ससुर जी ने मेरी ननद की चूत बजायी

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रुषिता है, मेरी शादी अभी दो साल पहले ही हुई है. मेरे पति का नाम रोहित है. मेरी ससुराल दिल्ली के किनारे ही मेरठ वाले रोड पर स्थित है. घर बहुत बड़ा है पुश्तैनी जैसा … साइड में एक गेस्ट हाउस अलग है।

मेरी ससुराल में मेरे पति के अलावा मेरा एक देवर राहुल, एक ननद सुमीना और ससुर हैं जिनका नाम समेर सिंह है. मेरी सास का देहान्त करीब दस साल पहले हो चुका है।
मेरे पति एक सरकारी आफिस में बाबू हैं और मध्यप्रदेश में तैनात हैं. क्योंकि हमारा घर यहां दिल्ली में है तो वो महीने में एक बार ही घर आ पाते हैं।
मेरे ससुर जी आर्मी से रिटायर हैं ज्यादातर घर पर ही रहते हैं। मेरी ननद अभी बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है और देवर एक प्राईवेट कम्पनी में काम करता है।

शादी के बाद छः महीने तो में अपने पति के साथ ही रही फिर मेरी ननद और ससुर की वजह से मुझे मेरे पति ने मुझे ससुराल में ही छोड़ दिया रहने के लिये कि उनका ध्यान रखो. जब छोटे की शादी हो जायेगी तो फिर तुम मेरे पास आ जाना।

तो बात तब की है जब मेरे पति मुझे मेरी ससुराल में छोड़ कर अपने काम पर वापस जा चुके थे।

वैसे तो घर का महौल खुशनुमा था, एक सहेली जैसी ननद और एक छोटे भाई जैसा देवर और एक ससुर! सब ठीक था किसी चीज की कमी नहीं थी. कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन कुछ दिन बाद मुझे मेरी नीचे वाली मुनिया यानि मेरी चूत मेरे पति की याद में आँसू बहाने लगी और मेरे दिल को बेचैन करने लगी. क्योंकि अपने पति के बिना एक महीने तक रहना क्या होता है कोई मुझ से पूछे. वो भी तब जब मैं छः महीने उनके साथ रह कर आ चुकी थी जहाँ हमने दिन रात चुदायी में काटे थे।

खैर अब कर भी क्या सकते थे … ज्यादा मन होता तो अपने दोनों पैरों के बीच में एक तकिया लगा कर और कमरे की लाईट बन्द करके उसी पर अपनी चूत रगड़ लेती थी।

एक दिन की बात है, मेरा देवर सुबह ही अपने आफिस जा चुका था, ननद अपना टिफिन लेकर कालेज के लिये जा चुकी थी.

मैं बोर हो रही थी तो सोचा कि बहुत दिन हो गये गेस्ट हाउस की सफाई नहीं हुई तो जरा उधर की बैडशीट वगैरह बदल दूँ. कोई आ गया तो अच्छा नहीं लगेगा. यह सोच कर मैं गेस्ट हाउस में चली गयी और वहाँ की सफाई करने लगी. सफाई करते करते वहाँ मुझे कंडोम का पैकेट मिला और एक 72 घंटे के अन्दर खाने वाली गर्भनिरोधक गोली का पैकेट मिला.

मैं यह देखकर हैरान रह गयी कि आखिर यहाँ यह कौन प्रयोग कर रहा है. जब से मैं आई हूँ तब से तो कोई रिश्तेदार भी नहीं आया।
फिर मेरे शक की सूई सबसे पहले मेरे देवर की तरफ गयी कि शायद वो ही किसी को रात में यहाँ बुलाता है। यही सब सोचते सोचते मैंने वहाँ की सफाई कर दी और आकर नहाकर अपने कमरे में लेट गयी.

कुछ देर पहले हुए इस वाकये से मैं थोड़ी गर्म हो गयी थी सो मैंने लाईट बन्द करके अपनी मैक्सी ऊपर कर ली ओर अपनी चूत में उंगली करने लगी और मजा लेकर पानी निकाल कर सो गयी. लेकिन इतना जरूर ठाना कि मैं पता लगा कर रहूँगी कि आखिर वहाँ कौन ये रंगरेलियाँ मना रहा है।
और रात को मैंने चैक करने का फैसला कर लिया।

शाम को मैं रसोई में खाना बना रही थी कि तभी मेरे देवर का फोन आया कि भाभी आज मैं घर नहीं आऊँगा, कम्पनी के काम से बाहर जा रहा हूँ।

फिर आज के लिये मैं थोड़ी रिलेक्स हो गयी क्योंकि मेरा देवर तो आज घर में है नहीं. फिर मेरे दिमाग ने सोचा कि ससुरजी भी हो सकते हैं क्योंकि सासु माँ को गुजरे हुए भी कई साल हो गये. मैंने चैक करने का पक्का इरादा कर लिया और रात को सबको खाना खिला कर मैं और मेरी ननद सुमीना टीवी देखने लगी.

वैसे हम दोनों रात 11 बजे तक टीवी देखती हैं लेकिन आज पता नहीं सुमीना को क्या हुआ, अभी दस बजे ही कहने लगी- भाभी, मुझे तो बहुत नींद आ रही है, मैं सोने जा रही हूँ.
और वो अपने कमरे में सोने चली गयी.

वो अपने कमरे में ही सोती है. मैंने उसे कहा भी है कि मेरे पास ही सो जाया करे लेकिन उसे अपनी प्राईवेसी में कोई दखल नहीं चाहिये. आजकल की लड़कियाँ ऐसी ही होती हैं.

खैर मुझे तो जागना था तो मैं टीवी देखने लगी. लेकिन पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी और मैं सो गयी। लेकिन दिमाग में तो ‘जागना जागना’ चल रहा था तो करीब एक बजे हड़बड़ा कर मेरी आंख खुली और मैं उठी. कमरे में से ही पहले खिड़की में से गेस्ट हाउस की ओर देखा. लेकिन यहाँ से कोई हलचल नहीं दिखी. तो फिर भी मेरा मन नहीं माना मैं चुपचाप दबे पाँव कमरे से निकल कर चल दी और धीरे-धीरे गेस्ट हाउस की खिड़की के पास पहुँच कर कान लगा कर सुनने लगी.

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