चुद गई ऑफिस गर्ल

kamukta अपने 15 वर्ष की मेहनत के बाद एक बड़ा मुकाम हासिल करना किसी सपने से कम ना था सब कुछ बड़ी तेजी से हुआ। मैंने अपने 15 वर्ष अपने बिजनेस में लगा दिए लेकिन मैं अपने परिवार को समय ना दे सका मेरे बच्चे बड़े होते जा रहे थे। मेरे लड़के की उम्र आज 10 वर्ष हो चुकी है लेकिन मुझे मालूम ही नहीं चला कि कब समय इतनी तेज गति से निकल गया। एक दिन जब मैं अपनी कार से घर लौट रहा था तो आगे से एक छोटा बच्चा पता नहीं कहां से आ गया और उसे बचाने के चलते मैंने गाड़ी के हैंडल घुमाया तो गाड़ी जाकर डिवाइडर से टकरा गई। मैं तो बेहोश हो चुका था लेकिन जब मुझे होश आया तो मैं अस्पताल में था और मेरे ऑफिस में काम करने वाले चंदन मेरे साथ थे जो कि मेरा सारा काम संभालते हैं। मेरी पत्नी और मेरे बच्चे भी वहीं पास में बैठे हुए थे मैं अच्छे से बात तो नहीं कर पा रहा था लेकिन उन लोगों को बहुत खुशी हुई कि मैं अब होश में आ चुका हूं।

मुझे कुछ याद नहीं था कि मैं कितने दिनों बाद होश में आया हूं मेरे सर में काफी दर्द हो रहा था मैंने जब अपने सर में हाथ लगाया तो मेरे सर में भी चोट आई हुई थी। धीरे धीरे मैं ठीक होता जा रहा था और जब मैं घर आ गया तो मेरी पत्नी ने मेरी बहुत देखभाल की मेरी पत्नी माधुरी मुझे बहुत प्यार करती है। माधुरी का साथ मेरे जीवन में नहीं होता तो शायद मैं कब का टूट चुका होता लेकिन माधुरी की वजह से ही मैं अपने जीवन में सफल हो पाया हूं। माधुरी मुझे कहने लगी आप तो अब पहले से बेहतर महसूस कर रहे होंगे मैंने माधुरी से कहा हां लेकिन उस छोटे बच्चे को बचाने के चलते मेरी गाड़ी डिवाइडर से जा टकराई और मैं बुरी तरीके से घायल हो गया था। माधुरी ने मुझे आगे की बात बताई और कहा मैं उस वक्त मम्मी के साथ बैठी हुई थी उस दिन मम्मी भी घर आई हुई थी। मैं मम्मी के साथ बात कर ही रही थी कि तभी मेरे फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया और मैंने जब फोन उठाया तो वह व्यक्ति मुझे कहने लगा कि आपके पति का एक्सीडेंट हुआ है।

