सोनिया को चोदा बरसात में

soniya ko choda barsaat mai दोस्तों आज, में आप सभी पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालो की सेवा में एक बार फिर से अपनी एक सच्ची घटना को लेकर हाजिर हुआ हूँ। दोस्तों यह सिर्फ़ एक महीने पहले पुरानी बात है, में एक कॉलेज का छात्र हूँ और मेरे साथ एक लड़की पढ़ती है जिसका नाम सोनिया है। वो लड़की हमारे घर से ज़्यादा दूर नहीं रहती सिर्फ़ बीस मिनट का पैदल रास्ता है और हम दोनों एक साथ ही कॉलेज से घर आते जाते है और हमारे घर की तरफ से सिर्फ़ हम दोनों ही उस कॉलेज में पढ़ने जाते है। दोस्तों इस वजह से कुछ दिनों में हमारे बीच दोस्ती भी बहुत गहरी हो चुकी थी। दोस्तों अब में आप सभी को सोनिया के बारे में थोड़ा विस्तार में बताता हूँ उसकी उम्र बीस साल रंग गोरा, लम्बाई 5.6 इंच वो एक ऐसी सीधीसाधी लड़की है, जो बहुत सुंदर नजर आती है। दोस्तों यह घटना ऐसे घटित हुई कि हमारे कॉलेज की छुट्टी हो जाने के बाद हम दोनों अपने घर वापस आ रहे थे कि तभी अचानक से तेज बारिश शुरू हो गयी। दोस्तों जुलाई अगस्त के महीनों में हरयाणा पंजाब में मानसून का समय होता है और इसलिए बारिश आना कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन बड़ी तेज बारिश का अचानक से आना हमारे लिए बड़ा चकित करने वाली बात थी। दोस्तों उस समय वो बारिश इतनी तेज थी कि उसकी वजह से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और चलना बड़ा ही मुश्किल था।

फिर हम दोनों मेरे घर के बहुत ही पास पहुंच चुके थे और जैसे तैसे हिम्मत करके हम दोनों मेरे घर पहुँच गये। अब मैंने उसी समय सोनिया से कहा कि यह बारिश तो आज रुकने तक का नाम ही नहीं ले रही तुम एक काम करो जब तक यह कम ना हो जाए तुम यहीं पर रूक जाओ उसके बाद चली जाना। अब वो मुझसे कहने लगी कि पहले घर के अंदर तो घुसो और उसके बाद जो भी करना होगा वो बात सोचेंगे। अब मुझे मेरे घर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ नजर आया और उसको देखकर में एकदम चकित रह गया और मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया कि में अब क्या करूं? तभी मुझे ध्यान आया कि घर की दूसरी चाबी हमेशा मेरे पास ही होती है, जिसकी मदद से मैंने वो ताला खोल दिया और उसके बाद अंदर जाकर मैंने अपने पापा को फोन किया। फिर उन्होंने बताया कि उन्हे किसी जरूरी काम की वजह से बाहर जाना पड़ा और इस वजह से वो कल तक वापस आएँगे। दोस्तों सोनिया अब तक दरवाजे पर ही खड़ी थी, मैंने उसको अंदर भी नहीं बुलाया क्योंकि किसी के घर में ना होने अकेले में एक कुंवारी लड़की का घर में आना अच्छा नहीं लगता। अब मेरे मन में एक विचार आ गया और मैंने सोचा कि क्यों ना में सोनिया के पापा को फोन करके बता दूँ कि इस समय सोनिया मेरे घर है और वो आकर उसको अपने साथ ले जाए।

फिर सोनिया ने हमारे घर वाले फोन से अपने पापा को फोन किया और उनको वो सब बता दिया, लेकिन उसके पापा कहने लगे कि इस हालत में वहां पर नहीं आया जा सकता। दोस्तों क्योंकि अब बारिश पहले से भी तेज हो चुकी थी और एक तेज गति के तूफान का रूप धारण कर लिया था। फिर मैंने उसके पापा से फोन पर बात करके उनको कहा कि अंकल आज घर पर मम्मी नहीं है, हम दोनों अकेले ही है इसलिए आप सोनिया को आकर ले जाओ, अगर किसी ने हम दोनों को साथ में देख लिया तो वो लोग पता नहीं क्या क्या कहेंगे? अब अंकल मुझसे कहने लगे कि बेटा मुझे तुम पर पूरा भरोसा है और तुम सोनिया का पूरा ध्यान रखना और बारिश के रुक जाने पर में उसको आकर ले जाऊंगा। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है अंकल आप बिल्कुल भी चिंता मत करो। यह मेरे पास एकदम सुरक्षित रहेगी। फिर फोन को नीचे रखकर मैंने सोनिया की तरफ देखा और मेरे तो होश ही उड़ गये, क्योंकि वो उस समय ठंड की वजह से बड़ी बुरी तरह से कांप रही थी। दोस्तों उस बारिश के साथ साथ तेज गति की हवा भी थी, इसलिए अब ठंड बहुत ही ज़्यादा हो चुकी थी और उसकी आंखे बंद होने लगी थी। अब में उसकी उस हालत को देखकर डर गया और मन ही मन सोचने लगा कि कहीं सोनिया की तबीयत ज़्यादा खराब ना हो जाए।

फिर में उसके लिए एक टावल और मेरी जींस और एक गरम टी-शर्ट लेकर आया और मैंने सोनिया को कपड़े बदलने के लिए कहा और अब मैंने देखा कि उसके हाथ पैर ठंड की वजह काम नहीं कर रहे थे, वो बिल्कुल जम गए थे। अब में उसकी हालत को देखकर और भी ज़्यादा डर गया। फिर मैंने जल्दी से उसको दूध में पत्ती डालकर तेज कड़क चाय बनाकर पीने के लिए दे दी और जैसे तैसे उसने चाय को खत्म किया। फिर में उसको अपनी बाहों का सहारा देकर बाथरूम तक ले गया और उसको कपड़े देकर अंदर भेज दिया, लेकिन अब मुझे डर था कि कहीं वो कपड़े भी ना पहने सके। फिर जैसे तैसे करके वो कपड़े बदलकर बाहर आ गयी, लेकिन वो अब भी सर्दी की वजह से कांप रही थी और बाथरूम से बाहर आकर वो सोफे पर बैठ गयी। अब मैंने उसको एक चादर ओढ़ने के लिए दे दी जिसको वो तुरंत ओढ़कर बैठ गयी और मैंने एक बार फिर से हम दोनों के लिए चाय बनाई, क्योंकि ठंड मुझे भी लग रही थी, लेकिन उसकी ठंड को देखते हुए में खुद को भूल गया था। अब मैंने उसको दोबारा चाय लाकर दी और हम दोनों पीने लगे, मैंने देखा कि वो अपनी दोनों आखों को बंद करके चाय पी रही थी। फिर चाय को पीते हुए मुझे छींक आ गयी और तब उसने अपनी आँखें खोली, मेरी हालत भी ज़्यादा ठीक नहीं थी।

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