बॉस ने खोली कुंवारी पंजाबन की चूत

मैंने न जाने किस मद में मस्त होकर अपनी दोनों टांगें पकड़ लीं.
इसके बाद बॉस ने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ना चालू कर दिया.
मैंने बॉस से कहा- प्लीज़ अन्दर मत डालना.
वो बोला- कुछ नहीं होगा मेरी जान … बस ऊपर ऊपर ही करूंगा, पूरा अन्दर नहीं डालूँगा.

मैं आश्वस्त हो गई कि चलो चुत की सील नहीं टूटेगी. वो अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ता जा रहा था. जितना ज्यादा वो सुपारे को मेरी चूत की फांकों में घिसता, मैं उतनी ही अधिक मदहोश होती जा रही थी. मेरी धड़कनें बहुत तेज़ हो गयी थीं. मुझे समझ में आने लगा था कि आज यह मेरी चूत को फाड़ ही देगा … मनु ने जो कहा था, वही हो भी रहा था. शायद मेरे दिल के किसी कोने में खुद भी चूत का फीता कटवाने की मंशा बलवती होने लगी थी.

बॉस भी मेरी चुदाई ही करना चाहता था. इसलिए मैंने भी सोचना बंद कर दिया था. चूंकि मुझे भी मज़ा आ रहा था, इसलिए मैंने प्रारब्ध को छेड़ना बंद कर दिया था और सोचने लगी थी कि जो भी होना होगा, हो जाने दूंगी.

बॉस अपने कड़क लंड को मेरी चूत के अन्दर डालने की कोशिश कर रहा था. पर कुंवारी चूत में उसका मोटा लंड अन्दर नहीं जा पा रहा था. बॉस ने मेरे होंठों पर अपना हाथ रख दिया और लंड को ज़ोर से मेरी चूत के अन्दर पेल दिया.

मोटे लंड के इस आक्रमण से मेरी आँखों से आंसू आ गए. आधा लंड अन्दर जा चुका था. मैं दर्द से छटपटाने लगी थी. मेरी हालत देख कर कुछ देर तक बॉस रुका रहा. फिर उसने आधे लंड को धीरे धीरे करके चूत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

मैं तो बेहोश जैसी ही हो गयी थी. कुछ देर बाद मुझे होश आया. मैंने देखा कि मेरी चूत में से खून निकल कर चादर पर लगा हुआ था. मैंने नीचे हाथ लगाया, तो खून की बूंदें मेरी उंगलियों में लग गईं. मैंने समझ लिया कि मेरी चूत लाल हो चुकी है.

चूत में कुछ चिकनाहट हो जाने से लंड अब जल्दी जल्दी अन्दर बाहर होने लगा था … मेरी सील टूट गयी थी. बॉस ने अपना पूरा लंड अन्दर तक पेल दिया था. मुझे भी दर्द का अहसास कम हो चला था.

कोई 10 मिनट के बाद मुझे भी मज़ा आना चालू हो गया. उसका पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर जड़ तक जा रहा था. फिर बॉस ने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को कसकर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से चूत में धक्के मारने चालू कर दिए.

उसने मेरी चूचियों को मसल मसल कर उनका हलवा सा बना दिया था, मेरी चूचियों का बुरा हाल हो चुका था. पर इससे मेरी चुदाई से होने वाला दर्द मुझे कम महसूस हो रहा था.

अब मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगी थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई … आहह …

इसके बाद मेरे बॉस ने मुझे छोड़ दिया और मुझे घोड़ी बना दिया. फिर पीछे से लंड पेल कर मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदना चालू कर दिया. मुझे लग रहा था कि मेरी चुदाई की कामुक आवाजें कमरे से भी बाहर तक जाने लगी थीं.

यह मेरी पहली चुदाई थी, पर मेरे बॉस को मुझ पर कोई तरस नहीं था. वो इतनी ज़ोर से मेरी ठुकाई कर रहा था, जिससे मेरा पेट और टांगें कांप रही थीं.

बस इन सब में जो अपनी चूत में लंड लेने का मज़ा था, उसके सामने यह दर्द कुछ भी नहीं था. मुझे भी मजा आ रहा था. साथ ही मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि काश मेरी चूत में पहले ही कोई लंड घुस गया होता. मेरा दिल कर रहा था बस मेरी चुदाई यूं ही चलती रहे. लंड क्या मज़ा देता है, इसका पता तो चूत में जाने के बाद ही चलता है.

बॉस ने मेरे गोरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार मार कर लाल कर दिए थे.

तभी मैंने देखा मेरे फ़ोन पर मेरी मम्मी की कॉल आ रही थी. मैंने फ़ोन उठाया मेरी मम्मी बोलीं- तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रही थी?
मैंने जवाब दिया कि मुझे नींद आ गयी थी.
मम्मी बोलीं- तुम्हारी साँस फूली हुई क्यों है?
मैंने कहा- अभी मेरी आंख खुली है, मैं कोई सपना देख रही थी … और शायद इसलिए ही ऐसा हो गया होगा.

इस दौरान बॉस का लंड मेरी चूत के अन्दर ही था. अब मुझे दर्द भी महसूस हो रहा था और मज़ा भी बहुत आ रहा था.

तभी बॉस ने धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. मैं बहुत कण्ट्रोल कर रही थी कि कहीं मेरी आवाज़ से मम्मी को शक न हो जाए.

मेरी मम्मी मेरा हाल चाल पूछ रही थीं. वो मेरी बहुत तारीफ़ कर रही थीं, पर उनको क्या पता था कि उनकी लड़की तो अपने बॉस से चुदाई करवा रही है.

तभी मेरे बॉस ने अपनी स्पीड को तेज़ कर दिया और पचक पचक की आवाजें आने लग गईं.

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