फैमिली सेक्स कहानी: चुदक्कड़ चाची

फिर उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोला- ‘चाची आज तो आप कयामत लग रही हो, कहीं जा रही हो क्या?
मैं- कहीं नहीं जा रही हूँ, बस थोड़ा तैयार हो ली। क्यों अच्छी नहीं दिख रही हूँ क्या?
देव- नहीं चाची, ऐसी बात नहीं हैं। मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा हूँ। लेकिन कुछ भी हो आप आज बहुत खूबसूरत दिख रही हो। लेकिन हमारी किस्मत में कहाँ ऐसी खूबसूरती!
मैं- ऐसी बात नहीं है, तुम भी अपने चाचा के ही भतीजे हो। तुम्हारा भी उतना हक़ है मुझ पर जितना तुम्हारे चाचा का। अच्छा यह बताओ पहले पानी पियोगे या खाना खाओगे?

देव- चाची, सबसे पहले पानी पिलाओ, फिर बाद में खाना खाऊंगा।

मैंने कहा- ठीक है, अभी लाती हूँ।
अब मैं अपनी चुतड़ों को कुछ ज़्यादा ही हिलाती हुई रसोई की तरफ गई। फिर मैंने सोचा कि आज तो इसका लंड लेकर रहूँगी।

मैं उसको पानी देने के बहाने थोड़ी झुकी और अपना पल्लू गिरा दिया। अब मेरे 80% चुचे उसे दिखाई दे रहे थे। उसके लंड में भी उभार आ गया था। वह मेरे चुचियों को घूर रहा था। मैंने अपना पल्लू उठाते वक़्त कहा- देखोगे या पियोगे भी?
हड़बड़ी में उसने जवाब दिया- क्या चाची?
मैं- पानी और क्या देव!!

देव- चाची तुम भी पी लो, देखो मत।
मैं- क्या?
आँख मारते हुए उसने जवाब दिया- पानी और क्या?
मैं- लेकिन मेरा गलास किधर है?
देव- मेरा पानी पियोगी?
मैं होंठ दबाते हुए- क्या मतलब तुम्हारा??
देव- कुछ नहीं।
फिर वह हँसने लगा।

शायद वह चाहता था कि शुरुआत मैं करू इसी लिए कुछ करने से हिचक रहा था।

फिर मैं जा कर उसके बगल में बैठ गई, उसके लंड को पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी।
देव- चाची, यह क्या कर रही हो?
मैं- अब ज़्यादा नाटक मत करो। देव प्लीज, मेरी प्यास बुझा दो। शादी के दिन से ही प्यासी है मेरी चुत। अपने लंड से इसे शांत कर दो।

अब वह मेरे बूब्स को सहलाते हुए बोला- हाँ साली … क्यों नहीं, मुझे पता था वह मेरा नालायक चाचा तेरी प्यास नहीं मिटा पायेगा। तू तो मेरे लंड के लिए बनी है। तू एक नंबर की चुदक्कड़ है, तेरी चुत को चोद के भोसड़ा बना दूंगा।
मैं- हाँ, मेरे लंडदेव मुझे आज चोद दो, बुझा दो मेरी कामवासना। मुझे अपनी रखैल बना लो। मैं तुम्हारी होना चाहती हूँ।
देव- मेरी रंडी चाची … तेरी चुचियों को सबसे पहले पेलूँगा मेरी जान।

अब हम दोनों एक दूसरे की जीभ मुँह में डाल कर चूस रहे थे। कभी वह मेरे बूब्स को अपने मज़बूत हाथों से दबा देता। मैंने उसके लंड को अब और तेज़ी से सहलाना शुरू किया। फिर वह उठा और मुझे बेडरूम में ले गया।

बेडरूम में ले जाते ही उसने सबसे पहले मेरी साड़ी को मेरे बदन से अलग किया, फिर मेरी चुचियों को उसने लो कट ब्लाउज से आज़ादी दिला दी। अब मेरी चुचियाँ आज़ाद थी।

देव- चाची, तुम्हारी चुचियों को आज मैं खा जाऊंगा, इसने मेरे लंड में आग लगा रखी थी। आज आपकी ये दूध की टंकियां मैं खाली कर दूँगा।
मैं- ऊऊ ऊऊऊह … मेरे लंडदेव मेरी चुचियों को पी जाओ। बहुत अच्छा चूस रहे हों। मैं बहुत प्यासी थी, आज तृप्त कर दो।
देव- हाँ, मेरी चुदक्कड़ चाची क्यों नहीं … तेरी रसीले चुचों को खाली करके ही मानूँगा।

मैं- हहह हहऊऊ ईई … ओह माय गॉड … फ़क्क मी … देव … चोदो मुझे। अब मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती।
देव- चाची थोड़ी देर रुको अभी मैंने कहा मज़ा लिया। अभी तो तुम्हारी चुत चाटनी बाकी है।
मैं- ओह्ह … देव तुम कितने बड़े चोदू हो।

देव- मेरी रंडी चाची, यक़ीन नहीं होता कि कपड़ों के अंदर इतना ज़बरदस्त ख़ज़ाना छुपाया है तूने, लगता नहीं कि तुम शादीशुदा हो।

मेरी फैली हुई चूत में देव ने उंगली घुसेड़ दी। मैं मदहोश हुई जा रही थी, मेरी गांड ऊपर को उठी जा रही थी।

अब दूसरे हाथ से वो मेरे वक्ष को मसलने लगा. मेरी चूत और छाती एक साथ मर्द के हाथों का मजा ले रही थी। मैं अपनी टाँगें फैलाए अपने भतीजे के हाथों सेक्स का मजा ले रही थी.
देव कभी मेरी गाण्ड में भी उंगली फिरा देता था तो कभी चूत में उंगली डाल रहा था। मेरी चूत रस बहाने लगी, मेरी चूची सख्त होने लगी. मेरी चूत ने पानी छोड़ कर परमानन्द प्राप्त कर लिया.

देव का लंड पत्थर की तरह खड़ा था, वो डरावना लग रहा था. देव अब मेरे चूतड़ों को मसलने लगा।

अचानक देव ने अपने लब मेरे लबों पर रख दिए और चूमने लगा। उसके होंठ मुझे मीठे से लग रहे थे, मैं उसके होठों को संतरे की फांक समझ कर चूसने लगी।
मैंने अपने भतीजे के लबों को चूसते हुए ही उसके लंड को अपने हाथ में ले लिया। देव एक हाथ से मेरे बोबे दबाता, दूसरे से मेरी चूत पर उंगली घुमा रहा था.

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