बॉस ने खोली कुंवारी पंजाबन की चूत

मेरी मम्मी बोलीं- बीच में कोई आवाज़ आ रही है, ये किस चीज की आवाज है?
मैंने कहा- कुछ नहीं मेरे साथ वाली इशारा कर रही है कि सो जाओ.
मम्मी ने कहा- ठीक है बेटा, अपना ख्याल रखना बाय.

फ़ोन काटते ही मैंने बॉस से कहा- यार, तुम से कुछ देर के लिए सब्र भी नहीं हुआ … तुम्हारे सामने नंगी सरदारनी लेटी है … वो हर तरह से तुमको मजा देने को राजी है. अगर मम्मी को पता चल जाता तो मेरा क्या होता, अब जो करना है … जल्दी कर लो.
बॉस ने मेरे चूतड़ों पर ज़ोर से थप्पड़ मारे और बोला- तुमको क्या लगता है, मैं तुम्हें ऐसे ही छोड़ दूंगा. मेरी जान अभी तो पूरी रात पड़ी है. मैं सारी रात तुम्हारी चूत को चोद कर इसका भोसड़ा बना दूंगा. वैसे भी कुंवारी सरदारनी की चूत रोज़ नहीं मिलती है.

उसने ये कहते हुए ज़ोर ज़ोर से झटके मारने शुरू कर दिए.

मेरी चूत अब परपराने लगी थी, ये दो बार झड़ चुकी थी. कोई दो मिनट तक बॉस ने मुझे तेज रफ्तार से चोदा और अपना सारा वीर्य मेरी चूत में ही निकाल दिया.

उसने झड़ते हुए कहा- कुछ देर हम आराम करते हैं … और फिर तुम्हारी चुदाई शुरू करेंगे.
वो मुझसे चुदाई को लेकर बात कर रहा था. वो बोला- तुमको मज़ा आया?
मैंने कहा- हां मजा बहुत आया, पर दर्द भी हुआ.

उसने कहा- जब मैंने पहली बार तुमको देखा था, उसी वक्त सोच लिया था कि इस सरदारनी की चूत तो मैं ही फाड़ूंगा. मैंने पहले भी कई सरदारनियों की चुदाई की है, पर जो स्वाद एक कुंवारी सरदारनी की चुदाई में मुझे आया, वो उन चुदी-पिटी फुद्दियों में नहीं आया था.

तभी मेरे मन में आया कि यह बंदा तो शिकारी है, इसने तो मेरा शिकार कर लिया है. अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी. मेरी चूत तो अब उसके लंड की हो चुकी थी. बेड पर मेरी चूत का खून लगा हुआ था. मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी पहली चुदाई ऐसी होगी.

उसने मुझे चूमते हुए कहा- तुम्हारे गोल गोल चूतड़ और गोल गोल मम्मों पर मैं फ़िदा हो गया था.
मैं उसको सुन भर रही थी.

उसने आगे कहा- डिनर पर तुम एक माल लग रही थी, तभी मैंने तुमको चोदने का प्लान बना लिया था. अब तुम्हारी गांड और चूचे पहले से और बड़े हो जाएंगे.
मैं बस मस्त पड़ी थी.
बॉस ने कहा- अब तुमको मेरे लंड को फिर से खड़ा करना है. लंड को अपने मुँह में ले लो.

उसने अपना लंड कपड़े से साफ़ करके मेरे मुँह में दे दिया और मेरी चूत को अपने मुँह में ले लिया. उसका लंड बहुत मोटा था. मेरे चूसने से वो बहुत सख्त हो गया.

तभी उसने मुझे उठाकर अपने ऊपर लिटा लिया. अपना लंड फिर से मेरी चूत में डाल दिया और फिर से मेरी चुदाई शुरू हो गयी. अब मुझे दर्द भी कम हो रहा था और पहली चुदाई का मज़ा भी बहुत आ रहा था.

बॉस ने मेरे होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और एक ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी. पचक पचक की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं. मेरी चूत अब काफी खुल गयी थी.

बॉस मुझे बहुत तेज़ पेल रहा था. इसी बीच उसका लंड मेरी चूत से बाहर निकल गया, तभी मैंने अपने हाथों से लंड को अपनी चूत में डाल लिया.

उसी वक्त मुझे मनु की बात याद आ गयी, जब उसने कहा था कि तुम्हारे जैसी खुद लंड को अपनी चूत में डालती हैं. मैं मन ही मन मुस्कुरा दी.

कुछ देर बाद बॉस खड़ा हो गया और मुझे अपनी गोद में उठा उठा कर चोदने लगा. उस रात मेरे बॉस ने मुझे बहुत सारे आसनों में चोदा. वो मुझसे खिलौने की तरह खेल रहा था. कभी मुझे उल्टा करके चोदता, कभी मेरी टांगें उठाकर ज़ोर ज़ोर से चुदाई करने लगता.

बॉस ने मेरे मम्मों को इतना ज्यादा मसला, मेरे निप्पलों को इतना काटा और अपनी उंगलियों से दबाया कि मैं उनका दर्द ही भूल गयी थी. क्योंकि मैं अपनी चुदाई में मदहोश हो चुकी थी. मेरी चूत सुन्न पड़ गयी थी. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि मैं अब तक कितनी बार झड़ चुकी थी.

चुदाई के बीच बॉस ने मुझे कई बार पैग पिलाए, जिससे मुझे होश आ जाता था. मेरे होश में आते ही मेरी चुदाई फिर से शुरू हो जाती थी. सारी रात वो मुझे चोदता रहा.

रात 3 बजे मेरी चुदाई बंद हुई. उसने अपने वीर्य से मेरी चूत को भर दिया था. बॉस ने कसकर मुझे अपनी छाती से लगा लिया. मुझे कोई होश नहीं था, बस इतना पता था कि आज मेरी चूत का भोसड़ा बन गया है. अब यह पहले जैसी कभी नहीं होगी.

हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए.

अगले दिन सुबह 10 बजे जब मेरी आंख खुली, तो मैंने देखा कि बॉस पहले ही उठ गया था. मैंने अपने आपको देखा, तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा पूरा रस निचोड़ लिया गया हो. मेरे मम्मों में दर्द हो रहा था … वो एकदम लाल थे. मेरी चूत सूज गयी थी. जब मैं चलने लगी तो मुझे पूरे शरीर में दर्द हुआ.

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