मालिश वाले अंकल के लंड से चुदाई

वो तो मुझे इस रूप में देखता ही रह गया. वो लंड सहलाते हुए बोला- हां ये ठीक है मैडम.

मैंने बेड पर एक चादर बिछाई और लेट गयी. उसने तेल की बोतल लेकर थोड़ा सा तेल मेरे पेट पर गिराया. मेरी तो चुदास के मारे आंखें ही बंद हो गयी थीं.

पेट से तेल बहता हुआ मेरी नाभि में भर गया. वो तेल से वो मेरे पेट पर मालिश करने लगा. उसके हाथ मेरे मक्खन जैसे पेट पर फिसल रहे थे. उसके मदमस्त स्पर्श से मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी.

तभी उसने एक उंगली मेरी नाभि में डाल दी और भरा हुआ तेल बाहर निकाला.

मैंने अन्तर्वासना की एक कहानी में पढ़ा था कि नाभि में जब मर्द उंगली डालता है, तो उसका इशारा चुदाई का होता है. उसकी चाहत को मैं समझ गई थी. मुझसे तो खुद अपनी आहें संभालना मुश्किल हो रही थीं.

तभी उसने तेल अपने हाथों में लिया और मेरी चिकनी टांगों पर लगाने लगा. वो मेरी पिंडलियों से शुरू हुआ और मेरे पेटीकोट को हल्के हल्के ऊपर करने लगा. घुटने के नीचे की टांगों से होता हुआ, वो मेरी जांघों तक आ गया. मेरा पेटीकोट मेरी चूत के इर्द गिर्द सिमट गया था. मैंने पैंटी पहनी ही नहीं थी.

मेरी चूत तो पानी पानी हो रही थी.
तभी अंकल ने बोला- मैडम आप पेट के बल लेट जाओ ताकि मैं पीछे टांगों की मालिश कर दूँ.

मैं पेट के बल लेट गयी और उसने मेरा पेटीकोट मेरी गांड तक कर दिया था. उसके हाथ मेरी जांघों पर पकड़ बना रहे थे. मैं उसके मादक मर्दाना स्पर्श से एक अलग ही दुनिया में खोने लगी थी. उसका हाथ जांघों से होता हुआ मेरी गांड पर छू रहा था. इससे वो समझ गया था कि मैंने पेंटी नहीं पहनी है.

तभी वो कमर की मालिश करने लगा उसका लंड पूरा टाइट हो चुका था, जो मालिश करते हुए मेरी कमर पर लग रहा था.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मैंने कहा- अंकल थोड़ा ऊपर की मालिश भी कर दो.

वो ऊपर पीठ की मालिश करने लगा. मुझे लगा वो मेरी ब्रा खोलने को बोलेगा मगर उसने ऐसा नहीं किया.

मैंने खुद अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और कहा अब ढंग से और आराम से मालिश करो.

वो मेरी पीठ की मालिश करने लगा. मुझे लगा ये बहुत पक्का हरामी खिलाड़ी है. मुझे ही पहल करनी पड़ेगी. तभी मैं एकदम से पलट गयी और मेरे चूचे खुली हुई ब्रा से बाहर आ गए.
वो मेरे मस्त मम्मों को देखता ही रह गया.
मैंने आँख मारते हुए कहा- अंकल, जरा इनकी भी मालिश कर दो.

उसने तेल को मेरे मम्मों के बीच में डाला और मेरे मम्मों को मालिश करने लगा. उसके हाथ मेरे मम्मों पर फिरते हुए मुझे बहुत अच्छे लग रहे थे. वो मेरे निप्पलों को पकड़ कर मालिश करने लगा. अब मुझसे रहा नहीं गया, तो मैंने उसका लंड पकड़ लिया.

मैंने कहा- तुम तो पक्के खिलाड़ी हो, मुझे लगा तुम पहल नहीं करोगे.
अंकल बोला- ये बात तो मैं शुरू से ही जानता था कि आज तुम जरूर कुछ करोगी क्योंकि तुम्हारे पति ने मुझे पहले ही कॉल करके बता दिया था. यहाँ तो मैं सिर्फ तुम्हें देखने आया था.

मैंने कहा- तो देर मत करो, अब मेरी चूत बहुत गीली हो रही है.
अंकल बोला- आज इसका सही से इलाज मैं ही करूँगा.

वो मेरे पैरों के आ पास गया और मेरा पेटीकोट ऊपर कर दिया. मेरी चिकनी बिना बालों की चूत देखकर वो मस्त ही गया. वो बोला- आज तो इसे अच्छे से फाड़ूंगा.
मैंने कहा- अब देर मत करो.

उसने अपने मुँह को मेरी चूत पर लगा दिया और मेरी चूत का सारा पानी चाट चाट कर साफ़ कर दिया. मैं तो जैसे जन्नत में आ गयी थी.

तभी अंकल बोला- एक ट्रिक दिखाऊं?
मैंने कहा- दिखाओ.

उसने 2 उंगलियां मेरी चूत में डालीं और हल्के हल्के उन्हें मोड़कर अन्दर घुमाने लगा. दो मिनट के अन्दर ही वो मेरे जी स्पॉट तक पहुंच गया. मैं ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पायी और मेरा पानी निकल गया. मेरे पानी से साथ थोड़ी सी मेरी सुसु भी निकल गई.

अंकल वो सारा रस चाट गया.

मैंने कहा- तुम सच में औरतों की कमजोर नस जानते हो.
अंकल बोला- मुझे ऐसे ही इस काम में 20 साल नहीं हो गए हैं.
मैंने कहा- तो अब तक कितनों को चोदा है?
अंकल ने बोला- इतनी औरतों को संतुष्ट किया है कि मुझे खुद भी याद भी नहीं है.

मैंने उसके मोटे लंड को पकड़ा, तो वो मेरे मुँह के पास आ गया. मैंने उसका लोअर नीचे कर कर दिया और उसका मोटा लंड मेरे आंखों से सामने आ गया था. उसका सुपारा किसी बड़े टमाटर जैसा था. मोटे फन वाला सुपारा देख कर मेरे तो मुँह में में पानी आ गया था. मैंने तुरंत उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगी. अंकल की भी आंखें बंद हो गईं. वो मेरा मुँह पकड़ कर धक्के मारने लगा. उसका लंड मेरे गले तक आ रहा था. मेरी आंखों से पानी आने लगा था. मेरे मुँह से ‘गुआक … गुआक …’ की आवाज आ रही थी.

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