शादीशुदा भाभी की चूत चोदने का सपना

फिर मैं सोनल के फोन का इंतजार करने लगा.
दिन के करीब तीन बजे उसका कॉल आया. मैंने पूछा तो उसने बताया कि सोनल बोल रही हूँ.

मैं उसकी आवाज सुनकर खुश हो गया. फिर धीरे-धीरे हम दोनों में बातें होने लगीं. कुछ ही दिन में वो मुझसे खुलने लगी. फिर एक दिन उसने पूछा- तुम्हारी तो बहुत सारी गर्लफ्रेंड्स होंगी रोमी?
मैं- नहीं भाभी, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
भाभी- क्यों?
मैं- मुझे कोई आपके जैसी मिली ही नहीं जिसे देख कर रातों की नींद हराम हो जाये.

भाभी- अच्छा रोमी जी, इसलिए तुम मुझ पर लाइन मारते रहते हो.
मैं- नहीं भाभी जी, बस मैं तो अपने दिल की बात बता रहा हूं.
भाभी- चल झूठा, मैं कोई हूर की परी हूं क्या जो तू ऐसे मुझ पर लाइन मारने की कोशिश कर रहा है?
मैं- भाभी आप सच में बहुत मस्त और एकदम सेक्सी हो, जब से आपको देखा है मेरी नींद गायब हो गई है.
भाभी- सच रोमी?

मैं- सच भाभीजी, मैं आपको बहुत पसंद करने लगा हूँ और हर पल आपके बारे में सोचता रहता हूं.
भाभी- रोमी, वैसे मैं सच कहूं तो तू भी मुझे अच्छा लगता है.

मैं- तो फिर इतने दिन से आप ने मुझे इतना क्यों तड़पाया हुआ है?
भाभी- बस मैं देखना चाह रही थी कि तुम मुझ पर लाइन मारते रहते थे या मेरी सहेली पर.
मैं- भाभी, मैं तो बस आपको ही पसंद करता हूं.

दोस्तो, इस तरह सोनल और मेरी प्यार भरी बातों का दौर चलने लगा.

एक दिन मैंने भाभी से पूछा- क्या भैया आपको पूरा मजा दे पाते हैं?
भाभी उदास होकर बोली- उनका तो डालते ही छूट जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ.
मैं- तो फिर आप मुझे एक मौका दो ना भाभी आपकी सेवा करने का? अगर आपकी प्यास ठंडी न कर दी तो मेरा नाम बदल देना.
भाभी बोली- ठीक है, किसी दिन मैं घर पर अकेली रहूंगी तो तुम्हें बुला लूंगी.

मैं बेसब्री से उस दिन का इंतजार करने लगा.

फिर एक दिन भाभी का मैसेज आया कि उनके पति बाहर मीटिंग में जा रहे हैं, अगले दिन देर से ही लौटेंगे इसलिए उन्होंने मुझे रात 9 बजे के बाद तैयार रहने के लिए बोल दिया.
उन्होंने कहा कि जैसे ही मेरा मैसेज मिले तुम मेरे घर पर आ जाना.

उस दिन मुझे रात का इंतजार करना बहुत मुश्किल हो रहा था. रात को करीब 9.15 बजे भाभी का मैसेज आया कि लाइन क्लियर है. उन्होंने मुझे जल्दी से घर आने के लिए कहा.

मैं तुरंत घर से बाहर आ गया. फिर यहां-वहां देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है. फिर मैं भाभी के घर के पास गया तो गेट हल्का सा खुला हुआ था.

मैं फटाक से अंदर घुस गया और घुसते ही भाभी ने गेट अंदर से बंद कर लिया. अंदर जाकर हम हॉल में गये. मैंने देखा कि भाभी ने पहले से ही सारी खिड़कियां बंद करके उन पर पर्दा लगा दिया था. उस दिन भाभी ने एक सेक्सी पारदर्शी गाऊन पहन रखा था. उस गाउन में से भाभी का पूरा जिस्म दिख रहा था. मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

भाभी जैसे मेरी पहल का ही इंतजार रही थी. जैसे ही मेरे होंठ भाभी के होंठों से लगे तो उन्होंने मुझे जोर से किस करना चालू कर दिया. ऐसा लग रहा था कि बहुत दिनों से भाभी एक मर्द के होंठों की प्यासी है. मैं भी जोर-जोर से सोनल भाभी के होंठों को चूसते हुए उनको काटने लगा.

मेरे हाथ भाभी की सेक्सी नर्म पीठ को सहला रहे थे. लगभग पंद्रह मिनट तक तो हम एक-दूसरे के साथ चुम्मा-चाटी में ही लगे रहे. फिर मैं भाभी को गोद में उठा कर उनके बेडरूम में ले गया. भाभी को बेड पर लिटा दिया और फिर से उनके होंठों को चूसने लगा. मेरा लंड पागल हुआ जा रहा था.

पहली बार शादीशुदा भाभी की चुदास की गर्मी महसूस हो रही थी मुझे. मैं एक हाथ से भाभी के चूचों को दबाने लगा तो भाभी एकदम से और ज्यादा गर्म हो गई. वो मेरे होंठों को और भी जोर से काटने और चूसने लगी. मुझे तो ऐसा लग रहा था कि वो मेरे होंठों से खून ही निकाल देगी. चुदासी भाभी की प्यास तेज होती जा रही थी.

होंठों की जोरदार चुसाई के बाद मैं नीचे की तरफ चला और भाभी की गर्दन को चूमने लगा. उसके मोटे चूचों को दबाते हुए उन पर अपनी पकड़ तेज करता जा रहा था मैं. फिर मैंने भाभी का गाउन खोल दिया और उसको अलग फेंक दिया.

सोनल भाभी अब ब्रा और पैंटी में मेरे सामने पड़ी थी और किसी नागिन की तरह तड़प रही थी बिस्तर पर लेटी हुई. उसकी ब्रा में से उसके चूचों की दरार देख कर मेरे अंदर की हवस और बढ़ गई. मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को पकड़ कर सहला दिया. भाभी ने उठ कर मुझे फिर से अपने ऊपर खींच लिया.

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