टीचर की लेस्बियन सहेलियों की चुदाई

जब मैं वापिस आने लगा तो उन्होंने मुझे थैंक्स बोला और कुछ पैसे दिए. मैंने मना किया तो वो बोलीं- सुरक्षा समझ के ले ले और हमारी गोपनीयता को बनाए रखने में सहयोग कर!
मैंने पैसे लिए और वापिस आ गया।

फिर मैंने चाची से थोड़ी देर बात की और अपने काम में व्यस्त हो गया.

तभी मोटी का रात में मुझे फोन आया, वो बोली कि वो अपने घर में अकेली है और उसे अकेले में डर लगता है तो अगर मैं फ्री होऊं तो क्या आज रात मैं उनके साथ सोऊँ?
मैंने हाँ बोला और उसके घर पहुंचा.

उसने डिनर बना के रखा था, हम दोनों ने खाया. तभी उन्होंने सेक्स की एक पारी धूमधाम से खेलने की बात कही.
तो मैंने कहा- एक दिन में एक ही कहा था मैंने!
तो वो बोलीं- कम से कम कप्तान को तो इतनी रियायत होनी चाहिए!
तो मैं बोला- ठीक है… लेकिन ये पहली और आखिरी बार होना चाहिए!

और मैंने सुकून के साथ उसके और अपने कपड़े उतारे और हमने एक दूसरे को चूमना चाटना शुरू किया. जब पूरा फोरप्ले खत्म हुआ तो चुदाई आरम्भ हुई मैंने उसे पूर्ण श्रद्धा के साथ चोदने की कोशिश की और हार्डसेक्स किया उसके झड़ने के बाद भी… वो चिल्लाती रही और मैं पेलता रहा जब तक कि उनकी योनि मेरे वीर्य से भर ना गई।

कुछ समय बाद मेरे एग्जाम्स शुरू होने थे तो मैंने इन सब पर ध्यान देना छोड़ा. लेकिन फोन की घंटी तो बजनी ही थी. एक दिन नहीं आया तो क्या हुआ, अगले दिन या उसके भी एक दिन बाद मुझे कॉल्स आने लगे और मैं सेवाएँ देता रहा।

इस कहानी का यह भाग यहीं खत्म हुआ. और अब मैं सोच रहा हूँ कि इसके साथ यह सीरिज भी यहीं रोक दूँ क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि आगे थोड़ा बहुत पचड़ा होगा और वो कहानियाँ कुछ खास भी नहीं होंगीं.
लेकिन अगर आप चाहें तो बता सकते हैं कि अगला पार्ट आना चाहिए या कहानी यहीं खत्म करूँ।

शायद यह भाग आपको बोरिंग लगा हो या पसंद ना आया हो. अगर ऐसा है और मेरे लायक कोई सुझाव मुझे मेल के जरिए भेजें.

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