माँ बेटा चुदाई: बेटे ने मेरी हवस मिटाई-2

मेरी गीली चूत से अन्तर्वासना के सभी पाठको को आपकी प्रभा का सेक्स भरा नमस्कार!

दोस्तो, अपने मेरी पिछली कहानी
माँ बेटा सेक्स: बेटे ने मेरी हवस मिटाई
को इतना पसंद किया उसके लिए आप सभी का अपने जिस्म से शुक्रिया अदा करती हूँ.

तो मेरी पिछली कहानी में आप लोगों ने देखा कि कैसे मुझ विधवा की प्यासी जवानी की जलती आग को मेरे बेटे सोनू ने शांत किया.
अब आगे की कहानी पढ़िए!

उस रात के बाद अब हम दोनों माँ बेटे खुल चुके थे पूरी तरह से! अगले दिन मैं दूकान चली गयी और बेटा कॉलेज चला गया, दिन एकदम सामान्य रोज़ की तरह गया.
लेकिन रात का नशा उतर नहीं रहा था, सच कहूँ तो मुझे पति से भी ज्यादा अपना बेटा पसंद आ रहा था क्योंकि छह फुट का जवान लड़का एकदम हट्टा-कट्टा अगर साथ में चले तो उसकी और मेरी उम्र से ज्यादा फर्क नहीं पता चलता!
खैर अब मुझे बदनामी का भी डर नहीं था चूँकि घर में ही सब मिल गया था मुझे!

शाम को करीब 9 बजे मैं दूकान बढ़ा कर घर आयी, शिवानी अपनी पढ़ाई में लगी हुई थी और सोनू लैपटॉप में कुछ कर रहा था!
मैं उसके पास गयी और पूछा- क्या कर रहे हो बेटा?
सोनू- मम्मी मुझे एक अंतर्राष्ट्रीय कॉल सेंटर में नौकरी मिली है कोलकाता में, महीने की तनख्वाह है छब्बीस हज़ार रुपये और इंसेंटिव अलग से!
मैंने- यह तो बहुत ख़ुशी की बात है बेटा!

सोनू- माँ, क्यों न हम लोग एक काम करें… यहाँ अब रहने का भी दिल नहीं करता, यह दूकान बेचकर हम कोलकाता ही शिफ्ट हो जाते हैं, मैं तुम और शिवानी! वहां खुलकर अपनी ज़िन्दगी जी भी पाएंगे हम लोग!

हालाँकि बात में दम तो था लेकिन मैं ससुराल वालों की वजह से थोड़ी हिचक रही थी, मैंने सोनू से कहा- बेटा सोचते हैं इस बारे में! इतनी जल्दी तो कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता.
इसके बाद मैंने सोनू से कहा- तुम्हें चिकन बहुत पसंद है न?
सोनू- हाँ मम्मी
शिवानी भी बोली- हाँ माँ, आज चिकन बनाया जाए!

मैंने सोनू को अंदर के कमरे में बुलाया और उसे पैसे दिए और कहा- बेटा, चिकन ले आओ, मैं बना देती हूँ!
इस पर सोनू मुस्कुराया और पैसे लेकर बाहर चला गया.

थोड़ी देर में सोनू चिकन लेकर आ गया, मैंने चिकन बनाया और सबसे पहले शिवानी को खिला दिया.
खाना खाने के बाद वो सोने चली गयी हॉल में!
फिर मैंने सोनू से कहा- बेटा, तुम अंदर के कमरे में चिकन लेकर जाओ, मैं अभी आती हूँ!

सोनू अंदर चला गया, घर का सारा काम कर के मैं भी अंदर कमरे में आयी. सोनू बेड पे लेटा हुआ था और चिकन बेड पे ही रखा हुआ था.
मैं भी बेड पर बैठ गयी.

जब तक सोनू के पापा थे, चिकन के साथ एक दो पेग दारू जरूर पीते थे और मुझे भी पिलाते थे.
चिकन तो दिख रहा था लेकिन कुछ कमी लग रही थी और मैं अपने बेटे से दारू की कैसे कहूँ? यह सोच कर मैं सोच में डूबी हुई थी.

तभो सोनू ने कहा- मम्मी, क्या सोच रही हो? खाओ न चिकन, तुम्हें भी तो बहुत पसंद है!
मैं- बेटा, पसंद तो है लेकिन ऐसे सूखा सूखा कुछ अच्छा नहीं लग रहा!
सोनू तुरंत समझ गया और मुझसे तपाक से कहा- मम्मी, क्या तुम पीती भी हो?
मैं- बेटा जब तक तुम्हारे पापा थे, मुझे हमेशा ही पिलाते थे चिकन के साथ!

सोनू हंसने लगा और बोला- चलो, अब पीने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं … मैं लेकर आता हूँ अभी!

मैंने कहा- नहीं, रहने दे बेटा, अब कहाँ जायेगा!
इस पर वो बोला- अरे माँ, तुम चिंता न करो, मैं अभी लेकर आता हूँ, पीने के बाद रात वाला नशा फिर से चढ़ेगा और जबरदस्त!

सोनू बाहर गया और थोड़ी ही देर में एक ब्लेंडर्स प्राइड की बोतल ले आया, साथ में सोडा भी!
जब तक सोनू बाहर था तो उसे लुभाने के लिए मैंने अपनी पुरानी स्कर्ट और टॉप पहन ली जो सोनू के पापा मुझे पहनाया करते थे सेक्स करने के पहले! लेकिन ऐसे कपड़े पहन कर कभी कमरे से बाहर नहीं गयी थी मैं!

सोनू अंदर आकर बेड पे बैठा और मेरी गोरी चिकनी जाँघें निहारने लगा. मैं समझ गयी कि इसे मेरा बदन बहुत पसंद आ रहा है.
मैं उठी और दो गिलास और बर्फ लेकर आ गयी.

अब हम दोनों मम्मी बेटा बेड पे बैठ गए और मैंने पेग बनाया पटियाला … उसमें बर्फ डाली और सोनू को कहा- मुझे नहीं लगता कि हमें दो गिलास की जरूरत है. एक से ही हम दोनों पियें तो?

सोनू का लौड़ा फनफना के खड़ा हो चुका था, उसने अंडरवियर नहीं पहना था तो मैं साफ़ देख के महसूस कर पा रही थी सोनू के लन्ड को!
मैं समझ गयी कि बेटा अब गर्म हो रहा था. तो पेग उठा कर और एक हाथ में चिकन का लेग पीस लेकर मैं सोनू की जांघों पर बैठ गयी. पहले उसे चिकेन खिलाया, फिर घूँट घूँट कर के उसे पिलाने लगी और खुद भी उसी में से पी और खा रही थी.

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