टीचर की लेस्बियन सहेलियों की चुदाई

शादी वाले घर में काफी काम करना पड़ा, अंततः बारात दुल्हन मैडम और उन दोनों मोटी पतली को वापस ले गई. कुछ देर बाद चाची ने मुझे एक लिफाफा दिया और बोलीं- पता नहीं कोई दो मोटी पतली औरतें थीं, तुझे ढूंढते हुए मुझे ये दे गईं.
उस लिफाफे में एक गुलाब और कुछ पैसे और एक थैंक्यू नोट था।

जब सब ख़त्म हुआ तो मैं चाची के साथ झाँसी आया. यहाँ एक बार उनकी सेवा और करते हुए दतिया पहुंचा जहाँ मैडम ने मेरी काफी खातिरदारी की. बदले में मैंने उनके अंदाज में उनकी सेवा भी की और अंततः ग्वालियर पहुंचा।

उस दिन मैंने ग्वालियर पहुंचकर चैन की सांस ली और सोचा कि अगले महीने एग्जाम्स शुरू होंगे तो लगभग 3 महीने तक इन सबसे दूर ही रहो, तो ठीक होगा.
और किताब उठाकर पढ़ने बैठ गया.

कुछ देर बाद मुझे एक कॉल आया जो उसी मोटी का था उसने मुझे मेरे घर के पास ही एक गार्डन में बुलाया, जहाँ मैं समय पर पहुँच गया तब वो बोलीं- उनका एक ग्रुप है जिसमें कुछ औरतें शामिल हैं सिर्फ औरतें ना कि कोई आदमी, इनकी संख्या 6 है जिनमें मैडम और पतली भी आते हैं. ये सब सेक्स की प्यासी हैं, मतलब हम सब समलैंगिक हैं, जरूरत पड़ने पर कोई भी किसी के साथ चला जाता है. तो क्या तुम इस ग्रुप के इकलौते आदमी सदस्य बनोगे? फैसला तुम्हारे ऊपर है. हाँ, कुछ सोचने से पहले बाकी लोगों के बारे में हो सकता है कि तुम किसी और को भी जानते हो!
बस इतना बोलकर वो चली गई.

मैं सोचता रहा कि क्या करूँ. फिर मैंने मैडम को फोन लगाया तो उन्होंने कहा- वैसे बाकी सदस्य कुछ अच्छे घरों से ताल्लुक रखतीं है फिर भी तुम सोच लो.
तो मैंने कहा- क्या मैं इनसे मिल सकता हूँ?
तो वो बोलीं- जरूर, कल 4 बजे जहाँ वो मिली थी, वहीं पहुँच जाओ, मैं बाकियों को भेज दूंगी।

शाम को मैं वहां पहुंचा तो वहां मोटी, पतली के अलावा बाकी चार औरतें मौजूद थीं. इन चार में से दो वो थीं जिन्हें देखने मात्र के लिए हमारे कॉलेज के आधे स्टूडेंट रेगुलर कॉलेज जाते थे और जिसकी भी बात होती होगी वो कभी ना कभी हिलाता जरूर होगा इनके नाम पे!

खैर इन्होंने तो मुझे नहीं पहचाना और जो बाकी दो थीं, ये भी 30-32 साल के एटम बम ही थीं जिन्हें देखकर मेरी लार घुटनों तक टपकी और मैंने हाँ बोल दिया.
तो उन्होंने कहा- ठीक है.
फिर मुझे सबने अपने फोन नंबर दिए और अपने अपने रास्ते चलते बनी, बस शर्त यह थी कि बीच में एक कप्तान बना लो, जो भी मुझे बुलाएगी, पहले कप्तान को बताएगी और कप्तान यह निश्चित करेगी कि केवल एक कॉल एक दिन की ही मुझ तक पहुंचे और सप्ताह में एक मेंबर से एक बार ही मिलूंगा।

चूँकि मोटी एक गृहणी थी तो वो ही कप्तान बनी और अगले दिन फोन लगाकर एक अड्रेस देकर बोली- शाम 4:30 के बाद जब चाहो जा सकते हो!
मैं ठीक 5 बजे पहुँच गया.

जिन्होंने मुझे बुलाया उनका (काल्पनिक) नाम- सीमा, उम्र 39वर्ष (सबसे बड़ी), विवाहित लेकिन पति ने छोड़ (धोखा) दिया. एक स्पेशल बात ये पर्सनली मुझे बहुत पसंद है और हमारी क्लास टीचर भी यही हैं।
मैं घर में अंदर गया उन्होंने मेरा स्वागत किया कुछ थोड़ी बहुत बात हुई.

फिर उन्होंने मुझसे पूछा- सेक्स की लत कब से लगी?
तो मैं बोला- नहीं, लत तो नहीं लगी, बस कुछ लोग ऐसे मिले जिन्हें इसकी काफी जरूरत थी तो मैंने मदद की बस!
वो बोलीं- अच्छा ऐसी बात है. फिर तुम तो कभी किसी को बुलाओगे ही नहीं?
तो मैं बोला- हाँ, आप देख सकती हैं कि मेरे पास किसी का नंबर है ही नहीं!

फिर हम दोनों उनके बेडरूम में गए. उन्होंने मुझे एक कॉन्डोम दिया, मैंने पहना और उनके सारे कपड़े उतारे.

उन्हें शायद मुंह में लेना पसंद नहीं था लेकिन मुझे उनकी चाटने से किसने रोका था तो मैंने रेफ्रिजरेटर से एक आइस क्यूब निकाल कर इनकी गुलाबी योनि में डाला, जिससे ये फड़फड़ा गईं और मैं उनकी फुदकती हुई फुद्दी को बड़े प्यार से चाटने चूसने लगा.
जब तक बर्फ पूरी तरह पिघला, इनकी योनि भी उंगली करने पर पिघल गई और इसी पिघली हुई योनि में मैंने इनके द्वारा चूमने मात्र से खड़ा हुआ लिंग धीरे धीरे करके अंदर डाला.

चूँकि इन्होंने काफी समय से किसी का लिंग अपने अंदर नहीं लिया था तो इन्हें भी थोड़ा चैन पड़ा इनकी योनि रस टपकाने के साथ-साथ फुदक भी रही थी जिसे मैंने चोदना शुरू किया. मुझे ये स्थिति बहुत पसंद है जब झड़ी हुई योनि को पेलो तो!
वो पहले तो चिल्लाएंगीं जिससे मेरा जोश बढ़ेगा.

और हमेशा की तरह यही हुआ. पहले तो वो कराहीं और जब जोश आया तो उनकी योनि अंदर से टाइट और गर्म हुई और ये मेरा पूरा साथ देने लगीं. लेकिन यहाँ कुछ उल्टा हुआ. वो यह था कि जहाँ सामने वाली पहले पानी छोड़ती थी, वहाँ मैंने पहले कॉन्डोम भर दिया.
लेकिन उस हालत में भी मैं लगा रहा, थोड़ा बहुत लिंग और थोड़ा बहुत अपने हाथ मुंह से मैंने उनका भी पानी निकलवाया. कुछ देर आराम के बाद मैंने बिना उनके कहे अपना लिंग उनकी योनि में डाला और कार्यक्रम दोबारा शुरू किया लेकिन इस बार सब मजे से सही सही हो गया।

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