मोहसिन के परिवार की कहानी

Antarvasna हेल्लो दोस्तो, ये कहानी एक परिवार की मस्त कहानी है। उम्मीद है आप पसंद करेंगे।
मोहसीन आज 17 साल का हो गया था और वो अपने दोस्तों के साथ जन्मदिन की पार्टी करने जा रहा था. उसके कुछ दोस्त तो अपनी गर्लफ्रेंड को भी पार्टी पर ला रहे थे. जब वो तैयार हो रहा था
तो उसकी ज़ैनब दीदी भी पार्टी में जाने की ज़िद करने लगी. ज़ैनब अपने भाई से 3साल बड़ी थी. मोहसीन जानता था की उसके दोस्त उसकी दीदी को पटाखा कह कर मज़े लेते हैं. ज़ैनब थी ही इतनी सेक्सी. 5फीट 3 इंच का कद, गोरी जैसे कोई अँग्रेज़ लड़की हो, भूरी आँखें, गोल चेहरा, भरा हुआ जिस्म, गठीली जांगे, मस्त चूची, सपाट पेट, नुकीले निप्पल, मस्त होंठ और सब से ज्यादा उसके मस्त कूल्हे।

मोहसीन जब अपनी दीदी को चलते देखता तो उसका दिल बेईमान होने लगता. ज़ैनब के मटकते कूल्हे उसके दिल पर वार करते और वो सिसकी लेकर रह जाता. ज़ैनब घर में तो स्कर्ट पहन कर घूमती और बाहर जीन्स पहनती जिस के ऊपर वो टाइट से टाइट बिना कॉलर वाली टी-शर्ट पहनती थी. जब उसकी चुचि ऊपर नीचे होती तो उसका भाई मोहसीन तो एक तरफ उसका अब्बू (पापा) भी बस देखता ही रह जाता. अब्बू की उम्र 50 के करीब थी लेकिन उसका लंड बैठने का नाम ना लेता और वो अफ़सोस करने लगता की ज़ैनब जैसी मस्त लड़की को चोदना किसी गैर मर्द की किस्मत में है. “काश मैं अपनी बेटी को चोद सकता” एक बाप अपनी ही बेटी की चूत में लंड डालने के लिए तरस जाता तो मोहसीन तो उसका भाई था. मोहसीन 6 फुट का मर्द था और उसका 8 इंच का लंड अभी कुँवारा था जो बस अपने ही घर की औरतों को देख मन माँर कर रह जाता था।
“ज़ैनब बिल्कुल अपनी माँ की तरह दिखती है” अब्बू अपने आप से कहता था. ज़ैनब की अम्मी 43 साल की मस्त चुदकर औरत है. रिश्ते में अब्बू के चाचा की लड़की थी और निकाह से पहले अब्बू को भाईजान कह कर पुकारती रही थी. अब्बू जानता था की उसके चाचा की लड़की बहुत चालू है और उसके कई दोस्त उसको चोद भी चुके थे, लेकिन उसने अपने चाचा की लड़की से निकाह कर लिया. इसका कारण नंबर एक, अम्मी एक बहुत गर्म सेक्स बम थी. दूसरा कारण अपने घर का इतना बढ़िया माल किसी और को चोदने के लिए देना पाप था. आख़िर चाचा की लड़की पर सब से पहला हक अब्बू का था. तीसरा कारण, उसका चाचा बहुत अमिर था और आयेश (अम्मी) एकलोती लड़की थी. आज भी आयेश एक से संतुष्ट नही होने वाली सेक्सी औरत थी जिसको हर वक्त लंड चाहिए है. अब्बू और आयेश खुले विचारों वाले हैं और उनमें कोई पर्दा नहीं है.