हम लोग सब तुम्हारे पास दौड़े चले आए लेकिन तुम बेहोश थे तुम्हें करीब अगले दिन शाम के वक्त होश आया मैंने माधुरी से कहा मैं इतनी बुरी तरीके से घायल हुआ था क्या। माधुरी कहने लगी तुम्हें बहुत ज्यादा चोट आई थी मैंने जब तुम्हें देखा था तो मैं घबरा गई थी मेरे हाथ पैर फूलने लगे थे लेकिन मैंने हिम्मत रखते हुए बच्चों को संभाला। ना जाने उस दिन ऐसा क्या हुआ कि मेरे साथ इतना बड़ा हादसा होते-होते टल गया मुझे चलने में थोड़ा परेशानी थी लेकिन अब मैं ठीक होने लगा था। मैं व्हीलचेयर पर ही बैठा रहता था क्योंकि डॉक्टर ने मुझे व्हील चेयर पर बैठने के लिए कहा था मेरा चल पाना अभी संभव नहीं था। मैंने माधुरी से कहा मुझे ऑफिस जाना है तो माधुरी कहने लगी आप ऑफिस जाकर क्या करेंगे चंदन जी हैं तो सही वह सारा काम संभाल लेंगे। मैंने माधुरी से कहा मेरा मन घर पर नहीं लग रहा है सोच रहा हूं कि ऑफिस चले जाऊं। माधुरी कहने लगी आप देख लीजिए वैसे तो मैं आपको यही सलाह दूंगी कि आप घर पर ही रहे लेकिन मैं कहां मानने वाला था आखिरकार मैं ऑफिस चला गया। ड्राइवर ने मुझे कार से उतारा और व्हीलचेयर पर अपनी मदद से बैठा दिया और मैं व्हील चेयर पर बैठ गया। सामने मेरे ऑफिस के सारे लोग मेरे स्वागत के लिए खड़े थे चंदन जी तो जैसे बड़े ही उत्सुक थे उन्होंने मुझे माला पहनाते हुए कहा सर ऑफिस में आपका स्वागत है। मैंने चंदन जी को मजाकिया अंदाज में कहा साहब क्या मैं पहली बार ऑफिस में आ रहा हूं। चंदन जी ने भी अपने मुस्कान को छुपाने की कोशिश की लेकिन उनकी हंसी बाहर छूट ही गयी और वह मुझे कहने लगे प्रदीप सर आप इतने समय बाद ऑफिस आ रहे हैं तो अच्छा तो लगेगा ही और यह किसी उत्सव से कम भी नहीं है। मैंने चंदन से कहा क्या भाई साहब आप तो मेरे आने पर बड़े खुश नजर आ रहे हैं वह कहने लगे चलिए सर वह मुझे व्हील चेयर से मेरे केबिन में लेकर गए। मैं अपने केबिन में बैठा था तो मैंने देखा मेरे केबिन की पूरी अच्छे से सफाई हुई थी और चंदन जी ने मुझे अपने कंधे का सहारा देते हुए मेरी कुर्सी पर बैठा दिया वह कहने लगे साहब आप इतने दिन बाद आ रहे हैं तो बहुत अच्छा लग रहा है आप पूरे स्टाफ से मिल लीजिए।

मैंने उन्हें कहा अभी रहने दीजिए थोड़ी देर बाद मिल लेता हूं मैं हमेशा की तरह अपने काम पर लग गया मैं काम में इतना खो गया कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब घंटे बीत गए। चंदन जी मेरे पास आये और कहने लगे प्रदीप जी चलिए आपको कुछ नए लोगों से भी मिलवा ना है मैंने उन्हें कहा ठीक है। वह मुझे जब हमारे मीटिंग हॉल में ले गए तो वहां पर कुछ नए चेहरे मुझे दिखाई दिए मैं सब लोगों का एक एक कर के परिचय ले रहा था। उनमे से दो लोग मेरे पास आये और कहने लगे सर आपकी मेहनत के बलबूते हज आप यहां पर पहुंचे हैं लेकिन आपसे मिलकर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि जैसे हम अपने बॉस से मिल रहे हैं आप बिल्कुल ही सामान्य और साधारण प्रवृत्ति के हैं। उन्हें मुझसे मिलकर बहुत खुशी हुई और सारा ही स्टाफ़ मुझसे हमेशा खुश रहता था मैं कभी भी किसी को काम को लेकर दबाव नहीं डालता था। उस दिन मैं अपने घर चला आया मुझे काफी अच्छा लग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरे अंदर दोबारा वही जोश आ गया है जो पहले काम के प्रति था क्योंकि मैं अपने काम के प्रति पूरी तरीके से समर्पित हूँ। मुझे घर पर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता मैं अपने ऑफिस जाकर खुश था तो मेरी पत्नी माधुरी मुझे कहने लगी आज आप बड़े खुश नजर आ रहे हैं।

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