मुझे याद है वो पहली चूत चुदाई

मेरे सहयोग से विशाल की हिम्मत और बढ़ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और किस करते हुए मुझे मसलने लगा.

इसके बाद उसने धीरे से मेरी पीठ पे हाथ रख कर मेरी वन पीस की चैन को खोल दिया. फिर उसने मेरी ब्रा के हुक को खोला और मेरी ब्रा को निकाल दिया. मैं आधी नंगी हो चुकी थी. पहली बार किसी लड़के ने मेरे बोबे देखे थे. वो उन्हें चूसने लगा.

अब मुझे भी मजा आने लगा तो मैंने खुद को ढीला छोड़ दिया. थोड़ी देर बाद उसने मेरे वन पीस को ऊपर की तरफ खींच कर खोल दिया. मैं अब पेंटी में थी. इसके बाद उसने भी अपने कपड़े उतारे और धीरे से मेरी पैंटी को खिसका दिया. इतना सब होने से मेरी फुद्दी गीली हो गई थी, जिसे वो चाटने लगा. उसके चुत चाटने से मुझे अजीब सी सिहरन हो रही थी, मैं भी उसकी जीभ से अपने आपको पूरा चुसवा देना चाहती थी.

मैं इस वक्त भूल चुकी थी कि शुरुआत मैं मैंने उसके साथ ये सब ऊपर ऊपर से ही मजा करने की सोची थी. बस वासना का ऐसा तूफ़ान चल रहा था कि मैं बहकती चली गई. वो बड़ी तन्मयता से मेरी फुद्दी को चाट रहा था.

मुझे अपनी चुत में चींटियां सी रेंगती सी महसूस हो रही थीं. मैं विशाल के सर को अपनी चुत में अपने हाथों से दबाए जा रही थी. कुछ ही देर बाद मेरी फुद्दी ने पानी छोड़ दिया. मैं एकदम से खाली हो गई और मुझे लगा कि पता नहीं मेरा क्या कट गया है. आज तक मुझे ऐसा मजा नहीं मिला था. विशाल मेरी फुद्दी के झड़ जाने के बाद भी चूसता और चाटता रहा. इससे ये हुआ कि कुछ ही देर बाद मैं फिर से गरम हो गई.

अब उसने मेरी टांगें फैला दीं और मेरी चुत के ऊपर अपना लंड रख के चुत को सहलाने लगा. वो काफी देर तक अपने लंड को मेरी झांटों पे रगड़ता रहा. मैं तड़पने लगी, मैंने कहा- अब और नहीं जल्दी करो.

अब उसने अपने लंड पे थूक लगाया और एक झटके में अपना लंड मेरी फुद्दी में पेल दिया. मेरी फुद्दी चर्रर से फट गई.. मानो किसी ने गरम सरिये से दाग दिया हो. मेरी मुँह से जोर की चीख निकल गई. उस आह भरी चीख से सबकी नींद खुल गई और सब हमें चुदाई करते हुए देखने लगे.

मेरी आँख खुली की खुली रह गईं. सब हमें ऐसे देख कर चौंक गए थे. मैं इस वक्त बेबस थी, मेरी चूत में लंड घुसा हुआ था और हम दोनों एकदम नंगे होकर चुदाई का खेल खेल रहे थे. एक तरफ तो चुत लंड की वासना के कारण हम दोनों अलग नहीं होना चाहते थे, दूसरी तरफ अपने साथियों के सामने खुद को लज्जित सा महसूस कर रहे थे. अजीब सा मंजर था.

मैंने कहा कि प्लीज़ ये सब किसी को मत बताना.
इस पर विशाल के दोस्त ने कहा- मुझे भी करने दोगी, तो नहीं बताऊँगा.
मेरे पास कोई चारा नहीं था.. मैंने हां कर दी.

अब विशाल धीरे धीरे मेरी फुद्दी चोदने लगा और वे तीनों हमें देखने लगे. धीरे धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और मैं और तेज और तेज बोलने लगी. विशाल ने रफ्तार को बढ़ा दिया.
मैंने मस्ती से गांड उचकाते हुए कहा- आह फाड़ दो मेरी फुद्दी को.. बहुत मजा आ रहा है.

अब तक उन तीनों ने भी कपड़े खोल लिए और विशाल का दोस्त मेरी दोनों सहलियों की फुद्दी चाटने लगा. इधर विशाल मुझे चोद रहा था, साथ ही मेरे बोबे दबा रहा था.

तभी मैंने सुना कि एक और लड़की के कराहने की आवाज आ रही है. पलट कर देखा कि उसके दोस्त ने मेरी एक सहेली की फुद्दी भी फाड़ दी.

अब विशाल मुझे काफी तेज झटके देने लगा और कुछ ही देर में उसके लंड ने अपना पानी मेरी फुद्दी में छोड़ दिया.

फिर विशाल ने मेरी फुद्दी से अपना लंड निकाला और मेरी तीसरी सहली की फुद्दी को भी फाड़ दिया. इधर उसका दोस्त मेरी सहेली के फुद्दी में झड़ गया और फिर वो मेरे पास आ गया.

उसने भी मेरी फुद्दी बेरहमी से चोदी और करीब 15 मिनट बाद मेरी फुद्दी में अपना मुठ छोड़ दिया. उधर विशाल का भी काम हो चुका था.

अब हम लोग वैसे ही नंगे सो गए. सुबह जब आँख खुली तो दोपहर के एक बज गए थे. हम सभी ने कपड़े पहने और अपने अपने घर चल दिए. कुछ महीनों बाद हम तीनों प्रेगनेंट हो गई थे, जिसका हमारे घर वालों को पता चला. जिसके चलते बाद में बारी बारी से हम तीनों की सारी आजादियां खत्म हो गईं और हम तीनों की एक एक करके शादी हो गई.
तो ये थी कहानी मेरी सहेली की!

मेरी शादी के बाद क्या हुआ ये तो आपको मैंने लिखा ही था. मेरी इस वासना की नदी में किस किस ने डुबकी लगाई, ये सब मैं आपको लिखती रहूंगी. बस आपके प्यार भरे मेल मिलते रहने चाहिए. प्लीज़ मुझसे कुछ पाने की इच्छा न करें.

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