गलतफहमी में चुदाई का मजा

तब मैं बोला- यहाँ घर के पिछले भाग में कोई गेट है क्या बाहर भागने का?
वो बोलीं- हाँ है ना.
तो मैंने बोला- तो फिर ठीक है, अपुन चलते हैं.. आप अपनी देखो.

मैं उठकर उस गेट की तलाश में उठ गया. तब वो बोलीं- यहाँ से दाएँ मुड़ो गेट मिल जाएगा.

मैं दाएं मुड़ा और एक गेट खोलकर खुले वातावरण में आ गया, लेकिन ये तो पार्किंग थी, जिसका बाहर निकलने का रास्ता बाहर से बंद था.

तब मैं वापिस लौटा और उनके बेडरूम में आ गया, वहां वो अकेली बैठीं कुछ सोच रहीं थीं.

मुझसे बोलीं- तुम दाएं की जगह बाएं मुड़ गए थे.
मैं बोला- लेकिन मैं तो दाएं ही मुड़ा था.
वो बोलीं- तुम अपने दाएं मुड़े थे, मेरे नहीं.

फिर मैं वापिस गया और उनके बताए अनुसार मुड़ा और एक कमरे में पहुँच कर मुझे गेट मिला, जो कि बाहर से बंद था.

मैं जब वापिस लौटा तो उन्होंने मुझे पास बुलाया और अपने कमरे में धक्का देकर जमीन पर पटक दिया और जल्दी से गेट लगाकर रोमांटिक एक्शन पोज में पैर फैलाकर खड़ी हो गईं.
तब मैं उठा और बोला- क्या है यार.. क्या चाहिए आपको?
वो बोलीं- कहा ना… प्यार चाहिए.
तब मैं बोला- और किसी से ले लो ना.
वो बोलीं- तुम क्यों नहीं?

अब वो अपना ब्लाउज खोलने लगीं, खोलने क्या लगीं, खोल ही दिया और ब्रा समेत उतारकर नीचे फेंक दिया.
अब ऊपर से मम्मे हिलाते हुए बोलीं- अब क्या बोलोगे?

मैंने उनके उन भारी भारी बड़े बड़े मम्मों को देखा और उनकी जवानी पर एक अलग नजरिए से ध्यान दिया तो मेरा मूड एकदम बदल गया. मेरा लंड पेंट में तंबू की तरह खड़ा हो गया और मुँह से पैरों तक लार टपकने लगी.
ये देख कर वो हंसने लगीं.

मैं उनके पास गया और बोला- अगर ऐसा पहले बताया होता.. तो कुछ अलग बात होती. उनके एकदम पास जाकर उनकी चोटी को अपने एक हाथ से पकड़कर उनके होंठों पर अपने होंठों को रखकर किस करने लगा और दूसरे हाथ से उनके शरीर को सहलाने लगा.

तब तक उन्होंने मेरी पैन्ट खोली और अपनी साड़ी उतार कर मुझे बेड पर धक्का देकर पटक दिया. खुद घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को अपने हाथों से सहलाने लगीं. इसी के साथ साथ अपने होंठों से मेरे लंड पर किस करने लगीं और लंड के आगे वाले भाग को अपने मुँह में लेकर अपनी जीभ से स्पर्श करते हुए चूसने लगीं.

उनका अंदाज इतना सही था कि मुझसे रहा नहीं गया और मेरे लंड से एक डेढ़ मिनट में ही ज्वालामुखी फूट पड़ा.
तब वो बोलीं- बस इतना ही? तभी तुम भाग रहे थे?

तो उनकी इस बात पर मुझे हल्का सा गुस्सा भी आया और मैंने उन्हें बेड पर लिटाकर पहले उनके मम्मों से जी भर के खेला, फिर नाभि के रास्ते उनके गदराए हुए बदन को चूमते हुए उनकी मखमली योनि तक आ पहुंचा, जहाँ एक भी बाल नहीं था. पहले तो मैंने उनकी योनि को अपनी हथेली से रगड़ा और फिर दो उंगलियों को योनि की गहराई में उतारकर अन्दर बाहर करने के साथ साथ अपनी जीभ से योनि के ऊपरी उभरे भाग को छेड़ने और चूसने लगा.

मैं काफी देर तक चुत में लगा रहा. वो भी अपनी टांगें फैला कर कराहें लेने में मस्त थीं. वे अपने हाथों से अपने चूचों को भींच और मींज रही थीं. ऐसा करते करते उन्होंने भी अपनी चूत का लावा गिरा दिया.

जैसे ही वो स्खलित हुईं, मैंने अपना लंड तैयार किया और उनकी रस छोड़ती हुई योनि में लगभग तीन इंच तक घुसा दिया, जिससे वो एकदम फड़फड़ा उठीं, वो कराहते हुए बोलीं- अबे भोसड़ी के, मादरचोद.. थोड़ा तैयार तो होने देता.
तो मैं बोला- मेरा तो तैयार था ना.

बस ये कहते हुए मैंने अगले धक्के में पूरा लंड अन्दर कर दिया.
तब वो चिल्लाते हुए बोलीं- अरे मार डाला रे.. बोला था न.. तैयार होने दे.. लेकिन नहीं तुझे तो अपनी चलानी है. अब रुक थोड़ी देर वहीं..
तो मैं बोला- ना.. आप चाहे आंसू टपकाओ.. या फिर चीखो चिल्लाओ.. मैं ना मानूँगा.

बस मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए. मैं प्रत्येक धक्के को महसूस करके बड़ी नजाकत और सुकून में धीरे धीरे उन्हें पेलने लगा.

वो पहले तो विरोध करती रहीं, फिर कुछ पलों बाद ही उनकी योनि में फिर से जोश आने लगा और वो धीरे धीरे टाइट होने लगी. अब वे भी मेरा पूरा साथ देने लगीं और मैं भी पूरे जोश से पेलने लगा.

तभी जब मुझे लगा कि मैं छूटने वाला हूँ, तब तक अचानक उन्हें कुछ ध्यान आया और उन्होंने पास रखे एक टेबल पर से एक कप के नीचे से एक कॉन्डोम निकालकर मेरी ओर फेंकते हुए कहा- रुक तो साले.. पहले इसे तो पहन ले.
मैं बोला- अब नहीं.. मेरी रिदम टूट जाएगी.
वो बोलीं- कुछ भी हो.. ये बात तो तुम्हें माननी ही पड़ेगी.

मैंने लंड बाहर निकाला और जल्दी से कॉन्डोम पहन कर वापस चुदाई आरम्भ की, लेकिन इस बार वो बेड पर पैर फैलाने की जगह कुतिया बनकर मेरा लंड ले रही थीं.
काफी समय तक हम यूँ ही थकते थकाते हुए.. कभी मैं ऊपर, तो कभी वो.. रुक-रुक कर चुदाई में लगे रहे.

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