ऑफिस में माया की सामूहिक चुदाई – पार्ट २

दोस्तों, मेरा नाम अमित शर्मा है ओर मैं जयपुर राजस्थान का रहने वाला हू. मेरी उम्र ३१ साल है ओर मैं एक मल्टिनॅशनल मैं अच्छे पद पर हू. ये मेरी अंतर्वनसा पर पहली कहानी हैं ओर पूरी तरह काल्पनिक हैं. अगर कुछ भूल हुई हो तो माफ़ कीजिएगा ओर अपने विचार भेजना ना भूलिएगा.

कुछ देर बाद अंकित अपनी चाबी से दरवाजा खोल के घर में घुसा. उसे बैडरूम में से कुछ जानी पहचानी आवाज आने लगी और वो बैडरूम की तरफ बढ़ चला. जैसे जैसे अंकित बैडरूम के पास जाने लगा, उसका शक यकीन में बदल गया. उसे पता था क माया कभी कभार ही पोर्न देखती हे. बैडरूम के बाहर पोहोच के अंकित ने अपने कपडे उतर दिया. अब वो पूरी तरह नंगा था और उसका लैंड पुरे शबाब पे था. अंकित ने धीरे से दरवाजा खोला और उसकी आखे बड़ी हो गई.

सामने टीवी पर उसकी पसंदीदा पोर्न चल रही थी जिसमे Jenna Jameson को २ हब्शी चोद रहे थे. और बिस्तर पे उसकी सेक्सी बीवी अपनी टांगी फैलाए चुत में ऊँगली डाल के अपनी गांड हिला रही थी. अंकित बिना कुछ बोले अंदर चला गया. माया की आखें बंद थी और चुत में से इतना पानी निकल रहा था के चद्दर पे निशान बन गया था. पुरे कमरे में जानी पहचानी खुशबू फैली हुई थी. अंकित ने एक लम्बी सांस ली और माया की चुत पे अपनी जीभ टिका दी. माया ने चौक के अपनी आखें खोली लेकिन अगले ही पल वापस बंद कर ली.

अब अंकित माया के दाने को जीभ से चाट रहा था और साथ ही साथ चूस भी रहा था. माया ने अंकित के बाल कास के पकड़ रखे थे. अंकित ने माया की मैक्सी के अंदर से हाथ डालते हुए माया के दोनों चुच्चे पकड़ लिए. इस दोहरे हमले को माया सह नहीं पाई और चिल्ला चिल्ला के झड़ने लगी “अंकितपपपप आआअह्ह्ह और जोर से चाटो. और चाटो मेरे राजा. खा जाओ मेरी चुत को. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्सस्स्सस्स्स्सस्स्सस्स्स्सस्स्सस्स्स्स “.

अब अंकित माया की गांड से लेकिन चुत तक धीरे धीरे अपनी जीभ चलने लगा. जैसे ही तूफ़ान शांत हुआ माया ने अंकित को बिस्तर पे लेटा दिया और उसका पूरा का पूरा लंड मुँह में भर के कस कस के चूसने लगी. अंकित की आखें बंद हो चुकी थी और वो जन्नत में था. माया को पता था अंकित को क्या चाहिए. माया ने अंकित का लोडा अपने मुँह से बाहर निकला और अंकित के टट्टों को अपने मुँह में भर लिया.

कुछ देर उन्हें चूसने के बाद अब माया अंकित के लंड को चाटने लगी. माया अब टट्टों से लेकर सुपरे तक अंकित का लंड चाट रही थी और टट्टों को अपने कोमल हाथो से दबा भी रही थी. अंकित बिस्तर पे पड़ा हुआ बस आहे भर रहा था. माया ने फिर से अंकित का पूरा लंड निगल लिया. माया की इस जोरदार चुसाई से अंकित की हालत ख़राब थी. उसने अपने हाथ आगे बढ़ा के माया के बोबे अपने हाथो में भर लिए और निचोड़ने लगा और बीच बीच में माया के निप्पल भी खीच देता. इससे माया का मज़ा और भी बढ़ गया और उसने एक ऊँगली अंकित की गांड में घुसा दी.

