चुदाई का मौक़ा लंड का चौका

मैं चंदन टीनू फिर एक कहानी लेकर आया हूँ. आशा है कि आप सभी को पसंद आएगी कि कैसे मैंने घमंडी ललिता को चोद कर उसका घमंड तोड़ा.

चुदाई के मौके पर लंड का चौका नाम की यह कहानी एक घमंडी औरत ललिता जो कि एक काल्पिनक किरदार है, उसकी चुदाई की है. ललिता को मैंने शादी में और उसके घर में उसके पति की अनुपस्थिति में भी चोदा था.

इस कहानी में सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं.

मेरी पिछली कहानी
करवा चौथ की रात मनाई सुहागरात
के लिए मुझे आप सभी ने इतना प्यार दिया कि मैं एक ओर कहानी लिखने को विवश कर दिया. कुछ पाठक मुझसे मेरी नायिकाओं का संपर्क नंबर मांगते हैं और मिलवाने की बोलते हैं, तो मेरा अनुरोध है कि सभी से मेरा रिश्ता विश्वास से ही बना है और मैं किसी का विश्वास नहीं तोडूंगा. सिर्फ कहानी पढ़ें और मज़ा लें.

जो नए पाठक हैं उनके लिए बता दूँ कि मैं चंदन रेवाड़ी हरियाणा का रहने वाला हूँ. मेरे लंड का साइज 5 इंच है और मोटाई 3 इंच है. मैंने इतनी लड़कियों और भाभियों को चोदा है कि कभी कभी मुझे लगता है कि मैं भी एक फ्री वाला कॉलब्वॉय हूँ.

ललिता से मुलाकात मेरी एक शादी में हुई थी, शादी मेरे एक दोस्त की बहन की थी, वहां पर मैं भी काम में हाथ बंटाने गया था. मैं शादी में 4 दिन पहले ही चला गया था. सभी से मुलाकात के बाद मैं मेरे दोस्त के साथ घर में काम करने लगा कि तभी सामने से आ रही एक सुंदर गोरी औरत पर मेरी नजर पड़ी. उसकी नजर मेरे पर पड़ते ही मैंने स्माइल दी, पर वो मुँह चढ़ा कर चली गई. थोड़ी देर बाद दोस्त की बहन के पास जाना पड़ा, तो देखा कि वही औरत बहन से हंसी मजाक कर रही थी, लेकिन वह मुझे देख कर चुप हो गयी.

मैंने अपना काम किया और मुड़ा ही था कि वो बोली- ए मिस्टर, तुम मुझे बाहर देख कर क्या कर रहे थे?
मैंने भी बोल दिया- इस शादी में एक आप ही तो सुन्दर हैं, इसलिए लाइन मार रहा था.
इस बात पे वो हंस पड़ी.

मैं बाहर जा कर फिर काम में लग गया.

ललिता से मिलने के बाद मैं कहता हूँ कि…

चैत में चिड़िया
कातक में कुतिया
माघ में बिलाई और
शादी में लुगाई
रिफली रिफली हांडा करती है.

इसका मतलब है कि इनको कोई भी चोद लो.. बिल्कुल मना नहीं करेंगी.

दूसरे दिन सुबह हमारी बहन मेरे पास आई और बोली- भाई बाजार से मेरा सामान ला दे.
मैंने बाइक ली और बाजार की तरफ चल दिया. ये शादी एक गांव में थी, वहां से बाजार 15 किलोमीटर दूर था.

जब मैं घर के गेट पर पहुंचा तो ललिता ने मुझे आवाज दी- रुको.
तो मैं रुक गया.
वो मेरे पास आई और बाइक पर बैठ कर बोली- अब चलो.
मैं चल दिया.

गांव से बाहर निकलते ही मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम ललिता बताया.
मैं बोला- जैसा आपका बदन है, वैसा ही नाम है.
इस बात पर वो हंस पड़ी और मेरे से मेरा नाम पूछा, तो मैंने बताया कि मेरा नाम चंदन हैं. बाकी आप कुछ भी बोल दो.
वो बोली कि कितनी गर्लफ्रेंड बना रखी हैं.
मैंने कहा कि एक भी नहीं है.
तो वो बोली कि जब मैं खुद तुम पे फिदा हो गयी तो और बेचारियों की तो क्या हालत कर रखी होगी.

वो सूट पहन कर दोनों साइड में पैर कर के बैठी थी कि तभी रास्ते में गड्डे शुरू हो गए. मैंने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए तो वो डर के मारे मुझसे चिपक गयी. उसके खड़े निप्पल मेरी पीठ में चुभ गए.
सॉरी.. मैं आप सभी को ललिता कर बारे में बताना ही भूल गया. ललिता 5 फुट 8 इंच लंबी थी और उसकी फिगर 34-30-34 का था. वो दूध सी गोरी और चिकने बदन की मालकिन थी, परंतु उसमें अपनी सुन्दरता पे बहुत घमण्ड था. वो इतनी सेक्सी माल थी भी. जो भी ललिता को एक बार चोद लेता, वो बार बार ललिता को ही चोदता. वाकयी इतना ही मस्त बदन था ललिता का.

जब दोबारा ब्रेक लगा तो उसका हाथ रिपट कर मेरे खड़े लंड से टकरा गया. इस बार उसने मेरे लंड से हाथ न हटा कर, अपने दूसरे हाथ से मेरी पीठ पर मुक्का मारा और बोली कि चांस मत मारो.. कोई फायदा नहीं है.
मैं बोला कि अब जरूरत नहीं है, अब तो आप पट चुकी हो.
वो हंस दी.

इस तरह बात करते हुए बाजार आ गया. ललिता ने कहा कि मैं पार्लर जा रही हूँ तुम तब तक अपना सामान ले लो.
मैं बोला- पार्लर जाने की क्या जरूरत है.. किसके लिए इतना सिंगार कर रही हो?
तो ललित ने मुस्कराते हुए कहा- तेरे लिए.

फिर वो कंटीली मुस्कान बिखेरते हुए पार्लर चली गयी. मैं भी अपना काम निपटाने के बाद वापस पार्लर के सामने पहुंच गया.

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