मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई

फिर सर ने लंड चूसने को कहा और मैं लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। मैं सिर को ऊपर नीचे करके सर का लंड चूसने लगी।
सर ने कहा- एक बार में पूरा लंड चूसो!
तो मैंने कहा- सर, इतना ही मुंह में आता है।
सर ने कहा- आगे गले में भी जाएगा!
तो मैंने कहा- ऐसे तो मेरी सांस रुक जाएगी।
सर ने कहा- जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। एक लंबी सांस लो, फिर मुंह में लंड लो, फिर जब मुंह के आखिर तक पहुंच गया तो धीरे धीरे गले में उतार लेना।

मैंने वैसे ही किया, जब सर का लंड मेरे गले में घुस रहा था तो ऐसे लग रहा था जैसे मेरा गला खुलता जा रहा है। एक बार के बाद मैं मना करना चाहती थी लेकिन परीक्षा में नंबर चाहिए थे तो करती रही।
पहले तीन चार बार तो मुश्किल लगा लेकिन उसके बाद सर का लंड आसानी से गले में अंदर बाहर होने लगा, मैं तेजी से चूसने लगी।

सर ने कहा- लगता है, अब तुझे मजा आ रहा है!
मैंने कहा- जी सर, पहले तीन चार बार तो मुश्किल हुई, अब अच्छा लग रहा है।
सर ने मुझे घुटनों के बल नीचे बैठा दिया और खुद मेरे सामने खड़े हो गए।

सर का लंड मेरे होंठों को छू रहा था, मैंने मुंह खोलकर लंड मुंह में भर लिया और फिर चूसने लगी।
कुछ देर बाद सर ने रुकने को कहा और बोले शिल्पा- अब मैं तेरा मुंह चोदूंगा, जैसे ही लंड गले से बाहर आए जल्दी से सांस ले लेना!
मैंने कहा- जी सर।

सर ने मुझे सिर से पकड़ लिया और मेरे मुंह में तेजी से शॉट लगाने लगे। सर अपनी कमर आगे पीछे करके मेरा मुंह चोद रहे थे और कमरे में गप्प गप की आवाज़ गूंज रही थी। सर का लंड मेरे थूक से पूरी तरह लथपथ हो गया था जो मेरे होंठों से नीचे टपक रहा था।

कुछ देर बाद सर की शॉट मारने की रफ्तार तेज़ हो गई, सर बोले- मैं झड़ने वाला हूं मेरी रानी, तुम मेरा सारा वीर्य पी जाना।
थोड़ी देर बाद सर का शरीर अकड़ने लगा और मेरे मुंह में गर्म गर्म गाढा़ सा नमकीन तरल पदार्थ की एक के बाद एक कई पिचकारी गिरी, कुछ तो मैं पी गई, कुछ मेरे होंठों से टपकने लगा।
सर के लंड से भी वीर्य की कुछ बूंदे टपक रही थीं, मैंने उन बूंदों को हाथ से लगा लिया ये सफेद रंग का चिपचिपा गाढा़ तरल था।

मैंने पहली बार वीर्य का स्वाद देखा था और मुझे बहुत अच्छा लगा। जो वीर्य मेरे होंठों से टपक कर मेरी गालों पर फैल गया था, वो मैंने हाथ से साफ किया और जीभ से चाट लिया।

सर ने कहा- मजा आ गया शिल्पा, तुम तो बहुत मस्त हो।
मैंने कहा- आपका तो हो गया सर… पर मेरे नीचे बुर में आग लग गई है, उसका क्या होगा।
सर ने टाईम देखा तो अभी आंटी के आने में 15 मिनट रहते थे, सर ने कहा- इसका भी इलाज़ अभी कर देता हूं, तुम जींस उतार कर टेबल पर बैठ जाओ।

जब तक मैं जींस और पैंटी निकाल कर टेबल पर बैठी तब तक सर ने वो वीर्य जो मेरे होंठों से टपक कर नीचे गिर गया था, उसको कपड़े से साफ कर दिया। वैसे वो वीर्य मेरे बूब्ज़ पर गिरना था पर टॉप खराब हो जाता तो पीछे हो गई थी।
सर ने मेरी टांगें फैला लीं और मेरी चिकनी जांघों को सहलाने लगे, सर ने कहा- शिल्पा, तेरी जांघें भी तेरी तरह मस्त हैं।
मैंने सर को एक सेक्सी मुस्कान से जवाब दिया।

सर ने जब मेरी शेव की हुई बुर देखी तो खुश हो गए और बोले- मुझे बिना बाल की बुर अच्छी लगती है। मैं तुझे कहने ही वाला था कि अगर बुर पर बाल हैं तो कल साफ करके आना लेकिन तुम तो पहले ही साफ किए हुए हो।
मैंने कहा- सर, मैं साफ ही रखती हूं, हर तीसरे दिन बुर के बाल साफ कर देती हूं और हफ्ते बाद पूरे बदन से अनचाहे बाल साफ कर देती हूं। कल को पूरे बदन की सफाई करनी थी लेकिन आज रात को कर लूंगी, तभी कल टाईम पर आ पाऊंगी।

सर खुश हो गए और उन्होंने अपने होंठ मेरी बुर पर लगा दिए। पहली बार किसी ने मेरी बुर को छुआ था वो भी एक मर्द ने और मेरे पूरे बदन में खलबली सी मच गई। अचानक से मेरे बूब्ज़ के निप्पल सख्त हो गए।
तभी सर जीभ से मेरी बुर चाटने लगे और फिर जीभ बुर में घुसा कर चाटने लगे। मेरी कमर अपने आप चलने लगी, मैं गांड आगे पीछे करके बुर चुसाई का मजा लेने लगी। मेरी बुर पूरी तरह गीली हो चुकी थी.

तब सर ने अपनी एक उंगली थोडी़ सी मेरी बुर में डाल दी और उंगली हिलाने लगे और साथ में जीभ से भी चाट रहे थे।

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