संध्या को कभी परेशान नहीं करेगा।

घर वापस लौटते समय सोचा कि घर जाकर रात भर अणिमा को चोदूंगा। लेकिन आदमी सोचता कुछ और है और होता कुछ और है। रात के साढ़े नौ बजे घर लौटा। घर के अंदर घुसा तो देखा कि अणिमा ऐसा गाउन पहन कर बैठी थी, जिससे उसकी चूचियां और जांघें साफ़-साफ़ दिख रही थी। मुझे लगा कि वो कुछ प्लान कर के बैठी थी।

मैंने उसे मोबाइल फ़ोन वापस करते हुए कहा, “तुम फ़ोन को ऐसे फेंक कर कैसे बैंक चली गई? 12 बजे वापस आया तो सोफ़ा के नीचे गिरा हुआ देखा। फ़ोन डेड हो गया था। प्रेम ने नया बैटरी डाल दिया है। वो तुम्हें चोदने के लिए पागल है। जल्दी से एक पूरी रात उसके लिए निकालो।”

अणिमा कुछ देर तक मुझे घूरती रही। वो जरुर समझ गई होगी कि मैंने उसकी आज की चुदाई का विडियो जरुर देख लिया होगा। बिना किसी भूमिका के बोली, “आज मुझे अशोक को अपने साथ सुलाने दो तो कल की पूरी रात प्रेम के साथ नंगी रहूंगी।”

कहां तो मैं खुद उसे रात भर चोदना चाहता था, और कहां वो अपने नये यार को साथ सुलाने की परमिशन मांग रही थी। मैंने परमिशन दे दी।

“बुला लो, लेकिन कल की रात प्रेम के साथ।”

मेरी बात सुन कर वो खड़ी हुई, और मुझे गले लगा कर चूमा। मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी बुर पर दबाया। अणिमा बोली,

“तुमने मेरा ध्यान रखना शुरु कर दिया है, इसलिए जल्दी तुम्हें एक नई माल मिलेगी। रात में हमारे रुम में ताक -झांक मत करना। घर में किरण है, उसे पटा कर चोदो। हाथ मुंह धो लो, खाना लगाती हूं।”

वो किचन गई। मैंने कमरे में जाकर ड्रेस बदला। सिर्फ़ एक हाउस कोट जैसा गाउन पहना। अंडरवियर नहीं पहना और पेनड्राईव लेकर बेटी के रुम में गया। दोनों लड़कियां, नम्रता और किरण एक साथ मुझ पर झपटी। एक साथ बोली, “हमारी क्रीज़ बल्ले का शॉट खाने के लिए तैयार है, कहां थे इतनी देर? बल्ला निकालो, और शॉट मारना शुरु करो।”

दोनों चुदाई के मूड में थी। दोनों ने फ़्रॉक पहना था। एक साथ दोनों अपनी चूचियों को मेरी बांह और छाती से रगड़ती हुई मेरे गालों और होंठों को चूमने लगी। मैंने अपना दोनों हाथ एक साथ फ़्रॉक के नीचे घुसाये, और मैं मुस्कुराया। किसी ने पैंटी नहीं पहनी थी। दोनों की चूत को मसलते हुए मैंने कहा, “रंडिओं, घर की सब से बड़ी रंडी अभी किचन में ही है। मैं जल्दी से उसे बेडरूम में भेज कर दोनों की क्रीज़ में रात भर अपने इस बल्ला से शॉट मारुंगा। तब तक तुम दोनों इस पेनड्राईव की विडियो को देखो। तुम्हारे लिए खास सिनेमा डलवा कर लाया हूं।”

एक बार ज़ोर से दोनों की चूत को मसल कर हाथ बाहर किया और एक साथ दोनों की चूचियों को कई बार दबाया। मैंने उन्हें पेनड्राईव दिया और हाउस कोट के पल्ले को फैलाया। किरण ने बेड से उतर कर लंड को पकड़ लिया। एक बार टिप को चूस कर बोली,

