मुझे याद है वो पहली चूत चुदाई

अब मैं आप सबको अपनी एक सहेली की पहली बार की चुदाई की कहानी बता रही हूँ.
मेरी सहेली के शब्दों में ही पढ़िए.

जब मैं कॉलेज में थी, उन दिनों मैंने जवानी में कदम रखा ही था. मेरे बोबे ताजा ताजा उभरे थे व मेरी फुद्दी पे बाल भी आ गए थे. काफी लड़के मुझपे मरते थे और कई ने मुझे प्रपोज तक किया. वहां काफी लड़के मेरे अच्छे दोस्त बने.

मैं उन दिनों टाईट सूट या फिर स्लीवलेस टॉप पहन कर कॉलेज जाती थी. मुझे खुद भी अपनी खिलती जवानी को सभी दिखाने में मजा आता था. जब भी कोई लड़का मेरी तरफ देख कर आहें भरता तो मुझे अन्दर से एक ख़ुशी सी मिलती थी. सारे दिन लड़कों की निगाहों को मैं रात को सोते समय याद करके अपने बोबे सहला कर चुत पर हाथ फेरती थी और अपनी जवानी पर खुद झूम उठती थी.

इन सब बातों ने मुझे और भी अधिक बिंदास सा कर दिया था. इसका नतीजा यह हुआ कि जब मैं दूसरे साल में गई तो मैं खुल कर अपनी जवानी सबको दिखा देना चाहती थी. या यूं कहूँ कि मुझे अपनी जवानी के मीठे शहद को निचुड़वाने का जी करने लगा था.

दूसरे साल की फ्रेशर पार्टी के दिन मैंने सोचा आज कुछ ऐसा पहन कर जाऊँ कि सब पागल हो जाएं.
मैंने उस रात काले रंग की ब्रा और पैंटी पहनी और ऊपर से वन पीस पहन के कॉलेज गई. मैंने अपने बाल खुले रखे थे. बाकी लड़कियों की तरह मैं भी सुंदर दिख रही थी.

मैं कॉलेज पहुंची और कुछ देर बाद पार्टी शुरू हुई. सब नाच गा रहे थे तो मैं भी अपने ग्रुप के साथ मस्ती करने लगी. इसी मस्ती के दौर में मुझे कई लड़कों ने डांस के बहाने छुआ और कुछ ने तो भीड़ का फायदा उठा कर मेरे मम्मों और चूतड़ों पर भी हाथ फेर दिया था. मुझे इस स्पर्श से जरा घबराहट तो हुई, पर अच्छा भी लगा.

कुछ देर नाचने के बाद हम लोगों ने खाना खाया और फिर मस्ती करने लगे. सुबह के करीब तीन बजे पार्टी खत्म हुई और हम लोग कॉलेज से निकले.

इतनी रात को घर जाने के लिए कुछ साधन नहीं मिल रहा था, तो मेरे एक दोस्त विशाल ने कहा कि तुम लोग मेरे रूम पे चलो, पास में ही है, सुबह चले जाना, अभी काफी रात हो गई है.

हम लोग तीन लड़कियां थीं तो हमने सोचा रात में यहीं रूक जाती हैं, सुबह जब कोई गाड़ी मिलेगी तब अपने घर जाएंगे. मैंने घर पर फोन किया और कहा कि मैं कल सुबह आऊँगी, अभी कोई गाड़ी नहीं मिल रही है.

मेरे घर वाले मुझ पर यकीन करते थे सो उन्होंने भी मुझसे कुछ नहीं कहा. मैंने उनसे कह दिया कि हो सकता है कि मैं सुबह यहीं से कॉलेज चली जाऊं, मेरे साथ मेरी दो सहेलियां भी हैं.

घर से परमीशन मिलते ही मैं और अधिक सहज हो गई. अब मुझे अपने इस दोस्त के कमरे पर रुकने में कोई चिंता या डर नहीं था. हम लोग उसके कमरे पर आ गए. उसका कमरा काफी छोटा था व दो छोटे छोटे बेड थे.

विशाल ने दोनों बेड को जोड़ दिया और कहा- हमें इसी में एडजस्ट करके सोना होगा.

विशाल का एक रूममेट भी था. हम सब लोग जैसे तैसे सोए. मैं सबसे किनारे सोई थी, मेरे बगल में विशाल.. फिर मेरी दो सहेलियां और आखिर में उसका रूममेट था. मैंने सोचा बस एक रात की तो बात है, जैसे तैसे एडजस्ट कर लेते हैं. जगह कम होने की वजह से विशाल बार बार अपना पैर मेरे पैरों पे रख देता था. मैंने कई बार हटाया, बाद में तंग आकर मैंने उसके पैर को हटाना छोड़ दिया.

कम जगह होने के कारण उसका मुँह मेरे बांये बोबे में घुस रहा था. जैसे तैसे मैं सोई.

कुछ पल बाद मैंने महसूस किया कि मेरी जाँघों पर कुछ हिल रहा है. मैंने देखा तो विशाल अपना हाथ मेरी जाँघों पे फेर रहा था और उसका दूसरा हाथ मेरे बोबे पे था.
मैंने उससे पूछा- ये क्या कर रहे हो?
उसने फुसफुसा कर कहा- तुम्हें प्यार कर रहा हूँ.

मुझे एक पल के लिए तो लगा कि ये ऊपर ही ऊपर से कुछ करेगा.. बस मजा आएगा. मैंने भी आज उसके साथ मजा लेने का मन बना लिया. जवानी का दरिया उफान रहा था. हम दोनों आग और भूसा की तरह वासना की आंधी में बहने लगे.

वो जैसे जैसे मेरी जाँघों पे अपना हाथ फेर रहा था, वैसे मेरी शरीर में अजीब सी अकड़न होने लगी. मैंने भी उसे अपने आप से चिपका लिया और उसके किस का जबाव अपने चुम्बनों से देने लगी. उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा दी तो मैं एकदम से बहक गई और मैंने भी उसकी जीभ को अपनी जीभ से चूसना शुरू कर दिया.

हम दोनों में चुदास बढ़ गई थी. अब वो सीधा मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे किस करने लगा. उसका लंड तन चुका था, जिसका दवाब मैं अपने शरीर पे महसूस कर रही थी. उसने मेरे बोबे दबाने शुरू कर दिए. मैंने बगल में देखा कि मुझे कोई देख तो नहीं रहा. सब सोए हुए थे, तो मैंने भी उसके हाथों को अपने जिस्म से खेलने दिया. मुझे भी मजा आने लगा था.

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