मुझे मिला मेरे भाई का नया लंड

अजय- प्लीज दी, आप चुप हो जाओ, मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा, प्रोमिस! और आप जैसे चाहो रह सकती हो, ये आपकी लाइफ है दी।
मैं अजय की इस बात से बहुत खुश हुई और अब अजय सोफे पर बैठ गया और मैं उसके पास बैठ गई।

अजय ने मुझे पानी पिलाया और दुबारा चाय बनाने के लिये चला गया।
फिर मैं नहाने चली गयी और नहा कर अपने बैडरूम में कपड़े पहनने के लिये जाने लगी।

मैं पेंटी को हाथ में लेकर दर्पण में खुद के जिस्म को देख कर सोच रही थी कि कल रात में कितना कुछ हो गया।

मैं दरवाजा लॉक करना भूल गयी थी, इतने देर में अजय चाय लेकर अन्दर आ गया और मुझे देख कर शॉक्ड हो गया फिर वापिस जाने लगा।
मैं- रूको अजय।
अजय ने अपनी आँखें बंद की हुई थी, हाथ में चाय का ट्रे लेकर खड़ा था और सॉरी बोल रहा था।

मैंने ट्रे लेकर बैड पर रख दिया और बोली- एक शर्त पर माफ करूंगी।
अजय- दी, आप माफ कर दो, मुझे हर शर्त मंजूर है।

मैं झुकी और अजय के हाथ में ब्रा देकर बोली- बिना मुझे देखे इसे मुझे पहनाओ जैसे रात को पहनाई थी।
अजय- पर दी..

अजय कुछ बोलता उससे पहले मैंने उसके होंठों पर उंगली रख दी और बोली- जैसे कहा, वैसा करो।
और उसका हाथ पकड़ कर उसे दर्पण के सामने ले गयी जहाँ पर मैं खुद का नंगा जिस्म अपने भाई के हाथों में देख सकूँ।
मैं- पहना दो।

अब मेरे भाई ने एक हाथ मेरे नंगे कन्धे पर रख दिया और दूसरे हाथ को मेरे चेहरे पर लगा कर छूने लगा। फिर उंगलियों से मेरे आँखों को फिर होंठों को छूते हुए नीचे जाने लगा। उसके बाद उसने दोनों हाथों को मेरी नंगी चुचियों पर रख दिया और सहलाते हुए ब्रा का कप मेरे चुचियों पर लगा दिया। फिर एक हाथ से मेरे एक चुची पर ब्रा को दबा कर अजय मेरे पीछे आ गया। जिससे मेरे दूसरी चुची का कप हट गया।

अजय ने मेरे पीछे से मेरी दूसरी चुची को पकड़ लिया और ब्रा को दुबारा लगा कर उसका हुक बंद करने की कोशिश करने लगा।

मेरे भाई का लंड बिल्कुल खड़ा हो गया था जो मेरी गांड में छू रहा था। अब मैंने अपनी गांड को थोड़ा पीछे किया और अजय के लंड पर रगड़ दिया जिससे अजय थोड़ा सा असामान्य हो गया और कसकर मुझे पीछे से पकड़ लिया और अपने लंड को मेरी गांड पर दबा दिया।

मेरी ब्रा नीचे गिर गयी थी। मेरा भाई मेरे नंगे जिस्म को पीछे से पकड़ कर सहला रहा था, मेरी चुचियों को दबा रहा था और अपना लंड मेरी गांड में रगड़ रहा था।
मेरी चूत पानी छोड़ रही थी, मैंने अजय का हाथ अपनी चूत पर रख लिया और बोली- जैसे रात में किया था, वैसे करो।

अब अजय ने मेरे चेहरे को घुमा लिया और मेरे होंठों पर होंठ रख कर चूसने लगा और अपने हाथ की दो उंगली मेरी गीली हूई चूत में डाल दी।
मैं सिहर गई और कसकर अपने भाई की बांहों में सिमट गयी। मेरा भाई तेज तेज मेरी चूत में उंगली डाल रहा था।

अब मैंने अपना हाथ पीछे ले जाकर भाई की पैंट को खोल दिया। मेरे भाई ने चड्डी नहीं पहनी थी जिससे उसका खड़ा लंड मेरे गांड से टकरा गया। मैंने अपने चूतड़ों को फैला कर अपने भाई का लंड अपनी गांड में फंसा लिया।
मैं- अजय, मेरा नंगा जिस्म देखोगे?
अजय ने आँखें बंद किये हुए ही हां में सर हिलाया।

मैं अजय के होंठों को चूम कर बोली- आँखें खोलो।
मेरा भाई धीरे धीरे आँखें खोल रहा और दर्पण में देख रहा था उसकी बहन बिल्कुल नंगी उसकी बांहों में है। उसका एक हाथ अपनी बहन की नंगी चुचियाँ दबा रहा है और दूसरा हाथ अपनी बहन की चूत में उंगली डाल रहा है। उसकी बहन हाथ पीछे ले जाकर अपने भाई का लंड हिला रही है और अपनी गांड पर सेट कर रही थी।

अजय- दी, आप बहुत खूबसूरत हो अन्दर से।
मैं- क्या अच्छा लग रहा है मेरे भाई को?
अजय- आपके दूध, आपकी नंगी कमर, आपकी नंगी जांघें… आपकी नंगी चू…
मुझे ये सब सुन कर बहुत उत्तेजना होने लगी थी- अजय, क्या करना चाहते हो अपनी बहन के नंगे जिस्म के साथ?
अजय- चाटना चहता हूँ दी… आपके निप्पल चूसना चहता हूँ।

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैं अजय की तरफ घूम गई उसके होंठों को मुँह में ले लिया और उसका टीशर्ट निकाल कर उसे बेड पर लिटा दिया और खुद नंगी ही उसके ऊपर लेट गयी। अपना निप्पल उसके मुंह में दे दिया जिसे मेरा भाई आँख बंद करके चूसने लगा।
मैं- आह्ह्ह… जोर से चूसो अजय, निकाल दो इसमें से दूध और पी जाओ।

अजय मेरी एक चुची को दबा रहा था और दूसरी को पी रहा था।
मैं- आहह आहह आहह जोर से अजय।
अब मैंने चाय का कप उठा लिया, अब तक चाय ठंडी हो चुकी थी, उसमें निप्पल डाल कर अजय को अपने निप्पल से चाय पिलाने लगी। मेर भाई मेरे निप्पल पर लगी हुई चाय को चाट रहा था।
मैं- आह्ह्ह आह्ह्ह… जोर से काट लो मेरी चुचियों को। आह पी लो मेरे भाई!

Pages: 1 2 3

Dont Post any No. in Comments Section

Your email address will not be published. Required fields are marked *