दोस्त के पापा ने प्यार से चोदा

नमस्कार मित्रों मै साक्षी आज आपके सामने अपने जीवन के सच्चे प्यार की कहानी रखने जा रही हूं। उम्मीद है, आपको यह कहानी पसंद आएगी। जैसा की आप सभी जानते है प्यार उम्र, रंग रूप नही देखता। कभी भी कहीं भी किसी के साथ भी प्यार हो सकता है। इस कहानी में पढिए, किस तरह से मुझे मेरे दोस्त के पापा से प्यार हुआ, फिर उनको यह पता चलने पर उन्होंने किस तरह से मेरे साथ सुहागरात मनाकर मेरी चुत खोल दी। आपका अधिक समय ना लेते हुए मै सीधे कहानी पर आती हूं।

यह कहानी आज से ठीक एक साल पहले शुरू होती है, कहानी शुरू करने से पहले मै आपको अपने बारे में बता देती हूं। मेरा नाम साक्षी है, मै ग्वालियर की रहने वाली हूं। मेरे माता-पिता दोनों ही नौकरी करते है, तो मेरे स्कूल के बाद मै पूरा दिन घर पर अकेली ही होती हूं। मेरा बदन अभी भरना शुरू हुआ है, अभी मेरे उरोज बडे दिखने लगे है, और गांड भी बाहर को निकलने लगी है। मेरा रंग गोरा है, और फिगर अब अच्छा बन रहा था। सब कहते थे, मेरी शक्ल आलिया भट्ट से मिलती जुलती है।
मेरे पडोस में मेरी एक दोस्त रहती थी, सानिया नाम था उसका। उसके पापा आर्मी रिटायर्ड ऑफिसर थे, और माँ बैंक में नौकरी करती थी। तो जब भी मै घर मे अकेली होती थी, तो उसके पास जाकर अपना मन बहला लेती थी। वो भी मेरी अच्छी दोस्त बन गई थी। अब हम दोनों रोज ही एक-दूसरे के घर आने जाने लगे थे। धीरे धीरे हमारे घरवाले भी हमे पहचानने लगे थे, और उनको भी हमारी दोस्ती अच्छी लगने लगी थी। सानिया के पापा मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, उनका शरीर तो बलिष्ठ था ही, लेकिन वो काफी ऊंचे भी थे।
मुझे पता ही नही चला कब मै उनकी तरफ इतना आकर्षित होने लगी थी, कि मै उनके प्यार में पड गई। अब अगर किसी दिन वो मुझे नही दिखते तो मै हैरान सी हो जाती थी, मेरा मन किसी भी काम मे नही लगता था।

एक दिन ऐसे ही मै शाम को सानिया के घर गई, तो सानिया अपनी माँ के साथ पहले से ही कहीं बाहर गई हुई थी। लेकिन उसके पापा उस समय घर पर ही थे, उन्होंने मुझे देखते ही हंसकर मेरा स्वागत किया। फिर घर के अंदर बुलाकर मुझे बैठने के लिए कहा। मै जाकर बैठ गई, उन्होंने कहा, “जल्द ही सानिया आ जायेगी, थोडी देर रुककर उससे मिलकर ही जाना।”
अब मै ऐसा सुनहरा मौका कैसे छोड सकती थी। तो मै भी उनकी बात मानते हुए वहीं बैठ गई। अंकल कुछ काम कर रहे थे, तो मै उनके पास जाकर उनके काम को देखने के बहाने उन्हें ताडने लगी। अंकल उस समय लुंगी और बनियान पहने हुए ही थे, तो उनका मजबूत शरीर मै आसानी से देख सकती थी। अंकल को देखते ही मेरे बदन में चींटियां रेंगने लगी थी। मैने मन मे एक बार सोच लिया कि, आज इनसे अपने मन की बात बोल ही देती हूं, क्योंकि इससे अच्छा मौका मुझे फिर कभी नही मिलने वाला था।
मै बडी हिम्मत करके उनके पास गई, और फिर धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा। वो अपने काम मे व्यस्त थे, तो उन्होंने मेरी तरफ ध्यान नही दिया। तो मैने ही बोलना शुरू कर दिया, “अंकल आप मुझे बहुत पसंद हो, और मै आपसे अनजाने में ही प्यार करने लगी हूं। मै जानती हूं कि, आप मेरे नही हो सकते, लेकिन क्या आप आपके जीवन के कुछ कीमती पल मेरे साथ बिताना पसंद करोगे?”
अंकल को शायद यह अजीब लगा, तो पहले तो वो मेरी तरफ देखकर हंसने लगे। तो मैने फिर से बोला, “अंकल मैने यह पूरा सोच समझकर बोला है, और यह मेरा खुद का अपना फैसला है। तो आप भी सोचकर जवाब देना।”
लेकिन अंकल को अब भी यकीन नही हो रहा था, तो उन्होंने मुझसे कहा, “अच्छा तो तुम बताओ, मेरे लिए क्या कर सकती हो?”
मैने भी तुरंत कह दिया, “जो आप बोलोगे, वो करने के लिए मै तैयार हूं।”
उनको लगा मै मजाक कर रही हूं, तो उन्होंने अपना काम करते हुए ही मेरी तरफ बिना देखे मुझसे कहा, “क्या तुम मेरे सामने अभी अपने सारे कपडे उतार सकती हो?”
उनका इतना कहना ही था कि, मैने अपने कपडे उतारना शुरू कर दिया। अंकल को लगा कि, मै चुप हो गई हूं। थोडी देर बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा तो देखते ही रह गए। तब तक मै अपना टॉप निकाल चुकी थी, और ब्रा का हुक खोलने ही वाली थी। तभी अंकल उठकर मेरे पास आए और मुझे हाथ से पकडकर गहर के अंदर खींचकर ले गए। अंदर जाते ही उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया, और कहा, “तुम सच मे पागल हो, घर का दरवाजा खुला था। अगर कोई देख लेता तो, ऊपर से सानिया कभी भी आ सकती है। मै तुम्हारा बनकर तो नही रह सकता लेकिन कुछ पल तुम्हारे साथ गुजार सकता हूं। कल मै काम पर नही जाऊंगा, तो तुम दिनभर मेरे साथ रह सकती हो।”
यह सुनते ही मै उनसे और ज्यादा चिपक गई, जिससे मेरी चुचियां उनके सीने से दब गई।

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