सड़क पर नये यार का लंड चूसने का मजा

मैं- राहुल जी मुझे क्या पहन कर आना होगा?
राहुल अपना हाथ मेरी चूत पर रख दिया और पेंटी के ऊपर से ही गीली हो चुकी चूत को सहलाने लगा जिससे मेरी आँखें बंद हो गयी।
मेरी चूत सहलाते हुए राहुल बोला- मैं चाहता हूँ आप नंगी ही आ जाओ। हम दोनों मिल कर आपके बॉडी की एक्सरसाइज़ करवा दें।

इस बात से मेरी चूत बिल्कुल ही टाइट हो गयी, मैंने राहुल का हाथ अपनी पेंटी के ऊपर दबा दिया। अब राहुल ने मेरी पेंटी को एक साइड कर दिया और चूत में उंगली डाल कर उंगली से ही मुझे चोदने लगा।
मुझे बहुत मजा आ रहा था पर डर भी लग रहा था कहीं कोई देख ना ले।
राहुल मेरा मोबाइल लेकर बोला- इसका लॉक खोलो!

मैंने लॉक खोल कर दे दिया, अब उसने अपने मोबाइल पर मेरे मोबाइल से कॉल कर लिया जिससे मेरा नम्बर उसके पास चला गया।

मैं अब शायद खुद भी राहुल से चुदवाना चाह्ती थी इसलिये मुझे सब अच्छा लग रहा था।
मैंने अब अपना हाथ राहुल के लंड पर रख दिया और लंड सहलाते हुए उसके कान में बोली- नंगी नहीं आ सकती, वहाँ आने के बाद हो सकती हूँ।
राहुल खुश हो गया और अपनी दो उंगली चूत में डाल कर चोदने लगा. मैं बहुत उत्तेजित हो गयी थी। फिर उसने अपनी उंगलियाँ निकाल कर बैठ गया.

मैं गुस्से में- क्या हुआ?
राहुल- यहाँ पूरी हो जाओगी तो फिर मिलने के लिये कैसे तड़पोगी?
मैं समझ गयी थी कि राहुल बहुत ही अच्छा खिलाड़ी है चुदायी के खेल का; मैं मुस्कुरा कर उसको देखने लगी।

इतनी देर में अनु और संजय भी आ गये और साथ में पीने लगे।

अब तक रात के 10 बज गये थे तो मुझे लगा अब चलना चाहिये। अब अनु और राहुल बात करते हुए आगे चलने लगे संजय और मैं पीछे पीछे चल रहे थे।
संजय- भाभी राहुल ने सब समझा दिया ना?
मैं- हां, क्या पहन कर आना है बस इसी पर बात हुई। क्या खाना है ये बाद में बतायेगा।
संजय- ठीक है, कार्ड में मेरा नम्बर है अपको कोई जरूरत हो तो मुझे बता दीजियेगा।
मैं मन में सोच रही थी जरूरत तो आज रात तुम्हारे लंड की है, दे दो।

संजय- कहाँ खो गयी?
मैं- कहीं नहीं, बस सोच रही थी कि ज़िम ज्वाइन करने से पहले घर पर थोड़ा सा एक्सरसाइज़ कर लूं जिससे ज्यादा प्रोब्लम नहीं होगी वहाँ।
संजय- इट्स ए गुड आइडिया।
अब हम लोग बाहर आ गये।

अनु- नेहा, तुमको राहुल अपनी बाइक से घर छोड़ देगा, उसका घर भी उधर ही है। मैं संजय के साथ जा रहा हूँ, इसका घर मेरी तरफ है।
राहुल मुस्कुराते हुए- हाँ भाभी, चलिये मैं आपको छोड़ दूंगा।
मैं भी मन ही मन मुस्कुरा रही थी और जान रही थी कि राहुल मुझे छोड़ना नहीं चोदना चाहता है।

मैंने अनु को बोला- ठीक है, चलते हैं, नहीं तो ज्यादा लेट हो जायेगा।
अब संजय और अनु सिगरेट पीने लगे और मैं राहुल के पीछे बैठ गयी।
अनु मेरे पास आया और मेरे होंठों को चूम कर गुड नाइट बोला।
यह पहली बार था जब कोई बाहर खुले में मुझे किस कर रहा था। मेरी बॉडी में सिहरन हुई जिसे अनु और राहुल दोनों ने महसूस किया।

अब हम जाने लगे तो रास्ते में राहुल ने बोला- भाभी, आप अकेले रहती हो?
मैं- नहीं छोटा भाई भी साथ में रहता है।
राहुल- तो उसे दारू महक आ गयी तो?
मै- हाँ इस बात का डर तो मुझे भी लग रहा है।

राहुल ने अपने जेब से कुछ निकल कर खा लिया और बोला- इसका इलाज है मेरे पास!
मैं- तो वो मुझको भी बता दो वर्ना मेरा भाई घर पर सब बता देगा।
राहुल- आप तो इतना दूर बैठी हैं तो कैसे पता चलेगा आपको?
मैं राहुल का मतलब समझ गयी और मैंने पीछे से राहुल को पकड़ लिया जिससे मेरी चुची उसकी पीठ पर चुभने लगी।
राहुल- आआह्ह्ह मजा आ गया।
मैं अब फुल नशे में आ रही थी- क्या मजा आया देवर जी?
राहुल- भाभी, आपकी चुचियाँ मजा दे रही हैं।

सड़क पर कोई नहीं था, आस पास घने पेड़ और झाड़ियाँ थीं तो मैंने पीछे से राहुल के लंड पर हाथ रख दिया और बोली- मेरे देवर के यहाँ मजा आ रहा है क्या?
राहुल- इसका नाम यहाँ नहीं है भाभी।
मैं उसके लंड को दबा रही थी और उसकी पीठ में अपनी चुचियाँ दबा रही थी।

मैं- तो क्या बोलते हैं देवर जी?
राहुल- क्यों आपको नहीं पता?
मैं- नहीं, बस ये हथियार है आपका जिससे आप बिस्तर में लड़ाई करते हो अपनी गर्लफ्रेंड से।
राहुल हंस रहा था और बोला- आपके पास भी कोई हथियार है?
मैं- नहीं, मैं तो बस हाथ से ही लड़ती हूँ।
राहुल- पर अनु के साथ तो और भी चीजें लड़ा देती हो आप।

मुझे लगा अनु ने इसको चुदायी के बारे में कुछ बता दिया है इसलिये मैं शॉकड होकर पूचा- क्या लड़ाया है अनु से?
राहुल- अभी पार्किंग में होंठों को लड़ा दिया था।
मैं शर्म से लाल हो गयी और राहुल के कान को मुँह में लेकर चूसने लगी और बोली- तो मेरे होंठों के हथियार से अपना हथियार लड़ाना है क्या?

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