चॉल वाली चुदक्कड़ भाभी की गंदी चुदाई

हैलो फ्रेंड्स! मैं कई सालों से अंतर्वासना का नियमित पाठक हूँ. अंतर्वासना की हर कहानी अपने आप में सेक्सी होती है. इसलिए यह मेरी पसंदीदा साइट है. आज मैं आप सबको एक नई और सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ. मैं इस कहानी का श्रेय अंतर्वासना वेबसाइट को ही देना चाहता हूँ क्योंकि अंतर्वासना की कहानियों से प्रेरित होकर ही मैंने एक भाभी को पटा लिया. आज उसी कहानी को मैं आप सबके साथ शेयर करने जा रहा हूँ.

अब अधिक समय व्यय न करते हुए मैं अपनी कहानी पर आता हूँ. मैं एक साधारण सा ही लड़का हूँ. मेरी हाइट 5 फीट 10 इंच की है और लंड का साइज़ 9 या 10 इंच तो नहीं लेकिन 7 इंच तो कम से कम होगा ही.

बात उन दिनों की है जब हम मौहल्ले में खेलते थे, हमारी बिल्डिंग के सामने वाली चॉल में एक भाभी रहने आई. वह अपने पति के साथ ही रहती थी. उसका नाम ममता था. अगर मैं उसके बारे में बताऊं तो मुझे सबसे ज्यादा जो बात उसमें पसंद थी वह थे उसके स्तन जो करीब 36 के साइज़ के थे और गांड भी 36 से कम नहीं थी. उसको देख कर कोई कह ही नहीं सकता था कि यह साली 3 बच्चे पैदा कर चुकी है. हम सब दोस्त यही सोचते थे कि काश इसको चोदने का मौका मिल जाए.
उसको चोदने की फिराक में तो हम सारे ही दोस्त रहते थे लेकिन मैंने अपनी तरफ से प्लानिंग शुरू कर दी थी. मैं भाभी को फंसाने की प्लानिंग करता रहता था.

उसका पति मार्केट में काम करता था. वह सुबह लगभग 3 बजे निकल जाता था और शाम को लौटकर आता था. मैंने एक दिन यही सब देखने में निकाल दिया कि वह किस टाइम घर से निकलता है और फिर वापस कब आता है. फिर मैं धीरे-धीरे भाभी के बच्चों को चॉकलेट देने लगा और इस बहाने भाभी के करीब जाने के बहाने ढूँढने लगा.

होते-होते भाभी भी मेरे साथ सहज हो गई. भाभी कई बार मुझे देख कर मुस्करा देती थी और मेरा दिन बन जाता था.

फिर एक दिन भाभी ने मुझे ऐसे ही बुला लिया. हम लोग बैठ कर बातें करने लगे. भाभी ने लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी. भाभी के जालीदार ब्लाउज के नीचे उसकी लाल रंग की ब्रा की भी झलक मुझे दिखाई दे रही थी. जब मेरी नज़र भाभी की ब्रा पर पड़ी तो मेरे लंड ने भी अपना मुंह उठाना शुरू कर दिया.

वह अंदर से मेरे लिए पानी लेकर आई लेकिन इतने में उसका बच्चा भागता हुआ आया और उसने पानी की प्लेट पर हाथ मार दिया. पानी का ग्लास भाभी के ब्लाउज को भिगाता हुआ नीचे गिर गया.
भीगे ब्लाउज में भाभी के चूचों के निप्पल की शेप भी उभर कर आ गई. भाभी ने बच्चे को डांटा और फिर मेरी तरफ देखा तो मैं उसके स्तनों को ही घूर रहा था. भाभी अपने पल्लू से अपने भीगे ब्लाउज को छिपाने की कोशिश करने लगी.

डांटने के कारण भाभी का बच्चा रोने लगा और उसे चुप करने के बहाने मैंने उसे पैसे देकर बाहर भेज दिया. भाभी अंदर अपने ब्लाउज को चेंज करने के लिए गई हुई थी. मैंने चुपके से दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया. मेरा लौड़ा भाभी के बारे में सोच-सोचकर तना हुआ था. मेरी पैंट में टैंट बना चुका था.

जब भाभी ब्लाउज बदलकर बाहर आई तो पूछने लगी- मुन्ना कहां गया है और ये कुंडी किसने बंद की है?
उस वक्त मुझे पता नहीं कौन सा भूत सवार था, मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और उसके बूब्स को दबा दिया. वह उचक कर एकदम पीछे हट गई और चिल्लाने लगी.

मेरी तो वहीं पर गांड फट गई. जोश-जोश में क्या कर बैठा. मैंने सोचा अर्णव आज तो तू फंस गया. फिर जो हुआ वह मेरी समझ के बिल्कुल बाहर था. भाभी अचानक से ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगी.
हंसते हुए भाभी बोली- क्या हुआ मजनू..? गांड फट गई इतनी देर में? मुझे पता था कि तू मेरे ही चक्करों में घूम रहा है. मैं जानती थी कि तू मेरे बच्चों को चॉकलेट क्यों देता है. लेकिन मैं देखना चाह रही थी कि तेरी गांड में कितना दम है?

मैं भाभी की बात सुनकर हैरान था. कुछ देर तक मैं सोच में पड़ गया लेकिन भाभी के मुंह से ऐसी अश्लील बातें सुनकर मेरे अंदर भी हिम्मत आ गई थी. मैंने कहा- साली रंडी, तूने तो मुझे डरा ही दिया था.
मवालियों वाली टोन में उससे कहा- आज तेरी चूत को ऐसे चोदूंगा कि वो लंड लेने से पहले कई बार सोचेगी.

मैंने भाभी को अपनी तरफ खींचा और पकड़ कर उसके गले पर चुम्बन देना शुरू कर दिया. अगले ही पल मैंने भाभी के ब्लाउज को खोल दिया और उसकी पीठ को पीछे से चाटने लगा.
भाभी के मुंह से गर्म सांसें निकलना शुरू हो चुकी थी. गर्म होकर भाभी ने भी अपनी तरफ से शुरूआत कर दी. उसने मेरा टी-शर्ट निकाल दिया और मेरे जिस्म को चूमने लगी. भाभी मुझे चूमते हुए गालियाँ भी दे रही थी- साले तड़पा मत मुझे, मेरा मर्द तो साला काम पर जाता है, बच्चे निकाल कर कमीने ने मुझे चोदना ही छोड़ दिया. अब मैं अपनी उंगली से ही अपनी चूत को खुश कर लेती हूँ.

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