मेरी पत्नी ने चुत से क़र्ज़ चुकाया

मैं दौड़ कर उसके पास गया और उसे बाँहों में भर लिया. वो रोने लगी।
मैंने उसे बिलकुल नहीं डांटा और हम रूम में चले गए।

मैंने उसे खाने को पूछा और किचन में जाकर कुछ फटफट नूडल बना लिए।
फिर हम सोने को हुए।
मैंने उसके सिर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसका रोना बंद हो गया था।

मैंने उसे ह्ल्के से कहा- रीना, अगर मन में कोई बात है, तो उसे फ़ौरन बता दो। मैं पति हूँ तुम्हारा अब मुझसे भी छुपाओगी?
रीना- शुरू शुरू में ऑफिस में सब कुछ ठीक चल रहा था दो महीने तक … फिर बॉस की मुझ में कुछ ज्यादा दिलचस्पी होने लगी, वो मुझे खूब काम देते और तारीफ भी करते, मुझे तो बहुत अच्छा लगने लगा कि मेरी जल्दी तरक्की होगी।

मैं- हाँ …तो फिर क्या हुआ ऐसा?
रीना- धीरे धीरे मुझे सहकर्मियों से उनके बारे में काफी कुछ पता लगने लगा.
मैं- अच्छा थोड़ा थोड़ा समझ में आ रहा है.

रीना- फिर एक दिन उन्होंने कंपनी की कोई डील बताई और मुझे साथ में शिमला चलने को कहा. मैंने काफी मना भी किया. फिर उन्होंने मुझे इशारों में कहा की यह डील जरूरी है, नहीं तो आपका यह नौकरी का आखिरी महीना हो सकता है.
विक्रम- फिर तुम चली गयी? इतनी बड़ी बात मुझे बतानी नहीं समझी?
रीना- मुझे कुछ समझ नहीं आया, क्या करूँ … या ना करूँ! मैंने पता नहीं क्यों हाँ बोल दिया और चली भी गयी.

विक्रम ठण्डे मन से- अच्छा फिर क्या हुआ?
रीना ने पूरी बात बतायी:

हम लोग शिमला पहुंच गए और वाकई में वहां ऑफिस का कोई काम था. मुझे खुद पे पछतावा हुआ कि मैंने बेकार ही बॉस पे शक किया और मुझे भरोसा करना चाहिए था।
दूसरे दिन फिर हम लोग होटल में अपने-अपने रूम में थे तभी बॉस का मैसेज आया- डिनर करते हैं साथ में!
तो मैंने हां कर दी।

मैं एक दम सज धज के काली जीन्स और लाल कुर्ती में नीचे गयी। मैंने मंगलसूत्र भी पहना हुआ था, सिंदूर, लाल लिपस्टिक और शृंगार भी किया था।
बॉस- क्या बात है मैडम, आप तो पूरी क़यामत लग रही हो!
रीना- सर, आप कुछ भी बोलते हैं। रोज के जैसे ही तो है.
बॉस- अरे हम झूठी तारीफ भी मुफ्त में नहीं करते हैं, पूरा दाम वसूल लेते हैं.
रीना- क्या मतलब? मैं समझी नहीं!

बॉस- अरे बाबा! छोड़ो ना … बताओ कैसा लग रहा है? शिमला पहले कभी आयी हो पति के साथ?
रीना- कहाँ सर … इनका तो शॉप है कंप्यूटर की … आजकल पूरा वक़्त उसी में दे देते हैं.
बॉस ठंडी आह भरते हुए- हाँ समझ सकता हूँ, तो क्या पियोगी आप?
रीना- माफ़ करियेगा सर, मैं दारु नहीं पीती.
बॉस- ओह रीना … अब ऐसे ना बोलो. एक तो इतनी मुश्किल से तुम हाँ बोलकर शिमला आयी हो और फिर वाइन को दारू बोल रही हो। शो सम क्लास डार्लिंग!

मैं- ओके, आगे क्या हुआ?

रीना- पता नहीं, वो माहौल वो जगह मैं खुद को रोक ना सकी और मैंने पीना शुरू कर दिया.
बॉस- देखा, कुछ तो नहीं होता। आप लोग ऐसे ही डरते हो।
रीना- फिर मुझे याद है हमने कुछ खाना खाया फिर मेरे रूम में बॉस छोड़ने गए.

मैं धीरे से- आगे?

रीना- बॉस ने मुझे रूम में ले जाते ही बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर आ गए.
विक्रम को मन ही मन गुस्सा आ रहा था पर साथ में उत्तेजना भी होने लगी थी- फिर आगे क्या हुआ, बताओ मुझे पूरा एक-एक शब्द नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं!

रीना डरते हुए- फिर वे मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगे, पता नहीं मैंने विरोध क्यों नहीं किया, उल्टा साथ देने लगी, मुझे उनका स्पर्श अच्छा लगने लगा। वो अपने हाथों से मेरे बूब्स ऊपर से दबाने लगे और फिर अंदर मेरी कुर्ती में हाथ डाल कर पूरा जिस्म सहलाने लगे.

रीना ने मेरी आँखों में वासना का अनुभव किया फिर इतराते हुए बोली- उन्होंने मेरी कुर्ती उतार दी, मैं गुलाबी ब्रा में थी। वो पागलों जैसे मेरे बूब्स दबाने लगे, फिर मेरी ब्रा खोल दी और मेरे बूब्स चूसने लगे, मेरे निप्पलों को हल्के हल्के चाटने लगे और बीच-बीच में काटने भी लगे.
मुझे बहुत तेज़ उत्तेजना होने लगी. फिर मेरी उन्होंने मेरी जीन्स उतार दी और पैंटी के ऊपर से मेरी चुत सहलाने लगे। एक झटके में उन्होंने मेरी पेंटी उतार दी और अपनी जीभ मेरी चुत पे लगा दी.

इतने में मैंने अपना एक हाथ रीना के बूब्स पे रखा और कहा- फिर आगे क्या हुआ?

रीना- मैंने तो जैसे अपने आप को उनको पूरा सौंप दिया था। इतने दिनों बाद पुरुष के स्पर्श और उस वाइन ने मुझे मदहोश कर डाला था। मैं पूरी नंगी थी। बदन पे सिर्फ मेरा मंगलसूत्र था और कुछ नहीं।
इतने में वो 69 की अवस्था में आ गए। अब उनके लण्ड का सुपारा मेरे होंठों पे लगने लगा और वो मेरी चुत को चाटे जा रहे थे। मुझ में हवस सवार हो गयी और मैंने वो लण्ड का बड़ा सुपारा अपने मुँह में ले लिया।

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