मुंबई में पड़ोस की कमसिन माल की चूत चुदाई

दोस्तो नमस्कार, मेरा नाम विकास है और मैं मुंबई में रहता हूँ. मेरी उमर 23 साल की है और मेरे लंड का साइज़ भी मेरी उमर के हिसाब से ज़्यादा है. ये काफी मजबूत किस्म का लंड भी है और इसकी ख़ास बात ये है कि ये दिखने में भी गोरा है.

बात उस टाइम की है, जब मैं जॉब के लिए पहली बार किसी बड़ी सिटी में आया था. तब मुझे इस सिटी के बारे में कुछ भी पता नहीं था. मैंने और मेरे दोस्त ने एक रूम लिया और अपने अपने जॉब पर सैट हो गए.

हमारे रूम के ठीक राईट साइड में एक घर था, जिसमें अंकल, आंटी और उनके 2 बच्चे रहते थे. एक लड़का और एक वो लड़की. मुझे याद है आज भी जब मैंने उसे पहली बार देखा था. मैंने छत पर गाने लगा रखे थे और संडे एंजाय कर रहा था. तभी बगल की छत पे सुनहरे गीले बाल फैलाए हुए एक लड़की आ रही थी.

ये कोई मामूली लड़की नहीं थी.. कयामत थी, पूरी की पूरी कयामत थी. उसका 36-28-36 का फिगर एकदम फाड़ू था. क्या मस्त लचकती कमर थी, नशीली आंखें, रसीले होंठ और दो सुडौल आम.. मेरा मतलब उसके तने हुए बूब्स किसी का भी लंड खड़ा कर दें. उसके मम्मे वाकयी इतने हाहाकारी थे कि पहली ही नजर में किसी को भी पागल कर दें. उसी तरह का उसका पिछवाड़ा था.

आय हाय मेरा तो जी कर रहा था कि साली को कस के पकड़ लूँ और चुची मुँह में लेकर तब तक चूसता और दबाता रहूँ, जब तक कि वो अपने मुँह से ‘आहह अब बस करो..’ ना बोल दे.
पर क्या करता.. मजबूर था.

मैं उसी के सोच में डूबा था कि अचानक उसने मेरी तरफ देख लिया. मैंने भी नज़र नहीं हटाई और उसने भी कोशिश नहीं की.

तभी उसकी मम्मी उसको पुकारने लगी दिव्या.. तब मुझे नाम पता चला कि ये दिव्या है. वो हिरनी सी कुलांचें भरती हुई ‘आई मम्मी..’ कहती हुई नीचे चली गई. पर वो मेरा नींद, चैन सब उड़ा ले गई.

जब नीचे जाते हुए उसके कूल्हे (पिछवाड़ा) मटक रहे थे, तो मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था. अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं था. मैं भी एकदम से बाथरूम में जा घुसा और काम पे चालू हो गया. कुछ पल हाथ की कारगुजारी से थोड़ा सुकून मिला. पर अब भी वो दिमाग़ में घूम रही थी.

कुछ ही समय बाद बरसात का टाइम आ गया. सब जगह हरियाली और थोड़ी-थोड़ी ठंडक सी हो गई.

उस दिन शनिवार था. मेरा रूम मेट भी ड्यूटी पर गया हुआ था. मैं घर में अकेला था. अचानक जोर से गड़गड़ाहट हुई और जोर की बारिश होने लगी. साथ ही लाइट भी चली गयी.

मैं थोड़ी देर बाद घूमने बाहर आ गया कि तभी सामने दिव्या दिखी, जो कुछ परेशान सी लग रही थी. उसने मुझे इशारा करके अपने पास बुलाया और मैं चला गया.
मैंने पूछा कि क्या बात है?
तो उसने कहा कि मेरे घर की इमरजेंसी लाइट नहीं मिल रही है.
वो मुझसे हेल्प मांगने लगी.

मुझे जब उसके घर में कोई नहीं दिखा, तो उसने बताया कि सभी घरवाले शादी में गए है, जो सुबह तक लौटेंगे.

मैंने अपने फोन से लाइट खोली, जिसकी बैटरी सिर्फ़ 3% बची हुई थी. वो आगे चलने लगी और मैं उसके पीछे.

उसके बेडरूम से होते हुए, वो मुझे किचन तक ले गयी और इधर-उधर देखने लगी. वो शायद लाइट ढूँढ रही थी. मैंने भी पीछे से फोन की लाइट ऑन रखी थी कि तभी मेरा फोन स्विच ऑफ हो गया. पूरे कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया. उसने पूछा तो मैंने बताया कि मोबाइल कम बैटरी की वजह से स्विच ऑफ़ हो गया है.

अब हम दोनों कुछ देर यूं ही खड़े ही रहे. तभी अचानक फिर से बादल गरजने की ज़ोर से आवाज़ आई.. साथ ही बिजली भी कड़की. वो घबरा कर थोड़ा पीछे को सरक गयी. जिससे वो थोड़ा सा मेरे लंड पर और थोड़ा सा मेरी छाती पर टच हो रही थी. मेरी सांसें तेज चलने लगीं और उसके बदन की खुशबू मेरी सांसों की गर्मी को और भी बढ़ा रही थी. उसे भी मेरी गरम सांसें अपने कान पर महसूस होने लगीं और वो भी कुछ अजीब सा बिहेव करने लगी. उसकी सख़्त चूचियां भी तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगीं.

मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया, जो उसके कूल्हों से टकरा रहा था. उसके सॉफ्ट कूल्हे मुझे अपने लंड पे महसूस हो रहे थे. उसकी सांसें भी बहुत तेज गति में चलने लगीं.

फिर मैंने धीरे से हाथ उसकी कमर में डाला और कस के दबा दिया. मेरे इस हमले से वो एकदम गरम हो गयी. उसकी कोई आपत्ति न पाकर मुझे हिम्मत आ गई और मैंने उसे अपनी तरफ घुमा लिया.

अब मैं उसकी धड़कनों को सुन सकता था, जो बहुत तेज आवाज़ कर रही थीं. उसके नाज़ुक होंठ काँपने लगे. पहले शुरूआत उसने की और मेरे होंठों पे अपने होंठ रख दिए. उसका तपता बदन और मुलायम होंठ मुझे पागल बना रहे थे.

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