हैडमास्टर और स्कूल टीचर का सेक्स

नमस्कार दोस्तो, आज मैं अपनी जीवन से जुड़े कुछ हसीन लम्हों को आपके साथ बाँटने जा रहा हूँ. मेरी उम्र 56 वर्ष है. मैं 5 फ़ीट 8 इंच का हूँ. मेरा वजन लगभग 120 किलो का है. मैं काफी हट्टा कट्टा और रंगीन मिजाज का एक तन्दरुस्त आदमी हूँ. मुझे बार बार मूछों पर ताव देना पसंद है. मेरे परिवार में मेरी पत्नी उम्र 52 साल और हमारी दो सन्तानें हैं. एक बेटा 28 साल का है और बेटी 24 साल की है. उन दोनों की शादी हो चुकी है. मैं एक सेंट्रल गवर्मेन्ट स्कूल का टीचर हूँ.

तो यह कहानी कुछ एक साल पहले शुरू हुई, जब मेरी बहू गृह प्रवेश कर हमारे घर संभालने आई. उसके आने के कुछ एक हफ्ते बाद मुझे हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट से प्रमोशन लैटर आया कि वो मुझे टीचर से प्रिंसिपल बना रहे थे, लेकिन मुझे पोस्टिंग किसी दूसरे शहर के स्कूल में दी जा रही थी. ये मुझे ठीक नहीं लगा, तो मैंने इंकार करने का तय कर लिया. फिर मेरे परिवार ने मुझे काफी समझाया कि चिंता की कोई बात नहीं है, वो लोग घर संभाल लेंगे. घर के सभी सदस्यों ने मुझे जाने को कहा.

वैसे ये अच्छा मौका भी था, मेरा वेतन भी काफी बढ़ रहा था और हमारा परिवार अब बढ़ने वाला भी था तो मैंने हां कह दी. मैं जॉइनिंग के लिए दूसरे शहर चला गया. मुझे स्कूल से एक स्टाफ क्वार्टर मिला था. मैं वहां अकेले ही रहता था. घर की देख रेख के लिए मैंने एक स्टाफ रख लिया था, जो खाना बनाना, घर साफ करना वगैरह सभी काम कर देता था. मैं स्कूल को काफी अच्छे तरह से चला रहा था.

ऐसा चलता रहा और कुछ 6 महीने गुजर गए.

फिर एक दिन जो हुआ वो कुछ ऐसा था. मैं हमेशा की तरह आज भी नहा धोकर स्कूल के लिए अपनी बुलेट बाइक पर रवाना हो गया. स्कूल पहुंचा. दिनचर्या आरम्भ हुई. प्रार्थना ख़त्म हुई और मैं अपने ऑफिस रूम की तरफ जा रहा था कि तभी मुझे ऑफिस स्टाफ की खुसुर-फुसुर सुनाई पड़ी. मैं ध्यान ना देते हुए अपने केबिन की तरफ चला गया.

मैंने अपने चपरासी को आवाज़ लगाई- ये ऑफिस रूम में क्या खुसुर फुसुर चल रही है, ज़रा मुझे भी तो बताओ?
मेरे चपरासी शिवा ने मुस्कुराते हुए कहा- सर, वो आज अपने स्कूल में एक नयी टीचर आई हैं, सभी उनके ही बारे में बातें कर रहे हैं.
मैंने भी पूछ लिया- अच्छा … ऐसी क्या बात है भला?
शिवा थोड़ा हकलाते कर बोला- अरे सर व्वो …. मैडम काफ़ी सुंदर हैं … एकदम गोरी चिट्टी … मानो दूध से नहा कर निकली हो.
मैंने भी थोड़े कड़क शब्दों में कहा- अच्छा तो ये बात है … आज कल सारे टीचर्स को हुस्न की भूख लगने लगी है.
शिवा ने सर झुका लिया.

फिर शिवा कहने लगा- सर वो मैडम हैं ही हुस्न की परी, देखते ही जी करता है उनको बांहों में भर लूँ.
शिवा मानो भूल ही गया कि वो मुझसे बात कर रहा हो. मैंने उसे डांटते हुए कहा- ये क्या बक रहे हो … पागल हो गए हो क्या … चलो जाओ अपना काम करो.
वह डर गया और कमरे से बाहर जा कर अपने स्टूल पर बैठ गया. फिर मैं अपने काम पे लग गया. कुछ पेपर साइन करने में व्यस्त हो गया.

मैंने शिवा से आवाज लगाते हुए कहा- ज़रा नयी मैडम को कहो कि वो मुझे रिपोर्ट करें.
“ओके सर!”

कुछ 15-20 मिनट बाद कोई महिला की आवाज मेरे केबिन में आई. उसने अन्दर आने से पहले मुझसे पूछा- सर, क्या मैं अन्दर आ सकती हूँ?
मैंने कहा- यस कम इन.

वो नई मैडम जैसे ही में ऑफिस के अन्दर आई, पूरा रूम एक सुंदर सी खुशबू से भर गया. क्या गजब का परफ्यूम लगाया था मैडम ने. मैंने उसको नीचे से ऊपर एकटक देखा. वो पीले रंग की साड़ी में लंबी चौड़ी भरी पूरी एक गोरी चिट्टी औरत थी. गुलाब की पंखुड़ी जैसे उसके रसीले होंठ, बलखाती कमर, उभरे हुए चूतड़ … गहरे गले के ब्लाउज से छलकते हुए दूधिया स्तन उसकी झीनी साड़ी के पल्लू से साफ़ झलक रहे थे. इतनी आकर्षक और रसीली महिला को अपने सूखे जीवन में देख कर मुझे मज़ा आ गया.

फिर मैंने अपना ध्यान हटाते हुए कहा- आइये आइये मैडम … कैसा लगा हमारा स्कूल और हमारा स्टाफ … प्लीज़ बैठिए और ज़रा अपना परिचय भी दीजिए. वैसे तो मुझे खबर मिली थी कि हमारे स्कूल में कोई टीचर आने वाले है. फिर आपकी चर्चा तो पूरे स्टाफ रूम में भी हो रही है.
मैडम ने मुस्कुराते हुए कहा- हां सर, स्कूल काफ़ी अच्छा है और स्टाफ के लोग भी काफ़ी अच्छे हैं, काफ़ी मिलनसार भी हैं सभी. मैं कल ही इधर शिफ्ट हुई हूँ, अभी फिलहाल स्कूल स्टाफ क्वॉर्टर में ही रुकी हूँ. मेरी फैमिली ओडिशा में है. हज़्बेंड आर्मी में हैं, तो ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. बच्चों की पढ़ाई वहीं पूरी करवानी है तो मैं अकेली ही यहां रहूंगी.
मैंने कहा- अच्छा, मैं भी ओडिशा का ही रहने वाला हूँ. आप की तरह मैं भी अकेला ही स्टाफ क्वॉर्टर में रहता हूँ. थोड़ी परेशानी होती है, पर क्या करें … जिंदगी में जीना है, तो काम कर प्यारे …

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