“नम्रता, तुमने जैसा कहा था उससे बहुत ही बढ़िया लंड है। अंकल जल्दी से आकर चोदो।”

नम्रता पेनड्राईव को अपने लैपटॉप में लगाने लगी। किरण की चूचियों को बढ़िया से दबा कर बाहर आ गया। अणिमा किचन में ही थी। मुझे देखते ही बोली,

“मैंने खाना लगा दिया है। अशोक इंतज़ार कर रहा है, मैं उसके पास जाती हूं। विश्वास रखो, कल रात प्रेम के साथ रहूंगी और दो-तीन दिन के अंदर तुम्हें एक बहुत बढ़िया माल मिलेगी।”

मैंने पत्नी को विश्वास दिलाया कि उसे कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा, कोई ताक-झांक नहीं करेगा, वो आराम से अशोक के साथ मस्ती मारे। मैं खाना खाने लगा और अणिमा के बारे में सोचने लगा। ऐसा नहीं कि मुझे अणिमा की एडल्टरी के बारे में पहले नहीं मालूम था। मेरे जैसा उसने भी शादी के 4-5 महीने बाद ही दूसरे के साथ चुदवाना शुरु कर दिया था।

लेकिन पहले कभी नहीं सुना कि अणिमा का किसी के साथ लंबा संबंध रहा हो। पर राघव और अणिमा के संबंध के बारे मुझे कुछ भी मालूम नहीं था। जब कि अणिमा को बढ़िया से मालूम था कि मेरा संध्या और ग्रेसी के साथ संबंध काफ़ी पुराना था। खैर, अब सब कुछ साफ़ था। एक राघव को छोड़ अणिमा दूसरे सभी मर्दों के साथ सिर्फ़ चुदाई का खेल खेलती थी।

खाना खाने के बाद मैं नम्रता के रुम में गया तो देखा कि दोनों कुतिया नम्रता और किरण नंगी होकर सिनेमा देख रही थी। मैंने यह देख कर लंबी सॉंस ली कि वे अणिमा का नहीं कुछ दूसरा ही विडियो देख रही थी। मैंने हाउसकोट उतार कर फेंका और ज़ोर से पूछा, “मेरा बल्ला शॉट मारने के लिए तैयार है, किस की क्रीज़ में बैटिंग करूं? “

लड़कियों ने पहले ही फ़ैसला कर लिया था। नम्रता, मेरी बेटी ने कहा कि दिन के जैसा पहले मैं कुतिया की चूत चाटूं, और बाद में कुतिया को चोदूं। किरण ने बिना मेरी तरफ़ देखें कहा कि लंड चूसने के साथ वो देखना चाहती है कि नम्रता मेरा लंबा और मोटा लंड कैसे संभालेगी। मतलब साफ़ था, मेरी बेटी ने अपनी सहेली को पापा के साथ की चुदाई के बारे में सब बता दिया था।

लैपटॉप पर जो सिनेमा चल रही थी, उसमें सामुहिक चुदाई चल रही थी। कोई चुदवा रही थी तो किसी की गांड में लंड घुसा था। एक औरत एक साथ तीन लंड संभाल रही थी, एक बुर में, दूसरा गांड में, और तीसरे लंड को चूस रही थी।

नम्रता ने शाम जैसा ही कुतिया का पोज लिया। मैं नीचे खड़ा होकर बेटी की चूत को चूसने-चाटने लगा। इसके बाबजूद भी नम्रता सिनेमा देखती रही। लेकिन किरण नीचे उतरी और मेरे सामने बैठ कर लंड को पकड़ कर चूसने लगी।

मैंने हंसते हुए कहा, “किरण, बहुत बढ़िया से लंड चूस रही हो, लगता है कि लंड चूसने का बहुत अनुभव हो गया है।”

