सिनेमा हॉल में मस्ती गोदाम में चुदाई

जैसा कि आपने मेरी सबसे पहली कहानी
ऑफिस की लड़की की जबरदस्त चुदाई के बाद…
में पढ़ा कैसे मैंने रीना को पटाया फिर चोदा और प्रेम विवाह भी किया. विवाह से कुछ दिन पहले हम चोरी छुपे खूब मिला करते थे और मस्तियाँ भी मारा करते थे. इनमें से एक किस्सा कुछ ऐसा हुआ जो बताने लायक है.

मैं विक्रम जयपुर में रहता हूँ. कद 5’11” उम्र 30 साल है. रंग सांवला और अच्छी कद काठी है. मेरी मंगेतर का नाम रीना है जो सगाई से पहली मेरी ऑफिस असिस्टेंट हुआ करती थी. इनका कद 5 फुट 3 इंच है, उम्र 23 रंग गेहुआ, दुबला पतला कामुक शरीर जो हमेशा काम क्रिया के लिए तैयार ही बैठा रहता है.

सगाई हो जाने के बाद जैसा की गांव में होता हैं लड़का और लड़की को शादी के पहले तक मिलने नहीं दिया जाता. इसी वजह से में रीना से काफी दिनों तक मिला नहीं था और उसके प्रेम वियोग में जयपुर शहर में तड़प रहा था. शादी का इंतज़ार बहुत लम्बा लग रहा था.

एक रात मैंने रीना को फ़ोन किया और कहा- कितने दिन हो गए है, तुम्हारा खूबसूरत चाँद सा मुखड़ा देखे हुए, तड़प तड़प के मेरा तो जी बेहाल है.
रीना ने कहा:
जाने कहा मेरा जिगर गया जी
अभी अभी यही किधर गया जी!

मैंने कहा- उफ़ … तुम्हें तो सब मजाक ही सूझता है, जाओ बात नहीं करनी मुझे.
रीना ने कहा- ओहो नाराज़ क्यों होते हो बोलो न!
मैंने कहा- मुझे तुमसे मिलना है. कैसे भी करके मिलो न!
रीना- आप पागल हो गए हो? शादी के पहले तक तो बिल्कुल नहीं. किसी ने देख लिया तो?
मैंने कहा- अब मैं नहीं जानता, कोई भी उपाय लगाओ.

फिर थोड़ी देर तक रीना शांत रही और सोचने के बाद कहा- ठीक है, कोई बहाना मार के आ तो जाऊँगी. पर तुम अपने पड़ोसी और रिश्तेदारों से कैसे छुपाओगे मुझे?
कुछ देर सोचने के बाद एक जोरदार सा आइडिया मेरे दिमाग में आया और मैंने कहा- मैं सब संभाल लूंगा, तुम बस आ जाओ.

अगले दिन फिर रीना सुबह साढ़े ग्यारह बजे आ गयी, मैंने उसे अपनी बाइक पे बिठाया.
जैसा कि वो सहेली की सगाई का बतला कर आयी थी तो आज मस्त हरे रंग का घागरा चुन्नी डाले हुई थी. पूरी कामरूपवती अप्सरा लग रही थी, जैसे राजमहलों की रानियां होती हैं.
मैं उसे टकटकी लगा कर निहारते रहा.

तभी वो इठलाते हुए बोली- घर पे झूठ बोल के आयी हूँ कि सहली आज सगाई है जयपुर में, शाम तक गांव पहुंच पड़ेगा, तो क्या प्लान किया?
मैंने कहा- बस देखती जाओ मेरी जान!

मैं उसे सीधे सिनेमा हॉल में ले गया, दो टिकट लिए पिछली कोने की सीटों के … फिर एक हॉलीवुड मूवी देखने लगे. क्यूंकि आज बुधवार था और दोपहर का शो था तो सिनेमा हॉल लगभग पूरा खाली ही था आगे की सीटों पर कुछ ही लोग बैठे थे.

थोड़ी देर बाद मुझे शरारत सूझी और मैंने अपना एक हाथ रीना की कोमल जांघों पर बढ़ाया और हल्के हल्के उसकी कोमल मखमली जाँघें सहलाने लगा. उसने मेरा विरोध बिल्कुल नहीं किया उलटे मजा लेने लगी.

मैं उसके घाघरे के ऊपर से सहला रहा था. फिर मैंने उसकी नंगी कमर पे अपना हाथ चलना शुरू किया. वो हल्के हल्के सिसकारी लेने लगी. आखिर कितनो दिनों बाद उसे मेरे स्पर्श का एहसास जो हो रहा था.

उसकी पतली कमर का पूरा मज़ा लेने के बाद मेरे हाथ उसके वक्षस्थल यानि की बूब्स पर जाने लगे. अब मस्ती उसे भी चढ़ चुकी थी वो भी मेरे पैन्ट के ऊपर से मेरे खड़े लिंग को दबा रही थी.

तभी मैंने अपनी पैन्ट की चैन खोल दी और फिर उसने मेरे लिंग को चैन से बाहर निकाल लिया. वो मेरे लंड को आगे पीछे करने लगी. मेरे लंड का गुलाबी मोटा और रसीला सुपारा उसको ललचा रहा था.

मैंने भी मौके का भरपूर फायदा उठाया और उसके घाघरे का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ उसकी पैन्टी के अंदर डाल दिया. अब मेरा हाथ उसकी योनि जिसे चूत भी कहते हैं, उस पे था. उसकी चुत पानी छोड़ रही थी और एकदम रसीली सी हो रही थी.

रीना से काबू न हो पाया उसने आजू-बाजू देखा कि अँधेरा है और कोई देख नहीं रहा. तो वो झुक गयी और अपना मुँह मेरे लिंग के पास ले आयी. उसने गप से लंड के सुपारे को मुँह में लिया और चूसने लगी. वो मेरे लंड को चूसने और अपनी जीभ से चाटने भी लगी. मैं भी उसकी चुत में उंगली डाल चुका था.

अब वो जोर जोर से लंड को चूसती और मैं चुत में उंगली अंदर बाहर करके उसे मज़ा देता. तभी मूवी में इंटरवल हो गया जिसके कारण हल्का हल्का उजाला आने लगा. हम दोनों तुरंत अलग हुए और कपड़े ठीक करने लगे.

रीना मेरे कान में फुसफुसायी- कुछ हो नहीं सकता क्या?
मैंने कहा- चाहो तो बहुत कुछ हो सकता है. न चाहो तो कुछ भी नहीं.

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