कॉलेज टीचर को दिखाया जवानी का जलवा

मेरे शरीर की गर्मी से सर का उठा हुआ लंड और भी अधिक मचल गया. अब सर भी मेरा पूरा सहयोग करने लगे. सर ने भी मुझे अपनी बांहों में भर लिया. सर ने मुझे आलिंगन में भरने के बाद मुझे चूमना शुरू कर दिया. वे मेरे गाल, माथे को गले के पास खूब चूमने लगे. मैं तो जैसे सर के चुम्बनों में खो सी गयी थी. मेरे मुँह से बस ‘अहह अहह..’ निकलने लगा था. मैं इतनी बेकाबू हो गई थी कि सर भी मुझे कण्ट्रोल नहीं कर पा रहे थे.

दोस्तो, उस समय मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या सही है और क्या गलत … बस मुझे अच्छा लग रहा था.
सर भी मेरे इस बेकाबू अंदाज को देख मुझे खूब प्यार करने लगे थे. मुझे किस करते करते कब उनका हाथ मेरे मम्मों पर चला गया था, मुझे पता नहीं चला.

मैं इस मदहोशी के आलम में बस ‘अहह आह …’ कर रही थी. सर ने मुझे अपनी बांहों में समेटे हुए टेबल पर लेटा दिया और मेरी कुर्ती को ऊपर से निकालना शुरू कर दिया. उनका लौड़ा पैंट के ऊपर से तम्बू की तरह सलामी देने लगा था.

मेरे पूरे कपड़े उतारते ही सर मेरी चूचियों पर टूट पड़े. मैं भी पागलों की तरह ‘अहह अहह …’ करते हुए सर को अपने मम्मों का मजा देने लगी. सर ने मेरे मम्मों को चूस चूस कर पूरी तरह टाइट कर दिया. उनके तेज तेज चूसने से मुझे मेरे मम्मों में बहुत ज्यादा दर्द भी होने लगा था, लेकिन बड़ा मीठा मजा भी आ रहा था.

मेरा मन कहता था कि मैं जिसको पसंद करूंगी, उसी से चुदवाऊँगी. आज सब कुछ मेरे मन का हो रहा था. मुझे सर ही पसंद आए थे और आज सर ही मेरे शरीर का भोग लगा रहे थे.

दोस्तो, मैं आपको बता नहीं सकती, लेकिन मुझे इस वक्त जन्नत जैसा लग रहा था.

सर का लंड इतना ज्यादा खड़ा हो गया था कि उन्होंने जरा भी देर न करते हुए अपना पूरे कपड़े उतार कर फेंक दिए. उनका मूसल सा तनतनाता हुआ लौड़ा देख कर एक पल के लिए तो मैं डर ही गयी थी. क्या मोटा लम्बा लंड था. सर बिल्कुल सांड जैसे गरमा गए थे.

अपने सर से इश्क करने के पहले मुझे इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि उनका लंड इतना लम्बा होगा.

नंगे होते ही सर ने मेरे मम्मों को अपनी मजबूत हथेलियों में दबा लिया. वे अपना फनफनाता हुआ लंड मेरे मुँह के पास लाये और मुझसे लंड चूसने का बोलने लगे.

मैंने पहले कभी लंड ही नहीं देखा था, चूसने की बात तो अलग थी. मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि लंड कैसे चूसूं. फिर भी मैंने कोशिश की, लेकिन जब मुझसे नहीं हुआ, तो सर मुझे समझाने लगे- पहले इसे सहलाओ.
उनसे खुद भी रहा नहीं जा रहा था, तो वे खुद ही मेरी चुत को चाटने लगे.

मैं फिर से मदहोश हो गयी थी. सर मेरी चूत चूसते हुए बोले- अब ले मेरा लौड़ा चूस ले.
मैं समझ गयी थी कि कैसे लंड चूसना है.

मैंने अपनी हल्की जीभ बाहर निकालते हुए सर के लंड की नोक पर चलाना शुरू कर दिया. सर भी मेरे पूरे बाल पकड़ कर मेरे सर को अपने लंड पर दबाने लगे. सर का लंड मेरे मुँह में घुस गया.

सर मुझे जकड़े हुए सिसियाने लगे- अहह अहह मेरी जानेमन … चूस ले लंड … आह पूरा चूस ले.

सर मुझसे लंड चुसवाने का मजा ले रहे थे. जैसे जैसे मैं सर का लंड चूस रही थी, उनका लंड मुझे और भी बड़ा दिखाई देने लगा था.

मैं अभी भी टेबल पर ही लेटी थी और सर टेबल के नीचे खड़े होकर मुझसे लंड चुसवा रहे थे.

कुछ मिनट बाद सर ने मेरे मुँह से अपना लंड निकाल लिया और फिर से मेरी चुत चाटने लगे. इसके बाद सर ने मेरी दोनों टांगों को पूरा फैला दिया और मेरी खुली हुई सीलपैक चूत की फांकों में हल्के से अपना लंड घिस दिया. लंड की गर्मी से मेरी आंखें चुदाई के नशे में डूब गईं.

तभी सर ने मेरी चुत में लंड डाल दिया. सर के मोटे लंड के घुसते ही मेरी दर्द से भरी हुई तेज आवाज पूरे रूम में गूंजने लगी. मैं रोने लगी और सर से मिन्नतें करने लगी- उई माँ मर गई … आह सर इसे बाहर निकालो … मुझे बहुत दर्द दे रहा है.

लेकिन सर कहां मानने वाले थे. वे मेरी चूत में अपना मूसल लंड घुसेड़े पड़े रहे.

सर ने थोड़ी देर तक अपना लंड अन्दर पेलने से रोके रखा … ताकि मुझे दर्द कम हो. इस बीच वे मेरे होंठों को चूमते रहे. अपने हाथों से मेरे निप्पल मींजते रहे. इस सबसे मुझे दर्द कम होने लगा.

मैं मस्त होने लगी. तभी उन्होंने अचानक फिर से अपने हब्शी लंड का एक जोरदार धक्का और दे दिया. इस धक्के से सर का मूसल लंड मेरी छोटी सी चुत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं दर्द से कांपने लगी.

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