अंकित के लिए ये पहली बार था और इसलिए उसे थोड़ा दर्द तो हुआ, लेकिन माया की चुसाई की वजह से उसे मज़ा आने लगा. माया अंकित की गांड अपनी ऊँगली से चोदने लगी और अंकित ज्यादा देर टिक ना सका. अंकित ने अपना सारा माल माया के मुँह में ही निकल दिया और माया ने एक बून्द भी बाहर नहीं निकलने दी. अंकित ना जाने कितनी देर तक झाड़ता रहा. कुछ देर बाद जब माया सारा रास पि चुकी थी, वो उठी और अंकित के ऊपर आ गई.

“क्या बात है जान, आज जैसे तो तुमने कभी लोडा नहीं चूसा.”अंकित माया को चूमते हुए बोला. “तुम्हे कोई शिकायत हे क्या” माया ने इठलाते हुए जवाब दिया. “शिकायत तो तब भी नहीं की जब तुमने मेरी गांड में ऊँगली डाल दी. आज मुझे भी अपनी गांड मार लेने दो.” अंकित माया की गांड दबाते हुए बोला. “तुम्हे पता है ना अंकित मुझे ये अच्छा नहीं लगता. चलो अब मूड मत ख़राब करो और जल्दी से मुझे चोदो. बोहोत परेशान कर रखा है इस निगोड़ी चुत ने” कहते हुए माया ने अंकित का लंड अपनी चुत पे सेट किया और धीरे धीरे नीचे होने लगी. माया की चुत पहले से ही गीली थी और अंकित का लंड चुत में समता गया. जब लंड जड़ तक समां गया, माया ने अपनी गांड हिलना चालू किया. अपने चुच्चे दबाते हुए माया अपनी गांड हिला रही थी. ये देख के अंकित का जोश दुगना हो गया और अंकित नीचे से धक्के लगाने लगा.

फच्च फच्च फच्च की आवाज कमरे में गूंजने लगी. माया की चुत में अंकित का लंड सटा सट्ट अंदर बाहर हो रहा था. माया ने अपने दोनों हाथ अंकित के सीने पे रख रखे थे और अंकित के लंड पे उछल रही थी. अंकित ने एक हाथ से माया का दाना रगड़ना शुरू किया और दूसरे से एक निप्पल खीचना मरोड़ना चालू कर दिया. अंकित जानता था माया की वासना कैसे बढ़ानी है. माया के उछलते हुए मम्मो को देख के अंकित और उत्तेजित हो रहा था और माया के चुत की गर्मी अंकित की हवस को और भड़का रही थी. अंकित ऊपर की और उठा और माया का चुच्चा अपने मुँह में भर के चूसने लगा.

अंकित के बैठने से उसके पेट का सबसे निचला हिस्सा माया के दाने को रगड़ने लगा और माया अपनी गांड और जोर से हिलने लगी. उसको लग रहा था के अंकित उसके मम्मे को खा ही जाएगा. अब अंकित और माया दोनों ही कभी भी झड़ सकते थे लेकिन अंकित इस खेल को और खेलना चाहता था. उसे पता था माया भी यही चाहती है. अंकित अपने घुटनो के बल उठा और बिना अपना लंड बाहर निकले माया को बिस्तर पे पटक दिया. इसी आसान में अंकित ने १०-१२ घस्से लगाए और फिर अपना लंड बाहर निकल लिया. माया को अचानक अपनी चुत खली खली लगने लगी.

इससे पहले वो कुछ समझ पाती अंकित ने माया को घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लंड एक झटके में उसकी चुत में उतर दिया. माया के तन बदन में आग लग गई और उसके मुँह से एक मादक सीत्कार निकल गई. “आअह्ह्ह और चोदो अंकित. चोद दो अपनी इस चुत को. जोर से डालो. आआह्ह्ह ओह्ह्ह्हह मेरे राजा. मर गईईईईईईईईईई. चोद डालो जानूनूनूनूनूनू”. अंकित को अब माया की गांड दिख रही थी और माया की गांड मारे की तड़प बढ़ती जा रही थी. माया को चोदते चोदते अंकित से माया की गांड सहलाना चालू किया. माया की गांड का पिंक छेद अंकित को पागल बना रहा था.

