Dolly Aur Coaching Teacher

हैल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम डॉली है और मेरी उम्र 18 साल है, में भोपाल की रहने वाली हूँ। मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और एक भाई है। में शुरू से ही सेक्स के बारे में काफ़ी सोचती रहती थी और इसी वजह से मेरा पड़ाई में ध्यान नहीं लगता था और पिछले साल में 10वीं में फैल हो गई थी। इस कारण मेरे पापा ने मुझे मेरे कज़िन भैया के पास दिल्ली भेज दिया ताकि यहाँ पर में प्राइवेट से सीधे 11वीं कर सकूँ। में दिखने में इतनी अच्छी नहीं हूँ, लेकिन इतनी हूँ कि किसी को भी अपने जाल में फंसा सकूँ, मेरे दिमाग़ में हमेशा यही सब चलता रहता था। मेरी हाईट 5 फुट 5 इंच, बाल लंबे, रंग सांवला और मेरा शरीर भरा हुआ है।

दोस्तों आपको पता चल गया होगा कि मेरा नाम डॉली है और मेरे कज़िन के घर में भैया और उनकी बीवी पूजा और उनका एक बच्चा था, जो 5 साल का था और वो ज्यादातर अपनी नानी के घर रहता था। अब कहानी शुरू होती है। भैया ने कहा कि डॉली में तुम्हारी कोचिंग लगवा दूँगा, यहाँ पर एक टीचर है जिनका नाम विजय है और मैंने उनसे बात कर ली है। फिर बाद में भाभी ने बताया कि वो हमारे अपार्टमेंट में ही रहते है जो कि हमसे सिर्फ़ एक फ्लोर ऊपर था। उनकी उम्र करीब 34 साल थी और उनकी शादी भी हो चुकी थी और उनके एक बच्चा भी था। वो जब ऑफिस से आए तो भाभी ने उनको हमारे घर नीचे बुलाया और वो बाहर हॉल में बैठे थे और तभी भाभी ने मुझे आवाज़ दी कि डॉली बाहर आओ विजय सर आए है। मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे और में फटाफट से बाहर गई तो उस वक़्त मैंने टॉप और स्कर्ट पहन रखा था और मेरे बाल खुले हुए थे।

फिर बाहर जाकर मैंने सर को हाय बोला और सर ने भी मुझे हाय बोल कर हाथ मिलाया। मेरी सहेली ने मुझे बताया था कि मेट्रो सिटी में रहने वाले लोग बहुत ज्यादा ओपन हो चुके है और 18-19 साल की लड़की को काफ़ी जवान माना जाता है। सर दिखने में काफ़ी अच्छे थे और लंबे चोड़े भी थे। भाभी ने उनको कहा कि इसे कोचिंग कब से आना है, तो उन्होंने कहा कि वो कल से आ सकती है और वो चले गये। जब वो चले गये तो मुझे ऐसा लगा कि उनकी नज़रे कई बार मेरी कमर और स्कर्ट पर जा रही थी। यह सोच-सोच कर में काफ़ी देर तक अपने बिस्तर पर मचलती रही और में उन्हें फर्स्ट मीटिंग में ही इंप्रेस करना चाहती थी। फिर मैंने आज कोचिंग में जाने के लिए जीन्स और टॉप पहनने की सोचा और जब मैंने अपने आपको शीशे में देखा तो में देखती ही रह गई।

जब में उनके घर पहुँची तो उनकी पत्नी ने दरवाजा खोला और में रूम में जाकर बैठ गई और पढ़ने लगी। फिर सर भी रूम में आए और उन्होंने मुझे पढ़ाया, लेकिन एक बार भी उन्होंने मुझे ऐसी नज़र से नहीं देखा जिस नज़र से उन्होंने मुझे कल देखा था। करीब 4-5 दिन तक ऐसा ही चलता रहा। मुझे यहाँ दिल्ली में आए हुए करीब 12 दिन हो चुके थे और में यहाँ बहुत बोर हो रही थी, क्योंकि यहाँ ना तो मेरा पर्सनल कंप्यूटर था और ना मेरी सहेली से इतनी बात हो पाती थी। फिर मुझे सर के घर जाते 7 दिन हो गए थे, फिर जब में उनके घर पहुंची तो सर ने दरवाजा खोला और मैंने अंदर जा कर देखा तो घर में कोई नहीं था। में आज स्कर्ट और टॉप पहने हुई थी, लेकिन आज सर की नजरें अलग ही थी। फिर मैंने कन्फर्म करने के लिए उनकी पत्नी से पानी लाने के लिए कहा है, फिर में जानबूझ कर पानी लेने के लिए किचन की तरफ जाने लगी तो उन्होंने आवाज़ दी कि मेरी पत्नी घर पर नहीं है, में पानी ला देता हूँ।

फिर वो पानी ले कर आए, तो मैंने सर से पूछा कि सर आपकी पत्नी कहाँ है? तो वो बोले कि वो अपने घर कानपुर 10 दिन के लिए गई है, लेकिन उनकी नज़रें आज बदली बदली थी। उनकी नजर बार-बार कभी मेरी नंगी टांगो पर तो कभी मेरी कमर और कभी मेरे बूब्स पर जा रही थी। ऐसी नज़रें मैंने कई बार पहले भी देखी थी, लेकिन वो सब पब्लिक प्लेस पर ही होता था, लेकिन आज पहली बार कोई बंद घर में मेरी इस कच्ची जवानी को अपनी नज़रो का शिकार बना रहा था। मुझे यही टाईम सही लगा कि सर के साथ और दोस्ती बड़ाई जाए और मेरी बेचेनी भी बढ़ती जा रही थी। फिर मैंने बोला कि सर आपसे एक बात पूछनी थी, सर कई बार जब में प्रश्नों की प्रेक्टीस करती हूँ तो बीच बीच में अटक जाती हूँ। सर बोले कि अपनी गाईड में देख लिया करो, लेकिन सर गाईड तो और कन्फ्यूज़ कर देती है।

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