टीचर की लेस्बियन सहेलियों की चुदाई

नमस्कार दोस्तो, आपको मेरी कहानी के पिछले दोनों भाग
चाची की चूत में खाता खोला
मामी ने मुझे चाची की चुदाई करते देख लिया
पसंद आ होंगे।
इन भागों में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी चाची, स्कूल टीचर और मामी की चुत चुदाई करके उनको अपना दीवाना बना लिया.
पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मैडम में मुझे दो नई मेहमानों से मिलवाया, वो दोनों ही रंग में थोड़ी सांवली, 5 फ़ीट लंबी और एक थोड़ी दुबली और एक थोड़ी मोटी थी लेकिन दूर से देखने पर पता नहीं चलता था।

जैसे कि तय हुआ था, जब नीचे लोग जब अपने कामों में व्यस्त हो गए तो मैं उन दोनों को लेकर तीसरी मंजिल के चौथे कमरे में पहुंचा, वहाँ उन्होंने अपने अपने ब्लाउज खोलते वक्त शरमाते हुए पूछा- तुम्हें कैसी लड़कियाँ ज्यादा पसंद हैं?
तो मैंने कहा- मुझे ना… आपके जैसीं अपने से बड़ी या शादीशुदा लड़कियाँ ही पसंद हैं.
तब बो बोलीं- वो क्यों?
तो मैंने बोला- इसलिए कि वो थोड़ा समझदार दिखतीं हैं और होने वाली गड़बड़ को संभाल सकती हैं.

उनमें से एक बोली- बात तो तुमने पते की कही है, चलो आ जाओ!
चूंकि पकड़े जाने का खतरा था तो उन्होंने केवल आवश्यक कपड़े ही उतारे।

मैं उनके पास गया और पतली वाली को कमर से पकड़कर उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर किस करने लगा. इसके बोबे कुछ ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन मोटी वाली थोड़ी से चर्बी के साथ पूरी एक मस्त सेक्स बॉम्ब थी जिसने नीचे (मोटी वाली ने) मेरी पेंट की जिप खोली और लिंग को बाहर निकालकर मुठियाने लगी.

फिर मैंने पास में रखे गद्दों के ढेर पर मोटी वाली को लिटाया और उसकी टांगों को एक दूसरे से दूर करते हुए उसकी योनि को खोला इसकी योनि पर भरपूर बाल थे. मैंने उसकी योनि पर अपना मुंह रखा और पूरे जोश से जल्दी जल्दी चूसने लगा. ऊपर पतली वाली मोटी वाली के होंठों पर अपनी योनि को रखकर अपने पैरों को घुटनों के बल मोड़कर उसके मुंह पर मेरे कन्धों को पकड़कर बैठी थी.
कुछ समय बाद पहले मोटी और फिर पतली दोनों एक-एक से पानी छोड़ गईं तो मैंने पतली को लेटने को कहा. लेकिन वो इस तरह से लेटी कि उसकी योनि मेरी तरफ व हाथ मुंह मोटी की योनि पर हों. थोड़ी दिक्कत हुई पर कैसे भी मैंने मोटी की योनि में पतली की दो उँगलियाँ डलवा दीं, फिर मैंने अपना लिंग पकड़ा और पतली की छोटी सी चोकोलेटी गुलाबी योनि के मुंह पर रखा और एक तेज धक्के में आधा अंदर घुसा दिया.
उसके मुंह से चीख निकल गई जिसे मोटी ने उसके मुंह पर अपना एक चूचा देकर कम किया.

फिर मैंने दूसरे झटके में लिंग पूरा अंदर किया जिससे उसके आंसू निकल आए लेकिन मैंने उन पर ध्यान न देते हुए धक्के लगाना शुरू किया. उसे पहले तो तकलीफ हुई, फिर वो भी अपनी गांड उठाकर मेरा साथ देने लगी. फिर कुछ देर बाद मैं उसे कुतिया बनाकर पेलने लगा. अब वो मोटी की योनि चाट सकती थी. चूँकि मैं यह चाहता था कि जब मोटी का नंबर आए तब तक वह ताजी ताजी झड़ी हो और पतली भी यहाँ अपनी कुछ जरूरत से ज्यादा टाइट योनि के साथ मजे ले रही थी.

कुछ दस मिनट में जैसे ही पतली ने पानी छोड़ा, मैंने लिंग निकाला और मोटी को अपनी ओर खींचते हुए उसकी योनि में लंड घुसाकर पेलने लगा. उधर वो अपनी योनि को इससे साफ करवाने लगी चूँकि मोटी पतली के मुंह और उंगली से पहले ही चुदी हुई थी तो थोड़ी ही देर में उसने मेरे साथ ही पानी छोड़ दिया और हम सब एक दूसरे से अलग हुए और कपड़े पहनकर सब कुछ साफ करके वापिस नीचे आ गए.

वो दोनों काफी खुश लग रही थीं. उन्होंने मुझे अपना मोबाइल नंबर देकर कहा- अगर ग्वालियर में कभी फ्री हो तो याद जरूर करना!
और चली गईं.

फिर जब मैडम मुझे मिलीं तो पूछने लगीं- कैसा रहा?
मैं बोला- जबर्दस्त!
तो वो बोलीं- कुछ और धूम धड़ाका करना है?
तो मैंने कहा- नहीं, बहुत हो चुका!
तब वो बोलीं- पके हुए खाने को ना नहीं कहते!
तो मैं बोला- अभी पेट भरा हुआ है, कहीं अपच हो गई तो! इसलिए पहले इसे पच जाने दो।

चूँकि रात बहुत हो चुकी थी तो मैं घर जाकर सो गया. रात भर वहाँ में अकेला ही सोया. सुबह जब उठा तो वहाँ मामी और चाची दोनों थीं. तब चाची बोलीं- अबे यार, कितने फट्टू हो तुम…
तो मैं बोला- मतलब?
“मतलब ये कि तुम्हारी मामी ने तुमसे कुछ भी उल्टा सीधा झूठ बोला और तुम सच समझ बैठे?”
तो मैं बोला- डिटेल में बताएंगीं?

तब मामी बोली- अबे मूर्ख मैंने झूठ कहा था कि पिछले दरवाजी की चाबी मेरे पास है और तूने सच मानकर सब बक दिया.
तो मैं बोला- हाँ, अच्छा ही हुआ न, आप दोनों को सब मालूम पड़ गया.
चाची बोलीं- इसे तो पहले ही सब मालूम था, जो हुआ वो तो सब नाटक था.
मैं बोला- जब सब मालूम था तो मुझे चूतिया क्यों बनाया?
तब चाची बोलीं- बनाया नहीं, तू पहले से ही है!
और हंसने लगीं.
तो मैं हाथ मुंह धोकर वहां से निकल लिया.

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