पेड सेक्स में दिया परम आनन्द

मुझे उनकी फोटो देख कर इस बात का कुछ अंदाज तो हो गया था. मैंने उनकी फैमिली के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि उनके हस्बैंड का बिजनेस है और वह अक्सर बाहर ही रहते हैं. घर आते भी हैं, तो मुझे ध्यान नहीं देते हैं. मेरी दो बेटियां हैं, दोनों बाहर के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं. यहां मैं अकेली रहती हूं.

मुझे सारा माजरा समझते देर ना लगी. चूंकि मैं भी उनकी फोटो देखकर सम्मोहित हो गया था. मैं उनकी इच्छा को ना नहीं कह पाया.

मैंने उनसे कहा- आप मुझसे कब मिलना चाहती हैं और मिलना कहां है?
उन्होंने मुस्कुरा कर जवाब दिया- कितना सब कुछ तो बता दिया और आपको अब भी मिलने के समय और स्थान को जानने की आवश्यकता है. मैं लगभग अकेली रहती हूं, आप जब भी फ्री हों, तो मेरे घर पर ही आ जाइए. यहां आपको टोकने वाला कोई नहीं है.
मैंने कहा- ठीक है … पर पटना से लखनऊ जाने के लिए समय और पैसे भी तो चाहिए होते हैं. जब मेरा उधर का प्रोग्राम बनेगा, तो मैं आपसे मिल लूंगा.
मतलब मैंने उसे बता दिया था कि मैं सिर्फ पेड सेक्स करता हूँ.
इस तरह मैंने उन्हें अपनी मजबूरी बताई.

उन्होंने मेरी बात को समझते हुए कहा- आप पैसे की फ़िक्र मत कीजिए, आप बस ये बताइए कि आप कब आ रहे हैं.
मैंने 3 दिन बाद आने का कहा.

उन्होंने मुझसे मेरा अकाउंट नंबर लिया और एक घंटे बाद मेरे मोबाइल पर मैसेज आया कि मेरे खाते में पांच हजार रूपए आ गए हैं.

मैंने उनको बताया कि मैं अपना रिजर्वेशन करवा कर आपको सूचित करता हूँ.
इस पर उन्होंने मुझे वापसी का टिकट बुक करने के लिए ये कहते हुए मना कर दिया कि वापसी का बाद में देख लेंगे.

मैं हां कर दी. फिर ट्रेन में सीट बुक करके मैंने उन्हें अपना आने का प्रोग्राम बता दिया.

फिर मैं बताए हुए दिन पटना से लखनऊ के लिए निकल गया. रात में गाड़ी थी और लगभग सुबह में मैं लखनऊ पहुंच गया. लखनऊ स्टेशन पर पहुंच कर मैंने उन्हें कॉल किया.

उन्होंने बताया कि मैं स्टेशन के बाहर ही खड़ी हूँ. मुझे मालूम था कि आप किस ट्रेन से आ रहे हैं, तो मैं आपकी ट्रेन की लोकेशन अपने मोबाइल से चैक कर रही थी.

मैं उनसे दस मिनट में आने का कहा. बाहर आकर मैंने उन्हें देखा, तो बस देखता ही रह गया. उस परी का रूप देख कर मैं तो जैसे अवाक रह गया. जितनी सुन्दर वो अपनी फोटो में देखने में लग रही थीं, उससे कहीं ज्यादा वह सामने से देखने में लग रही थीं.

क्योंकि मैंने भी अपनी फोटो उनको भेजी हुई थी, तो उनको भी मुझे पहचानने में देर ना लगी.
मलीहा ने मेरे पास आकर मुझे हिलाया और बोला- कहां खो गए?
मैं क्या बोलता. वहां पर भीड़ थी, फिर भी मैंने उनकी सुन्दरता की थोड़ी सी तारीफ़ की.
वो थोड़ी शरमाईं और मुस्कुरा कर बोलीं- अब चलिए भी.

इस वक्त वो हल्के ब्लू कलर की साड़ी में आई थीं और वो एक स्लीबलैस ब्लाउज पहने हुई थीं. आँखों पर गौगल्स लगाए हुई थीं. मैं दिखने में बहुत ही साधारण था. मुझे तो मानो कोई हूर की परी का साथ मिल गया था.

मैं उनके साथ चल दिया.

मलीहा मेरे साथ बाहर आकर मुझसे एक जगह रुकने के लिए बोलीं. फिर कार पार्किंग से अपनी गाड़ी लेकर आईं. वह खुद ही कार ड्राइव कर रही थीं. मैं उनकी कार में बैठ गया और उनके साथ चल पड़ा.

अभी यह सब बताने की जरूरत तो नहीं थी कि उनका मकान कैसा था. ये जाहिर सी बात थी, महंगी कार देख कर ही लग गया था. फिर भी मैं बता देता हूं कि उनका घर एक आलीशान मकान था. कोठी देख कर ही लग रहा था कि घर में काफी नौकर चाकर भी होंगे.

वो मुझे घर में अन्दर ले गईं … तो मैंने उनसे पूछा- मेरा कमरा कौन सा है?

वो मुझे अपने कमरे के बगल वाले कमरे में ले गईं और बोलीं- यह आपका कमरा है.

उन्होंने मुझे बाद में बताया कि मैं आपको अपने कमरे में ही रोकना चाहती थी, लेकिन घर में नौकर चाकर हैं, तो जरा सावधानी रखना पड़ती है.

मैं ओके कह कर उस कमरे में चला गया. कमरा काफी अच्छा था. मैं फ्रेश होकर बाहर निकला, तो वह मेरे कमरे में बैठी हुई थीं.

जैसे ही मैं बाथरूम से बाहर निकला, तो मैं अपने तौलिए में था. वह भी अब तक अपने कपड़े बदल आ गई थीं. वो उठ कर मेरे सीने से चिपक गई.

एकाएक हुए इस हमले से मैं एकदम से अकबका गया. फिर मैंने भी इसका रिप्लाई दिया और उन्हें कसके अपने गले से लगा लिया. वो चूंकि एक फ्रॉक जैसी शॉर्ट्स नाइटी पहन कर आई थी. जिससे मुझे भी थोड़ा उत्तेजना होने लगी. जब मैंने उन्हें कसके गले से लगाया, तो इस उम्र में भी उनके चूचे मुझे काफी टाइट लगे. उनके कड़क मम्मे मेरे सीने से दब रहे थे, जिससे मुझे उनकी कसावट और सख्ती का आभास हो गया.

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