मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई

परीक्षा पास आते देख पापा ने मेरी ट्यूशन उन्हीं के पास रख दी वो मुझे मैथ, साइंस और इंगलिश पढा़ते थे। उन्होंने पापा को बोला वो ट्यूशन नहीं पढा़ते लेकिन शिल्पा को पढ़ाई करवाएंगे और कोशिश करेंगे पहले दर्जे में पास हो और कोई ट्यूशन फीस नहीं।
मेरी बड़ी दीदी भी उनसे उनके घर पढ़ने जाती थी और मेरी दीदी की सील भी सर ने ही तोडी़ थी।

उनका नाम प्रेम गर्ग था लेकिन मैं उनको सर बुलाती थी। तब उनकी आयु 50 साल की थी। उनका रंग सांवला कद करीब 5 फीट 8 इंच है। चेसरा क्लीन शेव है और सिर के बालों पर काला रंग लगाते हैं। उनकी आंखें काली हैं और नज़र का चश्मा लगा हुआ है। उनके एक बेटा और बेटी हैं दोनों शादीशुदा हैं। बेटी ससुराल में रहती है बेटा दूसरे शहर में नौकरी करता है तो अपनी पत्नी के साथ वहीं रहता है।
प्रेम सर की पत्नी 40 किमी दूर एक बैंक में नौकरी करती थी जो शाम को करीब 6 बजे घर आती थी।

दोपहर को 2 बजे स्कूल में छुट्टी हो जाती थी और मैं बैग घर में रखकर खाना खा कर 2:30 बजे सर के घर पहुंच जाती थी, तब सर घर में अकेले ही होते थे। मैं स्कूल की यूनीफॉर्म बदल कर जींस टॉप या जींस शर्ट पहन कर आती थी जो कि टाईट होते थे। उन कपड़ों में मेरे बदन का एक एक उभार अच्छे से दिखाई देता था।

सर मुझे सब सबजैक्ट एक एक घंटा पढा़ते थे। मुझे पढा़ते टाईम उनकी नजर मेरे बूब्ज़ पर होती थी। वो पढ़ाई कम करवाते और अपनी ठर्क ज्यादा पूरी करते थे। जब उनकी पत्नी घर आ जाती तब छुट्टी करते थे।
अब परीक्षा में 15 दिन बाकी थे और मुझे डर लग रहा था। हमें स्कूल से फ्री कर दिया ताकि घर में अच्छे से पढ़ाई कर सकें।

मैं सर के पास पढ़ाई के लिए गई और मैंने कहा- सर परीक्षा पास आ रही है और मुझे डर लग रहा है कि अगर अच्छे नंबर नहीं आए तो अच्छे कॉलेज़ में दाखिला नहीं मिलेगा।
सर ने मेरी पीठ सहलाते हुए कहा- डर मत शिल्पा, मैं हूं न, तेरे कम से कम 80% नंबर आएंगे।
मैंने कहा- पर कैसे सर, आप जानते ही हो मैं इतनी होशियार नहीं हूं, 50% नंबर लेना भी मुश्किल लग रहा है।

सर हंस पडे़ और कहा- जितना आता हो उतना लिख देना, बाकी हमारे पास एक घंटा होता है और सुपरअटेंडेंट और सुपरवाईज़र सब मेरी पहचान के हैं, परीक्षा के बाद मैं करवा दिया करू़गा। मैं जो बोलता जाऊंगा तुम लिखती जाना।
मैंने कहा- थैंक्स सर, आप मेरे लिए इतना कुछ कर रहे हो, यह एहसान में कभी नहीं चुका पाऊंगी।
सर ने कहा- ये कोई एहसान नहीं है इसके बदले मुझे भी कुछ चाहिए।
मैंने कहा- आप बोलो, मैं पापा से बोल कर आपको वो दिलवा दू़ंगी।

सर ने कहा- वो तुम्हारे पापा नहीं तुम दे सकती हो।
मैंने कहा- मैं क्या दे सकती हूं?
सर ने कहा- मुझे खुश करना होगा!
मैंने कहा- कैसे सर?
लेकिन मैं समझ चुकी थी कि वो चुदाई चाहते हैं।

सर ने कहा- मुझे तेरे तीनों छेदों में लंड डालकर तुझे चोदना है. जब भी तुझे देखता हूं तो लंड खड़ा हो जाता है।
तभी सर ने अपनी पैंट से लंड बाहर निकाल लिया और कहा- देखो शिल्पा, कैसे खड़ा है।
मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था और मैं गौर से देखने लगी, सर का लंड काफी मोटा, लंबा और जानदार था।

सर ने अपने लंड की चमड़ी पीछे खींच ली और बीच से लाल रंग का टोपा निकल आया।
सर ने कहा- अभी मेरी पत्नी आने वाली होगी, टाईम कम है। कल को सुबह नौं बजे मेरे घर आ जाना और घर बोल कर आना स्कूल में 3 बजे तक पढ़ाई होगी और फिर सर के पास पढ़ने जाना है. 6 बजे घर आऊंगी।
मैंने कहा- आपका लंड तो बहुत मोटा और लंबा है जबकि मेरी बुर और गांड के छेद बहुत छोटे हैं।

मुझे अच्छी तरह पता था कि सर का लंड मेरी बुर और गांड का छेद खोलकर घुस जाएगा, फिर भी मैंने कहा- आपका लंड घुस ही नहीं पाएगा।
सर ने कहा- वो मुझ पर छोड़ दो, वो मैं देख लूंगा, तुम बस कल 9 बजे सुबह आ जाना।
मैंने कहा- ठीक है सर, अभी आधा घंटा बाकी है तो पढ़ाई करें?
लेकिन मेरी नजर सर के लंड पर ही रुकी हुई थी।

सर ने किताब बंद करके कहा- बहुत हो गई पढ़ाई, तुम एक बार हाथ में मेरा लंड पकड़ कर हिलाओ।
मैं भी बेशर्म हो गई क्योंकि मैं खुद भी चुदना चाहती थी लेकिन अपनी उम्र से इतने बड़े मर्द से पहली चुदाई होगी ये पता नहीं था।

मैं सर का लंड हिलाने लगी सर ने कहा- तेजी से हिलाओ।
मैं तेजी से लंड हिलाने लगी।

सर मेरे टॉप के ऊपर से मेरे बूब्ज़ दबाने लगे और बोले- शिल्पा, तेरे बूब्ज़ तो बहुत बड़े और टाईट हैं।
फिर सर ने कहा- टोपे को जीभ से चाटो.
मैं सर के लंड पर जीभ घुमा कर चाटने लगी और मुझे अच्छा लग रहा था। मैं टोपे को अच्छी तरह चाट रही थी।
सर ने कहा- क्या बात है… तुम तो बहुत अच्छा चाटती हो।

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