अंकित से रहा ना गया और उसने अपनी एक उंगली माया की गांड में डालनी चालू की. माया को पता था अंकित क्या चाहता है. शादी के बाद से उसने अंकित को रोक रखा था लेकिन आज जो भी कुछ हुआ ऑफिस में, उसके बाद माया बोहोत उत्तेजित भी थी और उसके मन में अंकित को धोका देने की ग्लानि भी थी. इसलिए उसने अंकित को नहीं रोका और अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलने लगी. जब अंकित को समझ आया माया क्या कर रही है, वो और उत्तेजित हो गया और माया की चुत को बेरहमी से अपने लंड से और गांड को अपनी उंगली से चोदने लगा. कुछ ही पालो में दोनों झड़ने लगे.

आज अंकित और माया को उनकी सुहागरात याद आ गई थी जब दोनों ने पूरी रात चुदाई की थी. अंकित हफ्ता हुआ माया की पीठ पे गिर गया और माया उसका वजन संभल नहीं पाई. और वो भी बिस्तर पे गिर गई. “आज तुमने मुझे वो आंनद दिया हैं जान, जो मैं तुम्हे बता भी नहीं सकता” अंकित भावुक होते हुए बोला. “कल का इंतज़ार करो मेरे चोदू राजा. कल मैं तुम्हारा बरसो पूरा सपना पूरा करुँगी. कल तुम इस गांड का उद्घाटन कर के मुझे पूरी तरह अपना बना लेना.” माया अंकित को अपनी बहो में लेते हुए बोली. दोनों एक दूसरे की आगोश में सो गए.

आज माया ने बोहोत ही सिंपल साडी पहनी थी. हलाकि वो जानती थी इससे ज्यादा फरक नहीं पड़ने वाला, लेकिन वो आग में घी नहीं डालना चाहती थी. माया ने अपनी गाडी पार्किंग में लगाई और तेज़ कदमो से अपने केबिन की तरफ बढ़ चली. वो ऑफिस आज जल्दी आ गई थी और उस्मान, अमित या सुमित से पहले अपने केबिन पोहोच के अपनी ब्रा और पेंटी उतर देना चाहती थी. लेकिन शायद उसकी किस्मत ख़राब थी. “इतनी जल्दी क्या है मैडम?” उसे उस्मान की आवाज सुनाई दी. उसके कदम और तेज़ हो गए लेकिन उस्मान एकदम से भाग के उसके सामने आ गया. “ये तूने अच्छा नहीं किया रंडी.

अभी अमित सर को बताता हु.” कहता हुआ उस्मान चला गया. कुछ देर बार अमित और उस्मान दनदनाते हुए केबिन में घुसे. “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बात टालने की?” अमित चिलाते हुए बोला. उनके आने से पहले माया अपनी ब्रा और पेंटी उतर के अपने ड्रावर में छुपा चुकी थी. “कौनसी बात नहीं मानी मैंने तुम्हारी” माया अनजान बनते हुए बोली. “ज्यादा बन मत रंडी. आप रुकिए सर. में आपको अभी दिखता हु” कहता हुआ उस्मान माया की टेबल की तरफ बढ़ा और इससे पहले माया उसे रोक पाती, उस्मान ड्रावर खोल चूका था. “ये देखीये सर. कहा था ना मैंने आपसे” माया की पेंटी सूंघते हुए उस्मान बोला. अमित का चेहरा गुस्से से लाल हो गया.

“इसकी सजा तो देनी ही पड़ेगी इस कुतिया को” अमित गुस्से से तमतमाता हुआ बोला. माया की आखो से आंसू निकल रहे थे लेकिन उसे अमित और उस्मान से दया की कोई उम्मीद नहीं थी. “चल रांड, कड़ी हो और यहाँ आ” अमित चिल्लाया. माया उठी और अमित के सामने जाके खड़ी हो गई. अमित ने माया को उल्टा घुमाया और उसके सर पे हाथ रख के नीचे की तरफ धक्का लगाया. इससे माया का सर टेबल पे टिक गया. माया कोशिश कर रही थी लेकिन अमित के आगे उसकी एक ना चली.

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