विधवा पड़ोसन की काम अगन

दोस्तो, मेरे नाम अभय है, मैं जयपुर (बदला हुआ शहर) का रहने वाला हूँ. मेरी उम 27 वर्ष और हाइट 6 फिट है. मैं दिखने में स्मार्ट हूँ और पुलिस में हूँ.
बात तब की है जब शादी के बाद मेरी पोस्टिंग दूसरे शहर में हो गयी. जिस वजह से मैं अपनी नवविवाहिता पत्नी को अपने घर छोड़ कर उस शहर में चला गया.
पहले दिन शहर मेरे लिए नया था. तो मैंने अपने ऑफिस में रह कर सबसे परिचय किया. फिर शाम को मैंने अपने साथी विरेन्द्र को बोला कि मुझे यहाँ आस पास रहने के लिए घर चाहिए. तो उसने मुझे पास की कॉलोनी में घर दिलवा दिया.

घर तो बड़ा था. परंतु उस दिन में सोने के लिए वहाँ कुछ नहीं होने की वजह से मैं शाम की बस से घर वापस निकल गया. फिर दूसरे दिन मैं और मेरी नयी दुल्हन हम दोनों अपना सारा सामान ले कर अपने शहर निकल गये. मैंने उसे हमारा नया घर दिखाया जिसे देख कर वो बहुत ही खुश हुई और उसने मुझे गले लगा लिया. फिर हमने घर का समान सेट किया. शाम को हमने साथ में खाना खाया और रात भर मज़े ले कर सो गये.

अगले दिन में भी अपनी ड्यूटी पर चला गया.

शाम को जब मैं घर आया तो मैंने एक अनजान खूबसूरत भाभी को अपने घर में देखा. इससे पहले कि मैं उनसे कुछ कहता, इतने में मेरी बीवी खुशबू आ गयी. उसने मुझे उनसे मिलवाया और कहा- ये मेरे पति अभय है और ये कविता भाभी हैं.

बाद में मेरी बीवी खुशबू ने मुझे बताया कि कविता की उम्र 29 वर्ष होगी. उनके पति अब इस दुनिया में नहीं हैं और वो हमारे पड़ोस में अकेली रहती हैं.
धीरे धीरे कविता भाभी रोज हमारे घर आने जाने लगी, हम अच्छे से घुल मिल गये थे.

फिर एक दिन प्रेगनेंट होने की वजह से खुश्बू को काम करने में तकलीफ़ होने से मैं उसको उसके मायके में छोड़ आया.
एक दिन मैं घर पर अकेले डीवीडी लगा कर पॉर्न देख रहा था कि अचानक दरवाजे की घंटी बजी. तो मैंने दरवाजा खोला तो कविता भाभी थी. उन्होंने खुशबू के लिए पूछा तो मैंने कहा- वो अपने मायके गयी है. और मज़ाक में यह भी कह दिया कि वो अब हमारी बेबी को लेकर ही वापस आएगी.

फिर मैंने उनको अंदर आने को कहा, वो आकर सोफे पर बैठ गयी और हम बात करने लगे.
मैंने आज तक उनको वासना भरी नज़र से नहीं देखा था लेकिन उस दिन पहली बार मेरी नज़र उनके बदन पर गयी. क्या शरीर था … 5 फिट 2 या 3 इंच की हाइट, दूध सा गोरा बदन, बड़े बड़े बूब्स … मैं चुपके चुपके उनके बदन को देख रहा था.

फिर हम बात करने लगे, उत्तेजना के वशीभूत हो मैंने पूछा- कविता भाभी, आप अकेले कैसे रह लेती हो? मुझसे तो नहीं रहा जाता.
तो उन्होंने कहा- क्या करूँ, अब आदत सी हो गयी है.
शायद उनको पता चल गया था कि मैं उनके बदन को देख रहा हूँ. परंतु उनके मन में भी कुछ और था.

मैं बोला- भाभी, आप टीवी ऑन कर लो, मैं कॉफ़ी लेकर आता हूँ.
मैं भूल गया था कि टीवी में डीवीडी ऑन होने की वजह से पॉर्न चल जाएगी.

मैं जब कॉफ़ी ले कर वापस आया तो मैं भी देख कर दंग रह गया कि भाभी पॉर्न देख कर एंजाय कर रही थी और अपने बदन को सहला रही थी. उन्होंने मेरे हाथ से कॉफ़ी लेकर टेबल पर रख दी और मेरा हाथ पकड़ कर अपने पास बैठाया और कहा- अभय, तुम मुझे वो सुख दोगे जो मैं चाहती हूँ.
मैंने कुछ न बोला.
उन्होंने कहा- मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी और तुम जो कहोगे वो करूँगी.
तो मैंने भी उनको आसानी से हां कह दिया.

मैंने उनको उठाया और कमरे में ले गया वहाँ जाते ही उन्होंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे कपड़े उतार कर चूमने लगी. वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी और मैं अंडरवीयर में था. फिर मैंने उनको बेड पर लिटाया और उन्हें चूमने लगा. उनके बदन के स्पर्श से मेरे अंदर बिजली सी दौड़ गयी और मेरा लंड जो 3 इंच मोटा है पूरा कड़क हो गया और अंडरवीयर से बाहर से दिखाई देने लगा. भाभी ने देखते ही मेरी अंडरवीयर उतार दी और मेरा लंड देख कर खुश हो गयी और चूमने लगी.

फिर मैंने भाभी की ब्रा के हुक खोल कर उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया. भाभी के स्तन एकदम कड़क हो गये थे और उनकी भूरे रंग की निप्पल भी कड़क हो गयी थी. मैं उनको हाथ में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूमने लगा और दाँत लगाने लगा और वो ज़ोर ज़ोर से ‘आहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उऊँ आहह उईए …’ की आवाजें निकालने लगी और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी पेंटी में डाल दिया, मेरे स्पर्श से उनकी आवाजें और बढ़ गयी और कहने लगी- दूर कर दो इसको मेरे बदन से!

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