चालू लड़की की चुदाई

दोस्तो, मेरा नाम अमन है, मेरी उम्र 24 है. मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ. मेरे लंड का साइज़ 7 है, जो किसी भी भाभी, आंटी, या लड़की की चूत की आग को शांत करने के लिए काफी है.

ये बात अभी नवम्बर 2016 पहले की है, जब 500 और 1000 के नोट बंद हुए थे. मैं भी बैंक में जॉब करता हूँ. उस समय बैंक में बहुत भीड़ भाड़ रहती थी.

एक दिन मैं अपने घर आ रहा था, तो घर के पास ही हमारे एक पड़ोसी राधे अंकल ने मुझे रोक लिया.
अंकल कहने लगे- अरे बेटा, घर में शादी का माहौल है और अभी कुछ भी सामान नहीं आया है. तुम मेरी कुछ सहायता कर दो.
मैंने कहा- हां बताओ अंकल, मैं क्या कर सकता हूँ?
राधे अंकल- घर में शादी है और बिना पैसों के अब तक कुछ काम ही नहीं हुआ है. तुम ऐसा करो कि कुछ पुराने नोट ले जाओ और उन्हें बदल के दे देना!
मैंने कहा- ठीक है… आप ऐसा करना किसी को कल भेज देना और साथ में उसका पहचान पत्र भी दे देना.
राधे- लेकिन बेटा, बड़ा लड़का तो घर पर नहीं है और मैं बाहर जाऊंगा. तो मैं ऐसा करता हूँ कि अपनी लड़की को भेज दूँगा.
मैंने कहा- ठीक है अंकल भेज देना.
इतना कह कर मैं जाने लगा.

तभी मुझे किसी ने आवाज दी- अरे अमन.. सुनो इधर आओ!
मैंने पीछे मुड़कर देखा तो अंकल की बड़ी लड़की मुझे बुला रही थी, उसका नाम मधु था. उसकी उम्र 20 साल की रही होगी. उसके उभरे हुए चुचे क्या मस्त लग रहे थे. उसकी गांड एकदम गोल थी और बाहर को उभरी हुई थी. ऐसा लग रहा था कि पता नहीं कितने लंड को खा चुकी होगी. खाती भी क्यों नहीं … साली की गांड थी कि बस.. पूछो मत. उसकी गांड को देख कर कोई भी बिना अपने लंड को हिलाए नहीं रह सकता था. मैं तो बस उसे देखता ही रह गया.

मधु- आप ऐसा करो कि आप अपना नंबर मुझे दे दो. मैं जब आऊँगी तो आपको फ़ोन कर लूंगी.
मैंने कहा- ठीक है, लिखो.
मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और उसके बाद घर आ गया.

अभी मैं खाना खाकर उसी के बारे में सोच रहा था कि तभी मेरा फ़ोन बजा, मैंने उठाया- हैलो कौन बोल रहा है?
“अरे मैं मधु बोल रही हूँ.. अभी शाम को ही आपसे नंबर लिया था न.. भूल गए क्या?”
“अरे नहीं.. आप कोई भूलने की चीज थोड़े ही हो.. जो भूल जाएंगे.. आप तो..”

इतना कह कर मैं चुप हो गया.

मधु- क्या हुआ.. बोलो क्या बोल रहे थे?
“अरे वो कुछ नहीं बस ऐसे ही..”
“मधु- बोलो न ऐसी भी क्या बात या फिर हमें कोई गैर समझते हो.. इसलिए बताना नहीं चाहते?
“अरे नहीं ऐसी बात नहीं है, मैं तो बस ये कह रहा था कि आप तो दिल में बसाने की चीज हो.. भूलने की नहीं.”

मधु- ओह्ह्ह हो तो ऐसी बात है.. हमारे बारे में ऐसे ख्याल हैं आपके.. बस यही ख्याल है.. या कुछ भी है? और भी अगर हो.. तो वो भी बता दो?
उसकी बातों से मैं समझ गया था कि ये भी चुदना चाहती है, मैं बोला- ख्याल तो बहुत हैं.. पर पूरे कहां होते हैं यार!
मधु- अगर कोई ख्याल हमारे बारे में है तो बताओ.. वो जरूर पूरा होगा. बस तुम बताओ तो?

अब उसे कौन बताये कि मेरे लंड को तेरी चूत चाहिए. एक बार तेरी चूत मिल जाए तो मजा आ जाए.

“वैसे ख्याल तो आपके ही बारे में हैं, पर थोड़ा अलग हैं.. तुम बुरा मत मानना.”
मधु- नहीं नहीं.. इसमें बुरा क्या मानना.. आप हमारे इतने काम आ रहे हो, तो क्या मैं आपका एक काम नहीं कर सकती क्या? वैसे भी आज की दुनिया में कौन काम आता है. आप चिंता मत करो, कह दो, मैं बुरा नहीं मानूंगी आप बता दो.

उस समय मेरी गांड फट रही थी, मन तो कर रहा था कि कह दूँ पर डर भी लग रहा था कैसे कहूँ.

मधु- ओके ऐसा करो, कल मैं आपसे मिलूंगी.. तब बता देना ठीक है.
इतना कह कर उसने फ़ोन काट दिया.
अब मैं बस यही सोच रहा था कि उसे चोदने में कितना मजा आएगा.

दूसरे दिन मैं ऑफिस में काम कर रहा था, तभी मेरा फ़ोन बजा.
मैंने कहा- हैलो, कहां हो?
“मैं तुम्हारे ऑफिस के बाहर खड़ी हूँ.”
“ठीक है, ऐसा करो तुम अन्दर आ जाओ.”

मैंने उसे अन्दर बुला लिया और थोड़ी देर में ही उसके थोड़े से पैसे बदल दिए क्योंकि ज्यादा बदलने का नियम नहीं था. वो मेरी तरफ मुस्करा कर देख रही थी.

मधु- अब बताओ… कल क्या बोल रहे थे?
मैंने हिम्मत करके उससे बोल दिया कि मैं उसे पसंद करता हूँ.
उसने भी बदले में कुछ नहीं कहा, बस मुस्करा दी. मैं समझ गया कि ये भी राजी है.

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