लेकिन लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने पहले जैसा ही बेटी की चूत को ओरल का पूरा मज़ा दिया। 25 मिनट के ओरल के बाद बेटी ने मुझे डांटते हुए कहा, “कुत्ता, कुछ बोल नहीं रही तो चाटते ही रहोगे? बेटीचोद तुझे मालूम था कि घर में तेरी 2-2 चुदाई की भूखी कुतिया बैठी है, फिर उस रंडी, संध्या मैडम को 2 घंटा क्यों चोदा? बस ऐसे ही धक्का मारता रह, अपनी रंडी मां के यार राघव हाथी का फ़ोन आया था। उससे बात करने के बाद से तेरी पत्नी बहुत दुखी है।”

मतलब मेरे वहां से निकलने के बाद राघव ने अणिमा को फ़ोन किया होगा। सारी बात बताई होगी। चुदाई करते हुए चूतड़ों पर लगातार चांटा मारता रहा लेकिन बेटी ने एक बार भी मना नहीं किया। बेटी की एक ही दिन में तीसरी बार चोदते हुए बोला, “एक तो मैंने संध्या को राघव के सामने ही चोदा। दूसरा मैंने उस बेटीचोद से क़सम ली कि अब वो अपनी बहु संध्या को हाथ भी नहीं लगायेगा।”

किरण हमारी, बाप-बेटी की चूदाई देखती हुई सब सुन रही थी। उसने कमेंट किया, “खुद तो अपनी बेटी को चोद रहे हो और दूसरे को बहु को चोदने से मना कर रहे हो? जब से घर में भाभी आई है मेरे पापा ने अपनी पत्नी को चोदना छोड़ दिया है। भैया ट्रेनिंग के लिए विदेश गये हैं और भाभी अपने ससुर से चुदवा रही है।”

बेटी को चोदते हुए किरण की चूचियों को चूस कर कहा, “बहुत ही मस्त चूची है तेरी। तेरी भाभी की तरह अगर संध्या को भी ससुर से चुदवाने में मज़ा आता, तो मैं कभी नहीं मना करता। संध्या को ससुर की चुदाई में ख़ुशी नहीं आती है, डर से चुदवाती है।”

किरण मेरी बात को समझ गई। उसने अपने चूचियों पर से मेरा हाथ हटाया और चूत पर दबाया। उसकी चूत गीली हो गई थी। उधर सिनेमा भी ख़त्म हो गया। बेटी ने लैपटॉप को बंद कर कहा कि, “तेरे घर से जाने के बाद बबली ( प्रेम की बेटी ) का फ़ोन आया था। कुतिया ने कहा कि कल सुबह तुम्हें वहां भेज दूं।

साली खुद तो चुदवायेगी ही, उसकी मां शीला आंटी और बुआ सुधा भी चुदवायेगी। मैंने कह दिया है कि तुम्हारी एक बहुत ज़रूरी मीटिंग है। तुम हम दोनों के साथ 11 बजे के बाद से शाम तक संगम होटल में रहोगे। एक बढ़िया रुम बुक कर लेना। एक ही दिन में चूत ढीला कर दोगे क्या? बहुत शॉट मार लिया तुमने, अब जल्दी से लंड बाहर निकाल कर मुझे चुसवाओ।”

खुब तेज़ी से 8-10 धक्का मार कर मैंने लंड बाहर खींचा। फचाक की आह से लंड बाहर निकला और बग़ल में बैठी लड़की किरण ने लंड को पकड़ लिया। नम्रता या मैं कुछ बोलता किरण ने लंड को जड़ से पकड़ा और चाटने लगी। सुबह नम्रता की हरकतों को देख कर मैंने सोचा था कि साली पहले से चुदवा रही थी, लेकिन मैं ग़लत था। इसलिए किरण के बारे में कुछ नहीं सोचा। किरण की दोनों चूचियों को सहलाते और दबाते हुए देखता रहा कि लड़की कैसे चाट रही थी।

नम्रता की कुछ देर पहले बोली हुई बात याद आ गई। उसने पूछा, “नरेन, संध्या को तुम चोदते हो, वो बेटीचोद हाथी चोदता है, फिर विमल भैया क्या करता है? अपने बाप से गांड मरवाता है क्या?”