खैर जब ज़ैनब ने पार्टी पर जाने की ज़िद की तो मोहसीन उसको ना नहीं कह सका. लेकिन उसको यह डर ज़रूर था की दीदी के सामने शराब नहीं पी सकेंगे उसके दोस्त. ‘दीदी, आप पार्टी में क्या करेंगी? मेरे दोस्त मौज करना चाहते हैं और वो आपके सामने शरमा जाएँगे… आप मुझे अकेले जाने दो ना…” मोहसीन ने आख़िरी तीर मारते हुए कहा. ज़ैनब ने शीशे में देखते हुए कहा, ‘मेरे भाई, मैं तुम लोगों को खा नहीं जाऊँगी… तुम जो चाहे करना… मुझे कोई एतराज़ नहीं है… क्या तुम बियर पीना चाहते हो? तो पी लेना… कहीं लड़कियाँ तो नहीं बुला रखी? मैं जानती हूँ तुम जवान हो चुके हो… मज़े करना… आज अपनी दीदी के सामने ही मज़े लूट लेना..” कहते हुए ज़ैनब ने मोहसीन के गले में बाहें डाल दी और उसकी आँखों में देखने लगी. ज़ैनब का उन्नत सीना मोहसीन की छाती से टकराने लगा और मोहसीन की पेन्ट में तंबू बन गया. एक मादक सुगंध भाई के नाक में समा गयी. उसका मन था की अपनी दीदी के कूल्हे कस कर थाम ले लेकिन समाज और दुनिया के रिश्तों को याद करके रुक गया. लेकिन मोहसीन का लंड मान नहीं रहा था. उसने अपने लंड को पकड़ कर मसल दिया ताकी वो बैठ जाए लेकिन लंड था की मान ना रहा था. ” भाई अभी से इतना उत्तेज़ित होने की ज़रूरत नहीं है, पार्टी में अभी वक्त है और मैं तेरी गर्लफ्रेंड नहीं बहन हूँ… मोहसीन सकपका गया और जल्दी से अपनी दीदी से अलग हो गया. लेकिन एक ही पल में उसके शैतान दिमाग़ ने अपनी दीदी को नग्न रूप मे कल्पना में देख लिया।
शाम को 6 बजे ज़ैनब ने अपने नौकर रामू के कमरे का दरवाजा खटखटाया. रामू छोटी जात का एक बेहद काला युवक था. वो ड्राइवर का काम भी करता था. वो एक कमरे में रहता था और माला, नौकरानी भी उसके साथ वाले कमरे में रहती थी. रामू कोई 30साल का हट्टा खट्टा मर्द था और माला कोई 26साल की गोरी चिट्टी औरत थी. रामू देखने में बहुत सेक्सी था. ज़ैनब की आदत थी की जब किसी के घर जाती तो पहले ताक झाक करने की कोशिश करती. आज भी उसने पहले दरवाज़े के छेद से झाका. अंदर रामू सोफे पर लेटा था और माला पूरी नंगी होकर उसका लंड चूस रही थी और रामू उसके चेहरे पर हल्की हल्की छपत लगा रहा था.” ओह…वाहह….यार क्या लंड चूसती हो तुम…..कहा से ट्रैनिंग ली थी लंड चूसने की….आआहह साली….बस कर ,…मैं झर जाउंगा….रुक जा रानी…आज रात बहुत मज़े लूटने हैं हमको….उनके साथ….” तभी ज़ैनब ने खट खटाया. रामू झट से उठ गया और माला हडबड़ा उठी. ‘अभी कौन आ गया बहनचोद!!!” वो बोला और पजामा पहनने लग गया।
माला ने भी झट से एक कुर्ता पहन लिया. दरवाज़ा खोला तो ज़ैनब को पाया. रामू की वासना भरी नज़र अपने मालिक की बेटी के सीने पर गयी.” ओह भगवान…..काश ज़ैनब जैसा माल चोदने को मिल जाए!!! एसी मख्खन जैसी चूत का भुर्ता बना दूँ !!!” उसके मन से यह प्रार्थना निकली.” छोटी मालकिन…आप? क्या बात है?” ज़ैनब ने एक नज़र रामू के लंड पर डाली और बोली,’ मैने और मोहसीन ने पार्टी पर जाना है… तुम हमको वहा छोड़ दो… वापिस हमको मोहसीन का कोई दोस्त छोड़ देगा… क्या तुम कुछ कर रहे थे?” रामू बोला,’ हां..नहीं..कुछ नहीं कर रहा था….मैं छोड़ आता हूँ..” ज़ैनब ने माला को देखा तो हंस कर बोली,’ कोई बात नहीं…अगर कोई काम कर रहे थे तो पहले वो ख़त्म कर लो..‘ कहते हुए ज़ैनब हँसती हुई चली गयी।

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