पड़ोसन आंटी की गर्म चुदाई

कुछ दस मिनट बाद हम दोनों अलग हुए, तो हमें होश आया कि यहां हमें अञ्जलि भी देख सकती है. तब हम दोनों अलग हुए.

आंटी ने कहा- कल सुबह 10 बजे आ जाना, तुम्हारे अंकल भी काम पर जा चुके होंगे और बच्चे भी स्कूल जा चुके होंगे.
मैंने उनकी बात मान ली और जाकर अञ्जलि को काम करवा कर वापिस आ गया. घर आने से पहले मैं आंटी को जोरदार किस करके आया.

घर आकर अब मैं अगले दिन का इंतजार करने लगा. मैंने लंड की मालिश भी की और बाल भी साफ कर लिए.

अगले दिन मैं जब उनके घर गया, तो आंटी ने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया. घर के अन्दर जाते ही मैं आंटी के ऊपर टूट पड़ा और वो भी मुझ पर टूट पड़ीं. हम दोनों एक दूसरे को पागलों की तरह किस कर रहे थे.

फिर मुझे याद आया कि गेट तो बन्द ही नहीं किया है. हमें कोई बाहर से भी देख सकता था.
उसके बाद आंटी गेट बन्द करके आईं और फिर मुझे लेकर बेडरूम में चली गईं. आंटी ने एक पतली सी नाइटी पहन रखी थी, जिसमें वो गजब का माल लग रही थीं.

बेडरूम में जाते ही आंटी और मैं, एक दूसरे पर टूट पड़े. हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. किस करते करते हम बेड पर आ गए. मैंने आंटी को बेड पर लिटा दिया और मैं उनके ऊपर आकर उनको किस करने लगा. आंटी भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं. मैं उनको किस करते करते नीचे की तरफ आने लगा. पहले मैं उनकी गर्दन पर किस करने लगा और साथ की साथ नाइटी के ऊपर से ही उनके चुचे भी दबाने लगा. आंटी को भी मजा आने लगा, वो भी सिसकारी लेने लगीं.

‘अहहा … उम्म्ह… अहह… हय… याह… उम्म्म्म … ओह ओह … और चूस और चूस उम्म्म्म … आह आह..’

उसके बाद मैंने आंटी की नाइटी को उतार कर उनको नंगी कर दिया.

अह्हा … क्या मस्त बदन था आंटी का. … एकदम दूध की तरह गोरा और मुलायम.

मैंने फिर से उन्हें किस करना शुरू कर दिया. हम एक दूसरे को छोड़ ही नहीं रहे थे, तभी आंटी ने अपना हाथ मेरी टी शर्ट के अन्दर किया और अपने मुलायम हाथों से मेरी कमर को सहलाते हुए मेरी टी-शर्ट उतार फेंकी. अब आंटी पूरी नंगी थी और मैं सिर्फ जींस में था.

उन्होंने मेरे होंठ चूमना छोड़ कर मेरी छाती को चूमना शुरू कर दिया. मेरा लंड अब मेरी जींस को फाड़ने पर तैयार था और मुझे वहां दर्द भी होने लगा था.

तभी जैसे आंटी ने मेरा दर्द समझा और मेरी जींस का बटन खोल कर मेरी जींस और चड्डी को उतार दिया. फिर मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूमने लगीं.

हम दोनों आदमजात नंगे होकर काफी देर तक चुम्बन करते रहे. मैंने आंटी के मस्त मस्त चूचों पर हमला कर दिया और दबा दबा कर चूसने लगा.

आंटी की सिसकारियां निकलने लगीं- अहहा … उम्म्ह … अहह … हय … याह … उम्म्म्म … ओह ओह … और चूस और चूस उम्म्म्म … आह आह.

मैंने आंटी के चूचों को चूसते चूसते उनकी चूत में उंगली करने लगा और फिर उनके चूचों से होता हुआ उनके पेट और नाभि पर चूमने लगा. आंटी का बुरा हाल होने लगा. मैं उनकी चूत चूसने लगा और चूत को चूसते टाइम उनके चूचों को अपने हाथों से दबाने लगा.

आंटी की मस्त सिसकारियां निकल रही थीं- आहह … अहहा … अहह … अहह … उम्म्म्म … उफफ्फ़ … और चूस और चूस उम्म्म्म … आह आह.

तभी आंटी का पानी निकल गया और मैंने उनका सारा पानी पी लिया. मैंने उनकी चूत को चाट चाट कर साफ कर दिया और वापिस उनके ऊपर आकर उनके होंठ चूसने लगा.

किरण आंटी फिर से गर्म होने लगीं और कहने लगीं- अब और मत तड़पाओ … जल्दी से डाल तो अन्दर.
मैंने कहा- पहले मेरा लंड तो चूसो.
उन्होंने मेरा लंड हाथ में पकड़ा और बोलीं- तेरा लंड तो तेरे अंकल से भी बहुत बड़ा है और मोटा भी है.
मैंने कहा- आंटी जी, ये सिर्फ़ आपको देख कर कुछ ज्यादा ही मचल रहा है, अब इसको अपने मुँह में लो और इसे शांत कर दो.

किरण आंटी ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं. साली आंटी ने पहली बार में ही पूरा का पूरा लंड मुँह के अन्दर ले लिया. दोस्तो … क्या मजा दे देकर चूस रही थी लंड … मुझे तो बहुत मजा आ रहा था.

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद आंटी बोली- अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा है. जल्दी से डाल दे लंड को मेरी चूत के अन्दर और मिटा दे इस चूत की गर्मी.
मैंने लंड को आंटी की चूत पे लगा दिया. एक ही झटके से मेरा आधा लंड उनकी चूत के अन्दर चला गया.
आंटी की आवाज़ निकली- आह … मर गई.

Pages: 1 2 3

Dont Post any No. in Comments Section

Your email address will not be published. Required fields are marked *