मैंने एक हाथ बढ़ा कर बेटी की चूचियों को सहलाया। मैंने जवाब दिया, “मैं सच बहुत ही क़िस्मत वाला हूं कि तुम दोनों जैसी मस्त प्यारी कुतिया मुझ जैसे बुड्ढे कुत्ते को मिली हो। मैं जब कॉलेज में पढ़ता था तभी अपने ही घर में उसकी सील भी वैसे ही तोड़ी जैसे आज तुम्हारी तोड़ी।

तीसरी बार चुदवाने के बाद बहुत गाली देकर गई कि मेरे जैसे निर्दयी आदमी के पास दोबारा कभी नहीं आयेगी। लेकिन अगले ही दिन कॉलेज जाने के बदले मेरे पास आ गई। मुझे भी कॉलेज नहीं जाने दिया। दिन भर मुझसे चुदवाती रही। कॉलेज की छुट्टी के समय घर गई। वो तो घर चली गई, लेकिन तुम्हारी दादी और बुआ रश्मि ने मुझे रात भर लूटा। उन दोनों ने दिन में मेरी और संध्या की चुदाई देखी थी।

रश्मि भी तुम्हारी तरह कुंवारी ही थी। ऐसा एक साल से ज़्यादा चला। रश्मि की शादी हो गई तो मैं भी संध्या से शादी करने की ज़िद करने लगा। संध्या के घर वाले बहुत अमीर थे। संध्या भी बहुत रोई लेकिन उन्होंने हमारी शादी नहीं होने दी। एक महीने के अंदर उसकी शादी विमल से हो गई। जिस रात संध्या की शादी हो रही थी घर की मेरी दोनों रंडी ने मेरी छोटी बहन कांता को अपने सामने मुझसे चुदवाया।

नम्रता: कांता बुआ तो बहुत ही सुंदर है।

मैं दोनों की चूचियों का मज़ा लेता हुआ बोलता रहा, “सुंदर है, लेकिन तुम दोनों कुतिया से कम। तीनों हरामजादी मुझे इतना परेशान करने लगी कि मैं होस्टल में रहने लगा। प्रेम भी होस्टल आ गया। कांता की शादी हो गई। अगली छुट्टी में हम घर गये और कांता ने अपने सामने तीन दिनों में प्रेम की मां और उसकी दोनों बहनों को मुझसे चुदवाया। कुछ महीनें बाद मैं और प्रेम एक दूसरे के घर की सभी औरतों को मिल कर चोदने लगे।”

नम्रता ने फिर टोका,

“लेकिन प्रेम अंकल देखने में बेकार हैं।” मैंने बेटी की चूत को मसला और जबाब दिया, “अपनी रश्मि और कांता बुआ से पुछना, 25 साल हो गया है, जब भी दोनों रंडी आती है तो प्रेम से जरुर चुदवाती है। तू भी एक बार उससे चुदवा ले, तुझे भी बहुत पसंद आयेगा। मर्दों की ख़ूबसूरती उनके चेहरे या बदन में नहीं होती है उनके लंड और चुदाई करने के तरीक़े में होती है।”

मैंने अपनी बेटी के दिमाग़ में दूसरे से चुदवाने की बात डाली और कुतिया तैयार भी हो गई। उसने कहा, “एक कुत्ता दूसरे कुत्ते के चुदाई की तारीफ़ कर रहा है, तो भी जरुर बढ़िया होगा। ज़रूरत होगी तो तुम्हारे दोस्त से भी चुदवा लूंगी। पहले बताओ की वो कुतिया संध्या वापस तुम्हारे पास कैसे आई?”

किरण आधा से ज़्यादा लंबाई को मुंह में लेकर लंड को प्यार से चूस रही थी।

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