मेरे बदमाश दोस्त ने मेरी बीवी को लंडखोर बनाया

दोस्तो, मेरा नाम संजय है. मेरी बीवी का नाम अनु है. मैं 26 साल का हूँ और मेरी बीवी 25 साल की है. हमारी शादी को 5 साल हो गए हैं. हमारी एक बेटी है, वो अभी 4 साल की है. मैंने आज तक अंतर्वासना पर बहुत कहानियां पढ़ी हैं. तो अब मुझे लगा कि मैं भी अपनी कहानी भेजता हूं.

दोस्तो, किसी की कहानी सच हो ना हो, पर मेरी ये कहानी बिल्कुल सच है. इसमें बताई गई सारी बातें सच हैं.

हम राजस्थान के एक छोटे शहर में रहते हैं. पहले हम घरवालों के साथ संयुक्त परिवार में रहते थे, पर पिछले एक साल से हम कहीं अलग किराए के घर में रह रहे हैं. हमारी बेटी एक बोर्डिंग स्कूल में रह कर पढ़ने लगी है. यह हमारा घर, हमारे पुराने घर से काफी दूर था. इस कॉलोनी में हम नए थे, तो हमें कुछ दोस्तों की जरूरत थी. मेरी बीवी ने भी कुछ पड़ोस में दोस्ती कर ली और मैंने एक बहुत बड़ी गलती की कि कॉलोनी के एक बहुत ज्यादा बदमाश और नेता किस्म के आदमी से दोस्ती कर ली. उससे वहां के लोग बहुत डरते थे. मैंने उससे दोस्ती कर ली, मुझे पता नहीं था कि उस बदमाश दोस्त ने मुझसे दोस्ती सिर्फ मेरी बीवी के लिए की थी.

मैं मेरी बीवी से और मेरी बीवी मुझसे बहुत प्यार करती है. मैं एक प्राइवेट बैंक में सर्विस करता हूं और मेरी बीवी एक गृहणी है. वह बहुत सुंदर है. उसका फिगर 36-28-36 का है. वो इतनी ज्यादा हॉट है कि उसको देख कर कोई भी उसको चोदना चाहेगा. मेरा ये मवाली दोस्त भी यही चाहता था.

शुरू में मुझे पता नहीं चला. इस दोस्त का नाम करण पाल था. मैं उसे शुरू में घर लाने लगा. उसके पास स्कॉर्पियो गाड़ी थी और उसका नाम भी बहुत था, जिस कारण से मैं सोचता कि यह दोस्त अपने किसी काम आएगा और यह अच्छा आदमी है.

पर धीरे धीरे मुझे शक होने लगा क्योंकि जब करण पाल घर आता तो मेरी बीवी से काफी खुल के बात करता और से देख कर काफी अलग अंदाज में हंसता था. जब मैं ऑफिस में होता तो भी वह किसी ना किसी बहाने से मेरे घर आ जाता था और अनु से काफी मजाक करता था. इस कारण मुझे उस पर काफी शक होने लगा.

एक दिन जब मैंने रात को मेरी बीवी को चोद रहा था. तब मेरी बीवी ने कहा- करण पाल जी अच्छे आदमी हैं, मुझे वो अच्छे लगने लगे हैं.
उसी समय मैंने सोच लिया कि इसका मतलब ये हुआ कि मेरी पत्नी भी उसकी ओर धीरे धीरे आकर्षित हो रही है.

फिर मैंने एक दिन मेरे उसी दोस्त करण पाल को घर बुलाया, चाय पिलाई और कहा- दोस्त आप बहुत अच्छे हो … पर मेरी बीवी को ये अच्छा नहीं लगता कि कोई भी घर में ज्यादा आए. तो आप कृपया बुरा मत मानना … पर हम आगे से बाहर ही मिलेंगे.
करण पाल यह सुनकर गुस्से से लाल पीला हो गया और उसने जोर से आवाज़ लगाते हुए मेरी बीवी को बुलाया- अनु भाभी … अनु जी … सुनिए.

मैं उसकी इस बात से हैरान रह गया. तभी मेरी बीवी भागती हुई आई और उसने पूछा- क्या हुआ जी, इतनी जोर से क्यों आवाज लगाई?
करण झट से बोला- बताओ भाभी, जब मैं आपके घर आता हूं तो क्या आपको अच्छा नहीं लगता या आपको मैं बहुत बुरा लगता हूं?
तो भाभी थोड़ा हंस के और थोड़ा डर कर तुरंत बोली- किसने बोला आपको? ऐसा बिल्कुल नहीं है … मुझे तो आप अच्छे लगते हो, हमें कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि आप आते हो तो, यह तो हमारा सौभाग्य है कि आप जैसे लोग बड़े लोग हमारे यहां आते हैं.

यह सुनकर करण पाल ने कहा- फिर ये पागल क्या बोल रहा है?
मैं बहुत डर गया क्योंकि मैं जानता था कि करण पाल बहुत खतरनाक गुंडा है. मैं उसकी बात पर झूठ मूठ ही हंसने लगा.
मैंने खिसियाते हुए कहा कि मैं तो मजाक कर रहा था … तुम्हें ऐसे ही परेशान कर रहा था.

करण पाल ने संजीदा होकर कहा- ऐसा मजाक मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है, दोबारा ऐसी वाहियात बात मत करना. मुझे तुम लोग अच्छे लगते हो, तो मैं बिल्कुल आपके घर आऊंगा … तुम्हें कोई परेशानी है … तो बताओ?
मैंने तुरंत डरते हुए कहा- ठीक है.
मैं उसी समय वहां से चला गया.

अगले दिन जब मैं ऑफिस से घर आया तो मैंने देखा कि अनु और करण पाल एक कमरे में पास पास बैठे थे और बातें कर रहे थे. यह देखकर मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा, लेकिन मैं क्या कर सकता था.
मैंने तब भी हिम्मत जुटाते हुए कहा- क्या कर रहे हो?
मेरी बात सुनकर मेरी बीवी उठ गई … लेकिन करण पाल वहीं बैठा रहा.
अनु बोली- मैं चाय बना कर लाती हूं.
अनु ये कहते हुए वहां से चली गई.

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