कामवाली जवान लड़की की चुदाई

में आपने पढ़ा था कि कैसे मैंने अपनी चाची को चोदा. इस कहानी में मैं आपको बताऊँगा कि कैसे मैं चूतों के एक ऐसे भंडार में पहुंच गया, जहां मैं जब चाहूं, जैसे चाहूं चुदाई कर सकता था.
और हां, मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा कि मेरी पिछली कहानी और यह कहानी मेरी जिन्दगी की सच्ची घटनाएं हैं. आपको भले ही ये बनावटी लगें, पर ये सच्ची कहानी हैं. कहानी को मजेदार बनाने के लिए मैंने कुछ मसाला अपनी तरफ से जोड़ा है और नाम सारे काल्पनिक रखे हैं.

वैसे चूत चुदाई के मामले में मैं अपने आपको बहुत लकी मानता हूं क्योंकि मैं जहां भी रहता हूं, कहीं ना कहीं से चूत का जुगाड़ हो ही जाता है. एक समय तो ऐसा था कि 6 औरतें और 4 लड़कियां ऐसी थीं कि जिनकी चुदाई मैं जब चाहूं, तब कर सकता था. वो भी चुदाई के लिए हमेशा तैयार रहती थीं.

उन सबकी चुदाई के बारे में बाद में बताऊंगा, फिलहाल इस कहानी के बारे में बात करता हूं.

चाची की चुदाई के बाद मुझे चुदाई का ऐसा चस्का मुझे लग गया था कि अब चूत के बिना रहना मेरे लिए मुश्किल था. सन 2011 में मैंने इंटरमीडिएट पास किया. उसके बाद मेरे मम्मी पापा मुझे आगे की पढ़ाई के लिए किसी बड़े शहर के अच्छे कालेज में भेजना चाहते थे. पर मैं वहां नहीं जाना चाहता था क्योंकि बड़े शहर मेरे गांव से काफी दूर थे और वहां से मैं जल्दी घर नहीं आ सकता था. चूंकि अब मैं चूत के बिना रह नहीं सकता था और चाची की चूत के अलावा मेरे पास लंड को शांत करने का और कोई उपाय नहीं था.

तो मैं अपने घर से 35 किमी दूर एक छोटे से शहर में रहने को राजी हुआ ताकि मैं हर शनिवार को घर आ जाऊं और चाची की चुदाई करके वापस चला जाऊं. पर मुझे क्या पता था कि जहां मैं जा रहा हूं, वहां एक से बढ़ कर एक चूत मिलेंगी.

मैंने एक कालेज में एडमीशन लिया और वहीं किराए का कमरा लेकर रहने लगा. जहां मैं रहता था, वो 2 मंजिल का मकान था. इस मकान में नीचे कई कमरे थे, जिनमें से एक में सिर्फ मैं ही रहता था. दूसरी मंजिल पर मकान मालिक रहता था.

मेरा मकान मालिक राजनीतिक आदमी था, तो वो दिन भर घर से बाहर ही रहता था. मेरे कालेज की छुट्टी 12 बजे हो जाती थी. इस तरह घर में ज्यादातर सिर्फ चार ही लोग रहते थे. नीचे की मंजिल में मैं अकेला और ऊपर मकान मालकिन, उनकी भतीजी नेहा और उनकी कामवाली, जो कि लगभग 18-19 साल की थी. उसका नाम ऊषा था. मकान मालकिन का मायका थोड़ी ही दूर पर था, तो वो भी कभी कभी अपने मायके चली जाती थी.

उस मकान में मैं पूरे 3 साल तक रहा और मेरे अगल बगल के कमरों में कई भाभियां रहने के लिए आईं और गईं और लगभग सभी को मैंने चोदा. पर वो सब आगे बताउंगा.

जल्दी ही मैंने जिम जाना शुरू कर दिया ताकि शाम को दो घंटे जिम में कट जाएं. मेरा शरीर पहले से ही ठीक ठाक था. दो महीने जिम जाने के बाद और भी गठीला हो गया. बीच बीच में मैं घर जाकर चाची की चुदाई कर आता था, तो इसीलिए मेरा लंड ज्यादा उफान नहीं मार रहा था.

अब उस काम वाली ऊषा के बारे में बता दूं. वो लगभग 19 साल की हल्की सांवली छरहरे बदन वाली लड़की थी. शुरूआत में मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, पर आते जाते नजर पड़ ही जाती थी.

धीरे धीरे दो महीने गुजर गए. अब ऊषा मुझसे काफी बातें करने लगी थी. कभी कभी वो मुझे देखकर मुस्कुरा भी देती थी. मुझे लगा कि वो मुझे पसंद करती है. मैंने सोचा अगर ये पट जाए, तो चूत का जुगाड़ यहीं हो जाए … और ये कितना अच्छा रहेगा. यही सोच कर मैं भी उसे पटाने में लग गया और कामयाब भी रहा.

एक दिन हमेशा की तरह मकान मालिक और उनकी बीवी के जाने के बाद मैं और ऊषा घर में अकेले बचे. मैं नीचे की सीढ़ियों पर बैठा था. तभी ऊषा बालकनी में आयी. मैंने उसे फ्लाईंग किस दी, जिसका जवाब उसने फ्लाईंग किस से ही दिया. मैंने लंड पर हाथ फेर कर उसे नीचे आने का इशारा किया, तो वो थोड़ा रुकने का इशारा करके अन्दर चली गयी. मैं समझ गया कि ये भी चुदना चाहती है.

मैं झट से अन्दर गया, मैंने चड्डी उतार के सिर्फ कैप्री पहन ली और उसका इंतजार करने लगा. थोड़ी देर में वो मेरे कमरे में आ गयी तो मैंने उसे बिस्तर पर बिठाया और खुद उसके बगल में बैठ गया. थोड़ी देर तक मैं इधर उधर की बातें करता रहा. ऊषा काफी शरमा रही थी और मुझसे नजरें भी नहीं मिला रही थी.

फिर मैंने एक हाथ उसकी जांघों पे रखा और सहलाने लगा. धीरे धीरे वो गर्म होने लगी. फिर मैंने उसे बिस्तर पर ही लिटा दिया और उसके नाजुक मुलायम होंठों पे अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा. बस 5 मिनट तक किस करने के बाद मैंने सोचा जल्दी से चुदाई कर ली जाए क्योंकि मकान मालकिन कभी भी उसे बुला सकती थी.

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